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संपादकीय

लेख@ गालिब बहुत गहराई में मत जा…

उर्दू का मशहूर शायर,गालिब आगरा का रहने वाला था! बाद में वह मुगल सल्तनत के आखिरी ताजदार बादशाह, बहादुर शाह जफर के दरबार की रौनक बढ़ाया करता था। गालिब को आम खाने तथा शराब पीने का बहुत शौक था। गालिब की लिखी हुई बहुत सारी गजलें हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि दुनिया के बहुत सारे देशों में शौक से पढी¸ …

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लेख@ नौकरी लगते ही पतियों को छोड़ रही हैं आधुनिक औरतें

रिश्तों की हत्या का आधुनिक ट्रेंडरोज़गार मिला,रिश्ते छूटे,जिसने पढ़ाया, वही पराया हो गयाविवाह अब त्याग और समर्पण की बजाय स्वार्थ और स्वतंत्रता की शरण में चला गया है। अनेक मामले सामने आ रहे हैं जहाँ पति ने पत्नी को पढ़ाया, नौकरी लगवाई, पर जैसे ही वह आत्मनिर्भर हुई, पति को ठुकरा दिया। यह आधुनिक सोच रिश्तों को तोड़ रही है। …

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लेख@ भारतीय सेना ही देश के असली नायक

ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान को सबक भारतीय सेनाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश को सुरक्षित किया इसकी प्रशंसा करनी चाहिए इसे राजनीति के दृश्टिकोण के नज़रिया से नहीं बल्कि देश हित मे देखना चाहिए क्योंकि उनकी हमेशा मानसिकता देश को बचाने की होती है और सेना का मनोबल हर उस देश का राष्ट्रपति सेना को उनकी बहादुरी …

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लेख@ आधा-अधूरा कृत्रिम मेधा का ज्ञान देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपकी नब्ज पढ़कर आपके मस्तिष्क की बात तुरंत पकड़कर उस पर अमल करने लगेगा। कृत्रिम मेधा की तकनीक को वैज्ञानिकों ने मानव की सहायता के लिए और देश की बेहतरी के लिए अविष्कार किया है।अभी तक तो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया,ब्रिटेन,इजरायल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में काफी आगे हो गये हैं। अब खाड़ी के देशों विगत 5 साल में …

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लेख@ साइकोलॉजी पर आधारित मानसिक रोग वैज्ञानिक तथ्य और कर्म बंधन की थ्योरी

मानव को कुदरत ने सभी अन्य जीव जंतुओं से हटकर दिमाग प्रदान किया है जो मनुष्य को सोचने समझने की ताकत देता है। यदि जीवन को सुचारु रूप से चलना हो तो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानव का मानसिक तौर पर स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। यदि व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो देता है तो वह समाज से कट जाता …

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लेख@ चुनाव आयोग पर वारःलोकतंत्र के लिये खतरे की घंटी

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है,और इस लोकतंत्र की बुनियाद जिन संस्थाओं पर टिकी है, उनमें चुनाव आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण, निष्पक्ष और प्रतिष्ठित मानी जाती है। किंतु लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वाले प्रमुख विपक्षी नेता श्री राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जब चुनाव आयोग जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्था पर वोट चोरी में शामिल होने एवं …

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लेख@जनता की बात नहीं सुनते संपादक,फिर किसके लिए हैं अखबार?

महाराजा संपादक जब चौपाल बंद हो जाए और दरबार लगने लगेजनता की बात नहीं सुनते संपादक, फिर किसके लिए हैं अखबार?जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए,तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती है। आज बड़े संपादक आम आदमी से कट चुके हैं,गाँव-कस्बों की आवाज़ें अखबारों में गुम हैं। संवाद की जगह प्रचार ने …

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लेख@ जब बच्चों की शिक्षा पर भारी पड़ता है पाखंड

भारत में बच्चों की शिक्षा को लेकर सबसे बड़ा संकट केवल गरीबी या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि धार्मिक पाखंड है। कुछ स्वयंभू बाबाओं द्वारा शिक्षा को अपवित्र,स्ति्रयों के लिए अनुपयुक्त और समाज विरोधी बताकर बच्चों को स्कूल से दूर रखा जाता है। यह प्रवृत्ति न केवल संविधान के विरुद्ध है,बल्कि समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। लेख …

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लेख@ डिंपल की तौहीन पर अखिलेश की चुप्पी की मजबूरी

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की छवि एक प्रखर नेता के रूप में होती है। अखिलेश खुलकर अपनी बात कहते हैं। यूपी में बीजेपी को समाजवादी पार्टी टक्कर देती रही है,लेकिन अखिलेश की राजनीति का यह एक ही पक्ष है दूसरा पक्ष इसके बिल्कुल उलट है। दरअसल,बात जब अल्पसंख्यकों से जुड़ी होती है तो …

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लेख@ भारत को नहीं चाहिए अमेरिका से कोई समझौता करना

भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी अमेरिका ने भारत को दी । डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की है, इस समझौते का उद्देश्य पाकिस्तान के तेल भंडार का विकास करना है। दरअसल अमेरिका चाहता है भरी संसद में माननीय प्रधान मंत्री का अपमान करना और अमेरिका के राष्ट्र्रपति के सुर में …

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