- एसडीएम के आवंटन आदेश के बाद भी आवास के लिए भटक रहा कृषि विभाग का कर्मचारी,शिकायत पर कार्रवाई का इंतजार
- कागजों में आवंटन,जमीन पर दूसरे का कब्जा! सोनहत में सरकारी व्यवस्था पर सवाल
- सरकारी आदेश के पालन में देरी क्यों? सोनहत में आवंटित आवास को लेकर विवाद
- एसडीएम का आदेश बेअसर! सरकारी आवास के लिए भटक रहा कर्मचारी,आखिर किसकी शह पर कब्जा?
- आवास शुल्क जमा,फिर भी कमरे से दूरी! सोनहत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में उलझा आवंटन
- सरकारी आवास का गजब गणित : आवंटन किसी के नाम,निवास किसी और का!
- शिकायत के बाद भी नहीं मिला आवास का कब्जा, एसडीएम के आदेश के क्रियान्वयन पर सवाल
- सोनहत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अजब व्यवस्था! आदेश कागजों में,आवास पर दूसरे का कब्जा,न्याय के लिए भटक रहा सरकारी कर्मचारी
- एसडीएम के आवंटन आदेश के बावजूद कृषि विभाग के कर्मचारी को नहीं मिला कमरा जी-04 का आधिपत्य
- शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर सवाल आवास शुल्क जमा करने के दस्तावेजों की जांच की मांग…
–राजन पाण्डेय-
सोनहत/ कोरिया,२3 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरकारी कर्मचारियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में यदि आवंटन का आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित कर्मचारी अपने आवास में प्रवेश नहीं कर सके,तो सवाल सिर्फ एक कमरे का नहीं,बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के क्रियान्वयन का भी है,सोनहत स्थित छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की कर्मचारी आवासीय कॉलोनी से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है,कृषि विभाग में पदस्थ बीटीएम हीरलाल केवट का दावा है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व),सोनहत के आदेश से उन्हें कमरा नंबर जी-04 आवंटित किया गया, लेकिन इसके बावजूद वे आवास का वास्तविक आधिपत्य प्राप्त नहीं कर सके, शिकायतकर्ता के अनुसार,कमरे में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग में पदस्थ धन साय सिदार निवास कर रहे हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सक्षम अधिकारी ने आवास आवंटन का आदेश जारी कर दिया,तो उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसकी थी? शिकायत के बाद क्या जांच हुई और आवंटित कर्मचारी को अब तक आवास का कब्जा क्यों नहीं मिल पाया? वहीं,आवास शुल्क जमा करने से संबंधित दस्तावेजों और कमरे में वर्तमान निवास की स्थिति को लेकर भी स्पष्टीकरण आवश्यक है,फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायतकर्ता के पक्ष पर आधारित है, संबंधित अधिकारियों और दूसरे कर्मचारी का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एसडीएम के आदेश से आवंटित हुआ कमरा जी-04
प्राप्त जानकारी के अनुसार,कृषि विभाग सोनहत में बीटीएम के पद पर कार्यरत हीरलाल केवट ने शासकीय आवास के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सोनहत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था,इसके बाद संशोधित आदेश क्रमांक 716/जावक/ 2026, दिनांक 8 जुलाई 2026 जारी किए जाने की जानकारी दी गई है,बताया गया है कि आदेश के माध्यम से सोनहत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के द्वितीय ब्लॉक में कमरा नंबर त्र-04 हीरलाल केवट को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से आवंटित किया