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बैकुण्ठपुर@कलेक्टर व डीएफओ ने पौधे को गड्ढे में डाला,नपा उपाध्यक्ष ने मिट्टी डाला,कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने पानी डाला हो गया वृक्षारोपण

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  • क्या इन चारों के सहयोग से 44 डिग्री तापमान में पौधा सुरक्षित भी रहेगा?
  • क्या प्रतिवर्ष लगाए जा रहे वृक्षों को लेकर सजग हैं वृक्षारोपण करने वाले और जिम्मेदार?
  • एक वृक्ष,लगाने वाले अनेक,विश्व पर्यावरण दिवस पर कोरिया जिले में वृक्षारोपण कार्यक्रम।
  • वृक्षारोपण कार्यक्रम में जिलाधीश सभी अधिकारी, सत्ताधारी दल सहित विपक्ष के नेता भी रहे मौजूद।
  • वृक्षारोपण को लेकर आखिर कब तक होता रहेगा दिखावा,प्रतिवर्ष वृक्षारोपण पर लाखों खर्च।
  • विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण को लेकर संकल्पित हुए प्रतिभागी,सवाल।
  • केवल आयोजन तक सिमट कर रह गया है प्रतिवर्ष का वृक्षारोपण व पर्यावरण दिवस।
  • वृक्षों की सुरक्षा और उनकी देखरेख से किसी को आयोजन के बाद नहीं रहता मतलब।


-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 06 जून 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिला मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन में जिले के आला अधिकारियों सहित सत्ताधारी दल सहित विपक्ष के नेताओं की शिरकत भी रही लेकिन एक वृक्ष और सभी की उसी उसी वृक्ष के साथ तस्वीर ने साबित कर दिया कि पर्यावरण से किसी को कोई लेना देना नहीं था केवल और केवल वृक्षारोपण दिवस के अवसर पर फोटोग्राफी हो जाये सभी की यही मंशा दिखी। बड़ी विडंबना है और बड़े खेद का विषय है कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन केवल आयोजन तक ही सीमित दिखा। आयोजन भले ही कई और जगह हुए होंगे लेकिन जिला प्रशासन ने जिस आयोजन को तवज्जो दिया वह आयोजन फोटोग्राफी से बढ़कर कुछ भी नहीं रह गया, जहां कइयों ने केवल एक वृक्ष के साथ अपनी फोटोग्राफी कराई और बस आयोजन सफल बताया।
आज जिस तरह से पर्यावरण गर्म हो रहा है भीषण गर्मी पड़ रही है उसको देखते हुए वृक्षों की जरूरत पर्यावरण को सबसे ज्यादा है और ऐसे समय मे भी वृक्षारोपण को लेकर केवल फोटोग्राफी तक सीमित रहना कहां तक जायज है यह समझा जा सकता है। प्रतिवर्ष वृक्षारोपण के नाम पर लाखों करोड़ों खर्च किये जा रहें हैं लेकिन प्रतिवर्ष आयोजन के नाम पर लगाए जा रहे वृक्षों की वर्तमान संख्या क्या शेष बची है यदि इसकी जानकारी ली जाए तो यही पता चलेगा आयोजन के बाद वृक्षों की सुरक्षा और उनकी संरक्षा की ही नहीं गई और वृक्ष बचे भी नहीं। अभी विगत सालों में ग्राम पंचायतों को वृक्षारोपण के नाम पर और उनकी संरक्षा के नाम पर लाखों की राशि प्रदान की गई थी इस राशि मे वृक्षों की देखरेख सहित वृक्षों को पानी देने के नाम पर मजदूरी की भी व्यवस्था शासन द्वारा की गई थी लेकिन शासन की वह मंशा भी कितनी सफल हुई यह पंचायतों जिन्हें भी वृक्षारोपण के नाम पर राशि प्राप्त हुई वहां के वृक्षारोपण की स्थिति की जानकारी लेकर जानी जा सकती है। कुल मिलाकर वृक्षारोपण को लेकर पर्यावरण को लेकर न तो शासन सजग है और गंभीर है न प्रशासन और न हि आम लोग।
विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम केवल फोटोग्राफी तक सीमित
आज वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम विश्व पर्यावरण दिवस जैसे कार्यक्रम केवल फोटोग्राफी आयोजन बनकर रह गए हैं और फोटोग्राफी के बाद वृक्षों की स्थिति को लेकर किसी को कोई लेना देना नहीं है। प्रतिवर्ष वृक्षों को तैयार करने सहित वृक्षों के रोपण को लेकर कई आयोजन होते आ रहें हैं लेकिन वृक्ष कहीं दिख रहे हैं ऐसा कहीं नजर नहीं आ रहा है। जिला मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हुए आयोजन के बाद एक सवाल जरुर उठता है कि जिस तरह एक वृक्ष के साथ उसके रोपण को लेकर जिले में पर्यावरण दिवस मनाया गया क्या उस एकमात्र वृक्ष की सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी सभी उपस्थित लोग लेंगे और उसे एक पूरा वृक्ष बनने तक उसकी देखरेख करेंगे या केवल यह आयोजन की सफलता तक ही सीमित आयोजन बनेगा।
वृक्षारोपण कार्यक्रम वृक्षों की सुरक्षा से ही सफल हो सकेगा
जिले में प्रतिवर्ष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं,वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल फोटोग्राफी तक सीमित रहता है यह भी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी, जबतक वृक्षों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ली जाएगी तबतक वृक्षारोपण कार्यक्रम सफल नहीं होंगे। आज जरूरत फोटोग्राफी की नही वृक्षों की सुरक्षा की है और यह हो पाता है कि नहीं यह अब लगाए गए वृक्षों के अगले वर्ष तक बचे रहने उपरांत ही पता चल सकेगा।


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