सात दिन की मियाद भी बेअसर, 26 अक्टूबर को विद्युत कार्यालय की अनिश्चितकालीन तालाबंदी और घेराव की चेतावनी
कोरिया/पटना 23 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत चिरगुड़ा के कोचिला केंवटापारा में बिजली व्यवस्था की बदहाली अब ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गई है, ट्रांसफार्मर लंबे समय से खराबी से जूझ रहा था, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ गई है, पिछले करीब 20 दिनों से ट्रांसफार्मर पूरी तरह खराब होने के कारण ग्राम पंचायत चिरगुड़ा और छिंदिया के पांच वार्डों के लगभग 150 परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं, कृषि कार्य प्रभावित है, पेयजल व्यवस्था पर संकट है, लेकिन बार-बार शिकायतों और ज्ञापन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर में करीब 14 महीने पहले से खराबी शुरू हुई थी, इसके कारण तीन फेज बिजली आपूर्ति बाधित होकर केवल दो फेज तक सीमित हो गई थी, समय रहते मरम्मत या ट्रांसफार्मर बदलने की पहल नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती गई और अब बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, सवाल यह है कि जब ग्रामीण इतने लंबे समय से परेशानी झेल रहे थे, तब विद्युत विभाग ने स्थायी समाधान के लिए गंभीरता क्यों नहीं दिखाई?
ग्राम सुराज से जनदर्शन तक गुहार, फिर भी राहत नहीं- ट्रांसफार्मर बदलने की मांग को लेकर ग्राम पंचायत छिंदिया की उपसरपंच अंजू जायसवाल के नेतृत्व में ग्रामीण कई बार अपनी समस्या प्रशासन और विद्युत विभाग के सामने रख चुके हैं, ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम सुराज में दो बार, कलेक्टर जनदर्शन में दो बार तथा स्थानीय विधायक, जिला पंचायत सदस्य और संबंधित विभाग के समक्ष कई बार आवेदन दिए गए, इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है, ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायतें लगातार की जा रही थीं, तब विभागीय स्तर पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन बार-बार आवेदन देने के बाद भी बिजली व्यवस्था बहाल नहीं होना प्रशासनिक संवेदनशीलता और विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
अंधेरे में घर, ठप कृषि कार्य और पेयजल का संकट- बिजली संकट का असर केवल घरों की रोशनी तक सीमित नहीं है, ग्रामीणों के अनुसार, बिजली आपूर्ति बाधित होने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं और पेयजल की उपलब्धता भी मुश्किल बनती जा रही है, लगभग 150 परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी है, ग्रामीणों के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि लंबे समय से खराब होती बिजली व्यवस्था का परिणाम है, समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाते तो संभवतः हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
सात दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर, अब आंदोलन की तैयारी- ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर बदलने के लिए सात दिन की समय-सीमा देते हुए ज्ञापन सौंपा था, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, इससे नाराज ग्रामीण अब आंदोलन का रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को विद्युत कार्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी और घेराव किया जाएगा, इस संबंध में पटना तहसील कार्यालय, बैकुंठपुर अनुविभागीय कार्यालय, कोरिया कलेक्टर कार्यालय और संबंधित विद्युत विभाग को सूचना दिए जाने की बात कही गई है।
अब सवाल—शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारी किसकी?- यह मामला केवल एक ट्रांसफार्मर खराब होने का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की बार-बार की गई शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं होने का है, जब ग्राम सुराज और कलेक्टर जनदर्शन जैसे मंचों पर समस्या उठाई गई, तब संबंधित विभाग की ओर से समयबद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सात दिन की मियाद समाप्त होने के बाद भी ग्रामीणों को राहत क्यों नहीं मिली? और आखिर बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब कदम उठाएंगे? ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है की ट्रांसफार्मर को तत्काल बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, अब देखना यह है कि विभाग आंदोलन की नौबत आने से पहले समाधान करता है या ग्रामीणों को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए विद्युत कार्यालय की तालाबंदी और घेराव करने पर मजबूर होना पड़ता है।
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