गया,लेकिन आवंटन आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें कमरे का वास्तविक आधिपत्य नहीं मिलने की शिकायत है,यदि आवंटन आदेश प्रभावी है और बाद में उसे निरस्त या संशोधित नहीं किया गया है,तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि कमरे का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है,क्या संबंधित आवास के लिए पहले से कोई दूसरा आवंटन आदेश जारी हुआ था? क्या पुराने आवंटन को निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी हुई थी? अथवा आवास खाली कराने और नए आवंटी को कब्जा दिलाने में प्रशासनिक स्तर पर देरी हो रही है? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों की जांच से ही मिल सकेगा।
13 जुलाई को शिकायत,फिर भी कब्जे का इंतजार
शिकायतकर्ता हीरलाल केवट के अनुसार, आवास पर कब्जा नहीं मिलने के संबंध में उन्होंने 13 जुलाई 2026 को एसडीएम सोनहत के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था,आवेदन में आवंटित कमरा खाली कराकर उसका आधिपत्य दिलाने का अनुरोध किया गया था,इसके बावजूद,उनके अनुसार, समस्या का समाधान नहीं हो सका,ऐसे में शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, यदि आवेदन मिलने के बाद जांच या कार्रवाई की गई है,तो उसका विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, यदि कार्रवाई लंबित है,तो विलंब का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए,किसी भी प्रशासनिक आदेश की उपयोगिता उसके प्रभावी क्रियान्वयन से ही सुनिश्चित होती है, आदेश जारी हो जाए,लेकिन संबंधित व्यक्ति को उसका लाभ न मिले, तो व्यवस्था की जवाबदेही तय करना आवश्यक हो जाता है,इस मामले में यह भी जांच का विषय है कि आवास की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण कराया गया या नहीं और संबंधित कर्मचारियों से उनके आवंटन संबंधी दस्तावेज मांगे गए या नहीं।
सरकारी खजाने में जमा राशि, लेकिन आवास के उपयोग पर सवाल
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू आवास शुल्क जमा करने से जुड़ा है,उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार,हीरलाल केवट ने ट्रेजरी चालान के माध्यम से सरकारी कोष में राशि जमा की है,प्रस्तुत विवरण में 30 जनवरी 2026 को 36 हजार रुपये और 27 फरवरी 2026 को 12 हजार रुपये जमा किए जाने का उल्लेख है, इसके अतिरिक्त 29 अप्रैल 2026 को भी आवास शुल्क जमा करने की जानकारी दी गई है,बताया गया है कि ये भुगतान प्रमुख लेखा शीर्ष 0216 के अंतर्गत किए गए,हालांकि,सभी भुगतानों की वास्तविक प्रकृति,संबंधित अवधि और कमरा नंबर त्र-04 से उनके संबंध की पुष्टि मूल चालान तथा विभागीय लेखा अभिलेखों से ही हो सकता है,यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि उपलब्ध विवरण में कुछ भुगतान 8 जुलाई 2026 के आवंटन आदेश से पहले के हैं, इसलिए यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी भुगतान इसी आदेश के तहत आवंटित कमरे के लिए किए गए थे, प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित राशि किस आवास,किस अवधि और किस आधार पर जमा कराई गई थी,यदि अभिलेखों से यह प्रमाणित होता है कि शुल्क संबंधित आवास के लिए जमा किया गया था,तो यह सवाल स्वाभाविक है कि आवास का वास्तविक आधिपत्य क्यों नहीं मिला,सरकारी आवास के शुल्क और उसके उपयोग के बीच किसी प्रकार का अंतर सामने आता है,तो उसकी जांच की जानी चाहिए।
दूसरे कर्मचारी के निवास का आधार क्या है?
