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अम्बिकापुर@शासकीय भूमि की हेराफेरी में आजाद इराकी समेत 5 के खिलाफ एफआईआर के निर्देश

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मैनपाट के केसरा गांव में 3.46 हेक्टेयर जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कूटरचना कर निजी नाम पर दर्ज कराने का मामला


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,23 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा जिले के मैनपाट तहसील के ग्राम केसरा में शासकीय भूमि को राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज कराने और बाद में उसकी रजिस्ट्री किए जाने के मामले में कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खसरा नंबर 1378,रकबा 3.46 हेक्टेयर से संबंधित मामले में जांच प्रतिवेदन के आधार पर आजाद इराकी समेत कुल पांच क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहसीलदार मैनपाट को निर्देशित किया गया है। साथ ही राजस्व अभिलेखों में की गई कथित अवैध प्रविष्टि को विलोपित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार,ग्राम केसरा स्थित उक्त शासकीय भूमि को राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज कराने और बाद में दूसरे निजी व्यक्तियों के पक्ष में रजिस्ट्री किए जाने की शिकायत मिली थी। शिकायत को समय-सीमा में दर्ज कर कलेक्टर ने तहसीलदार मैनपाट से जांच प्रतिवेदन मांगा था। तहसीलदार की जांच में सामने आया कि वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में अंतिम खसरा नंबर 650 था। ऐसे में उस समय के अधिकार अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि होना संभव नहीं था। जांच के अनुसार,खसरा नंबर 1378 रिनंबरिंग खसरा है, जो पहली बार वर्ष 1995-96 के राजस्व दस्तावेजों में सामने आया। जांच प्रतिवेदन में बताया गया कि वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की प्रविष्टि बाद में कूटरचना कर विजय सिंह पिता चंद्रचरण सिंह के नाम पर की गई। इसके बाद विजय सिंह के मुख्तार आम दिलीप चिकवा पिता रामप्रसाद चिरवा तथा तुलेश्वर गुप्ता पिता गणेश गुप्ता के माध्यम से उक्त भूमि की रजिस्ट्री आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी और अनुपम कुमार सिंह पिता रामाशंकर सिंह के पक्ष में किए जाने का उल्लेख है।
1995-96 में भी शासकीय भूमि के रूप में दर्ज : जांच में यह भी पाया गया कि बंदोबस्त वर्ष 1995-96 के राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 1378 की भूमि छोटे झाड़ जंगल मद में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। इससे भूमि को निजी नाम पर दर्ज किए जाने संबंधी प्रविष्टियों पर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने वन भूमि के हस्तांतरण के संबंध में वन संरक्षण अधिनियम,1980 और संबंधित न्यायालयीन निर्देशों का पालन आवश्यक बताया है। कलेक्टर के निर्देश पर अब मामले में संबंधित पांच क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही राजस्व रिकॉर्ड से अवैध प्रविष्टि हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।


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