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अंबिकापुर@हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन? शहर के बीच बारूद का खतरा,आखिर किसके संरक्षण में चल रहे गोदाम!

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बिलासपुर रोड से महामाया रोड और पुराना बस स्टैंड तक पटाखों के भंडारण पर उठ रहा है सवाल,संकरी गलियों में हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?


-संवाददाता-
अंबिकापुर,04 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर में पटाखों की दुकानें और गोदाम कहां संचालित हो रहे हैं,उनमें कितना ज्वलनशील और विस्फोटक सामान रखा जा रहा है तथा इन प्रतिष्ठानों को किन शर्तों पर अनुमति दी गई है, यह अब नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है। बिलासपुर रोड पर पेट्रोल पंप के आसपास,महामाया रोड से अंदर जाने वाली संकरी गलियों में दुकानों और गोदामों तथा पुराना बस स्टैंड के आसपास ऐसे प्रतिष्ठानों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर घनी आबादी और व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच इस तरह का भंडारण कितना सुरक्षित है? क्या संबंधित विभागों ने कभी मौके पर पहुंचकर इसकी गंभीरता से जांच की है?
23 अप्रैल का अग्निकांड भूला नहीं शहर
अंबिकापुर के ब्रह्मपारा स्थित राम मंदिर रोड पर 23 अप्रैल 2026 को मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा दुकान में लगी भीषण आग को शहर अभी भूला नहीं है। संकरी गली में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया था। पटाखों में हुए धमाकों से आसपास के मकानों तक खतरा पहुंचा और करीब आठ मकान प्रभावित हुए। आग पर काबू पाने के लिए कई स्थानों से दमकल वाहन बुलाने पड़े। गनीमत रही कि इस भयावह घटना में जनहानि नहीं हुई, लेकिन बड़ा सवाल यह था कि आखिर रिहायशी इलाके में इतनी संवेदनशील सामग्री का भंडारण कैसे हो रहा था?
घटना के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने शहर के सभी पटाखा गोदामों को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार शहर में आठ स्थायी पटाखा लाइसेंसधारी और दो पटाखा निर्माण लाइसेंसधारी संचालित थे। एसडीएम को गोदामों की स्थिति,अग्निशमन वाहनों की पहुंच, लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा इंतजामों की जांच कर सात दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए थे।
जांच और कार्रवाई पर
भी उठे थे सवाल

इस अग्निकांड के बाद पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आई थी। सरगुजा रेंज के तत्कालीन आईजी दीपक कुमार झा ने प्रकरण में विस्फोटक अधिनियम की धाराएं नहीं जोड़े जाने पर एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में एफएसएल जांच में जले हुए पटाखों के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई और प्रकरण में विस्फोटक अधिनियम सहित अन्य धाराएं जोड़ी गईं। यानी जिस घटना को लेकर शुरुआत में कार्रवाई पर सवाल उठे, उसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद विवेचना की दिशा में बदलाव करना पड़ा।
यह घटनाक्रम बताता है कि केवल जांच के आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। सवाल यह है कि जांच के निष्कर्ष क्या निकले,जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई और शहर में संचालित अन्य गोदामों को बाहर स्थानांतरित करने के आदेश का कितना पालन हुआ?
फिर वही खतरा,फिर
वही इंतजार क्यों?

आज बिलासपुर रोड पर पेट्रोल पंप के आसपास,महामाया रोड की अंदरूनी संकरी गलियों और पुराना बस स्टैंड के आसपास पटाखों की दुकानों एवं गोदामों को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। यदि इन स्थानों पर निर्धारित लाइसेंस से अधिक मात्रा में पटाखों का भंडारण हो रहा है अथवा लाइसेंस में दर्ज स्थान से अलग कहीं स्टॉक रखा जा रहा है,तो यह गंभीर जांच का विषय है। विशेषकर पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की स्थिति का तत्काल सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए। संकरी गलियों में दमकल वाहनों का पहुंचना भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना के बाद बचाव कार्य में होने वाली देरी भयावह परिणाम ला सकती है।
क्या कार्रवाई सिर्फ आदेश और कागजों तक सीमित रह गई?
शहर में चर्चा है कि पहले भी बीच शहर में पटाखों से जुड़ी घटना के बाद जांच और कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे थे। कुछ लोगों का कहना है कि जांच में विस्फोटक नहीं मिलने की बात सामने आई थी और मामला आगे नहीं बढ़ा। हालांकि अप्रैल 2026 के राम मंदिर रोड अग्निकांड में बाद की एफएसएल जांच में पटाखों के अवशेष मिलने और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जुड़ने की खबरें सामने आई थीं। इसलिए जांच के वास्तविक निष्कर्ष और अब तक की कार्रवाई सार्वजनिक करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोगों की यह टिप्पणी कि ‘कुछ नहीं होगा भईया, सब लक्ष्मी जी की माया है’ केवल एक व्यंग्य नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास को भी दर्शाती है।
प्रशासन को इस धारणा को गलत साबित करना होगा।
अब हादसे का इंतजार नहीं, कार्रवाई जरूरी है…
अंबिकापुर की जनता किसी और भीषण अग्निकांड या विस्फोट के बाद प्रशासनिक सक्रियता नहीं देखना चाहती। शहर के बीच पटाखों के बड़े गोदामों का संचालन किसी भी परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता। व्यापार करना किसी का भी अधिकार है,लेकिन उस अधिकार की कीमत हजारों नागरिकों की जान को जोखिम में डालकर नहीं चुकाई जा सकती। जिला प्रशासन,पुलिस,नगर निगम,अग्निशमन विभाग और विस्फोटक लाइसेंसिंग प्राधिकरण को संयुक्त अभियान चलाकर शहर के सभी पटाखा प्रतिष्ठानों की जांच करनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल सीलिंग,लाइसेंस निरस्तीकरण और वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए। सभी थोक भंडारण केंद्रों को आबादी से दूर निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। आखिर प्रशासन किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी निर्दोष परिवार की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी? अंबिकापुर को पटाखों के कारोबार से आपत्ति नहीं, बल्कि शहर के बीच बारूद के संभावित खतरे से है। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में अब आश्वासन नहीं,जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए।
जनहित में प्रशासन से सीधे सवाल…

  • शहर के भीतर संचालित सभी पटाखा दुकानों और गोदामों का भौतिक सत्यापन कब हुआ?
  • क्या प्रत्येक प्रतिष्ठान के पास वैध लाइसेंस है और भंडारण उसी स्वीकृत स्थान पर हो रहा है?
  • पेट्रोल पंपों और घनी आबादी के आसपास स्थित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जांच किसने की?
  • अप्रैल में गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के आदेश पर अब तक कितना अमल हुआ?
  • सात दिनों में मांगी गई जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई?
  • क्या प्रशासन सभी संवेदनशील गोदामों को तत्काल सील कर सुरक्षित बाहरी क्षेत्र में स्थानांतरित करेगा?

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