शिकायतकर्ता के अनुसार, कमरा नंबर जी-04 में आरईएस विभाग के कर्मचारी धन साय सिदार निवास कर रहे हैं,हालांकि, उनके पास उस कमरे के लिए वैध आवंटन आदेश है या नहीं,इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती,इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पक्षों के दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी है,संबंधित कर्मचारी के आवंटन आदेश,आवास खाली करने से जुड़े निर्देश, यदि कोई हों, तथा हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के अभिलेखों से वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए,यदि दोनों कर्मचारियों के पक्ष में अलग-अलग समय पर आदेश जारी हुए हैं,तो यह भी जांचना होगा कि पुराने आदेश की वैधता क्या है और नए आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है, वहीं,यदि किसी व्यक्ति का कब्जा बिना वैध अनुमति के पाया जाता है,तो नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है, बिना दस्तावेजों की जांच के किसी कर्मचारी को अवैध कब्जाधारी घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन आवंटन आदेश और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी प्रशासनिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं होगा।
एचआरए और आवास शुल्क की भी होनी चाहिए पड़ताल
इस मामले में गृह किराया भत्ते (एचआरए) और सरकारी आवास के उपयोग से संबंधित सवाल भी उठाए गए हैं, शिकायतकर्ता ने आवास शुल्क जमा करने तथा आवास का उपयोग नहीं कर पाने की स्थिति पर सवाल उठाए हैं,हालांकि,किसी कर्मचारी को एचआरए मिल रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि वेतन विवरण और सेवा अभिलेखों से ही की जा सकती है,इसी प्रकार, सरकारी आवास में निवास करने की पात्रता,आवंटन की वैधता और संबंधित शुल्क की स्थिति की जांच लागू नियमों के आधार पर होनी चाहिए,यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है,तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, फिलहाल इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय संबंधित विभागों के अभिलेखों की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
सात दिन के नियम का आधार भी स्पष्ट होना जरूरी
शिकायत में आवास आवंटन के बाद सात दिनों के भीतर आधिपत्य ग्रहण करने की समयसीमा का उल्लेख किए जाने की जानकारी है,लेकिन इस समयसीमा का आधार,संबंधित नियम और उसकी लागू होने की परिस्थितियां स्पष्ट होना जरूरी है,प्रशासन को यह बताना चाहिए कि सात दिनों की समयसीमा किस नियम या विभागीय निर्देश के तहत निर्धारित है और इसका संबंध आवंटी द्वारा कब्जा लेने से है अथवा आवास खाली कराने की किसी दूसरी प्रक्रिया से,यदि आवास पर पहले से कोई कर्मचारी रह रहा है, तो ऐसी स्थिति में कब्जा हस्तांतरण की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है,यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
एसडीएम,हाउसिंग बोर्ड और आरईएस से जवाब जरूरी
एसडीएम, हाउसिंग बोर्ड और आरईएस से जवाब जरूरी- सोनहत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का यह मामला सरकारी आवासों के आवंटन और उनके वास्तविक उपयोग की व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े करता है, एक ओर आवंटन आदेश जारी होने की जानकारी है, दूसरी ओर शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें आवास का आधिपत्य नहीं मिला है, साथ ही, आवास शुल्क के भुगतान और कमरे में वर्तमान निवास की स्थिति को लेकर भी स्पष्टीकरण आवश्यक है, ऐसे में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सोनहत, हाउसिंग बोर्ड के संबंधित अधिकारियों और आरईएस विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि कमरा नंबर त्र-04 की वर्तमान स्थिति क्या है, उस पर किस आधार पर निवास किया जा रहा है, 13 जुलाई को प्राप्त शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और आवंटित कर्मचारी को आधिपत्य दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
अब कार्रवाई का इंतजार- हीरलाल केवट को आवंटित कमरा नंबर -04 का आधिपत्य नहीं मिल पाने की शिकायत ने सोनहत की सरकारी आवास व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच कर आवंटन आदेश, ट्रेजरी चालान, आवास की वर्तमान स्थिति और दोनों पक्षों के दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना जरूरी है, यदि आवंटन आदेश प्रभावी पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी को आवास का लाभ दिलाने में आ रही बाधाओं को दूर करने की दिशा में नियमानुसार कदम उठाए जाने चाहिए, वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए, सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सरकारी आदेश से आवास आवंटित किया गया है, तो पात्र कर्मचारी को उसका वास्तविक लाभ दिलाने में देरी क्यों हो रही है? अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत का निराकरण कब तक करता है और आवास के वास्तविक आधिपत्य को लेकर स्थिति कब स्पष्ट होती है।
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