-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर ,17 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)।एक तरफ वन विभाग जंगलों को बचाने तथा पौधे लगाने जगह जगह वन महोत्सव का आयोजन कर ग्रामीणों को प्रेरित कर रही है। वहीं पर दूसरी ओर हरे भरे बेशकीमती पेड़ों को काटकर उस जगह पर कब्जा करने का सिलसिला दिन ब दिन लोगों में बढ़ता जा रहा है। फिर भी इसे रोकने विभाग कारगर साबित नही हो रही है। यही वजह है कि कभी वृक्षों से आच्छादित घने जंगल आज वीरान होकर मैदान में तब्दील हो रहे हैं। वन परीक्षेत्र घुई के ग्राम बडवार ननहई बंधवा और किरीया नदी के ऊपर में के लगे जंगल में लगभग 100 से डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर अवैध अतिक्रमण जारी है इस संबंध में ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी सूचना दी लेकिन वन विभाग के कर्मचारी बिल्कुल भी निष्कि्रय नजर आ रहे हैं जिससे वन विभाग के बड़े भूभाग में अतिक्रमण जारी है जानकारी के अनुसार ग्रामीणों द्वारा पहले हरे भरे वृक्षों के निचले भाग के ऊपरी सतह में मौजूद छाल वाले भाग को टांगी से थोड़ा थोड़ा गहरानुमा काटकर अलग कर दिया जाता है जिससे वृक्ष के ऊपरी भाग में पानी, ऑक्सीजन सहित अन्य पोषक ततव नही जा पाता है। जिस कारण वृक्ष एक से दो माह में सूख जाता है। सूखने के बाद इसे काटकर गिरा दिया जाता है। कब्जाधारी ग्रामीणों में यह क्रम निरंतर जारी है।
घुई वन परिक्षेत्र में इस प्रकार के दर्जनों साल के वृक्षों को सूखने के लिये छोड़ दिया गया है जबकि वन भूमि पर कब्जा जमाने के लिये ग्रामीण जुताई कर रहे हैं। वन विभाग को जानकारी होते हुये भी इस पर अब तक कोई कार्यवाही नही की जा रही है। शासन जब से वन भूमि पर काबिज आदिवासी वर्ग के लोगों को पट्टा प्रदान कर रही है तब से आदिवासी वर्ग सहित अन्य वर्गो में वन भूमि पर कब्जा जमाने हरे भरे वृक्षों की अवैध कटाई करने की होड़ लगी है।
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