- तीन घंटे सफर के बाद भी लोकेशन खोजने में लगा समय,5-10 मिनट की देरी पर केंद्र में प्रवेश के लिए लगानी पड़ी गुहार
- सीईटी परीक्षा का सेंटर बना पहेली, गूगल मैप ने भी अभ्यर्थियों को भटकाया
- परीक्षा देने पहुंचे,पहले सेंटर खोजते रहे…गूगल मैप ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की मुश्किल
- सीईटी परीक्षा में रास्ता ही बन गया परीक्षा,सेंटर तलाशने में
- अभ्यर्थियों के घंटे बर्बाद
- तीन घंटे का सफर,फिर सेंटर की तलाश…सीईटी अभ्यर्थियों के लिए
- परीक्षा से पहले नई परीक्षा
- इतना बड़ा स्कूल,फिर गूगल मैप पर लोकेशन क्यों उलझी? सीईटी
- अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानी
- अंबिकापुर के केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद विद्यालय बना परीक्षा केंद्र,तीन घंटे सफर के बाद भी लोकेशन तलाशने में उलझे अभ्यर्थी,कुछ मिनट की देरी पर केंद्र के बाहर लगानी पड़ी गुहार
-संवाददाता-
अंबिकापुर,04 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा यानी सीईटी-2026 का आयोजन 4 अक्टूबर को किया गया, परीक्षा के लिए जारी प्रवेश पत्र में सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, केशवपुर को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों के लिए जहां महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा का दिन महत्वपूर्ण था, वहीं कुछ अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा से पहले ही ऐसी परेशानी खड़ी हो गई,जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की थी। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए गूगल मैप का सहारा लेने वाले कई अभ्यर्थी सेंटर की सही लोकेशन तलाशते-तलाशते परेशान होते रहे,बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह परेशानी और बड़ी हो गई, कई अभ्यर्थी काफी दूर से सफर करके अंबिकापुर पहुंचे थे,लेकिन शहर पहुंचने के बाद भी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा, अभ्यर्थियों की मानें तो उन्हें गूगल पर परीक्षा केंद्र की लोकेशन खोजने में परेशानी हुई, मोबाइल पर लोकेशन तलाशने, रास्ता बदलने और स्थानीय लोगों से पूछताछ करने में काफी समय निकल गया, स्थिति यह हो गई कि करीब तीन घंटे का सफर तय करने के बाद भी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग गया, यह समस्या पहली नजर में भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन जिस अभ्यर्थी के लिए परीक्षा केंद्र में प्रवेश का समय निर्धारित हो और कुछ मिनट की देरी भी उसके पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती हो, उसके लिए सेंटर की लोकेशन तलाशने में एक-एक मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
गूगल के भरोसे सेंटर खोजते रहे अभ्यर्थी-आज प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दूसरे शहरों और जिलों से परीक्षा देने पहुंचते थे , उनके लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का सबसे आसान माध्यम मोबाइल और डिजिटल मैप बन चुका है, पहली बार किसी शहर में आने वाला अभ्यर्थी अक्सर आसपास के लोगों को जानता नहीं है, ऐसे में उसके पास परीक्षा केंद्र के नाम और मोबाइल लोकेशन के अलावा बहुत ज्यादा विकल्प नहीं होता, यही स्थिति सीईटी परीक्षा में भी दिखाई दी, अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र खोजने के लिए मोबाइल में गूगल मैप देखते रहे, लेकिन जब लोकेशन को लेकर ही असमंजस की स्थिति पैदा हो जाए तो परीक्षा से पहले ही अभ्यर्थी मानसिक दबाव में आ गए,जिस समय अभ्यर्थी को शांत मन से परीक्षा की तैयारी और अपने दस्तावेजों पर ध्यान देना चाहिए था, उस समय वह रास्ता खोजने में उलझा रहा।
सेंटर मिला तो प्रवेश को लेकर खड़ी हो गई दूसरी परेशानी- सबसे गंभीर स्थिति उन अभ्यर्थियों के सामने आई जो काफी मशक्कत के बाद परीक्षा केंद्र तक पहुंचे, लेकिन निर्धारित प्रवेश समय से कुछ मिनट पीछे रह गए, अभ्यर्थियों के अनुसार करीब 5 से 10 मिनट की देरी होने पर उन्हें परीक्षा केंद्र में ड्यूटी पर तैनात लोगों के सामने अपनी परेशानी बतानी पड़ी, उन्हें यह समझाने की कोशिश करनी पड़ी कि देरी जानबूझकर नहीं हुई बल्कि सेंटर की लोकेशन तलाशने में समय निकल गया, कई अभ्यर्थी के लिए यह स्थिति कितनी तनावपूर्ण रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, जिसने परीक्षा की तैयारी में महीनों लगाए हों, जिसने यात्रा के लिए पहले से समय निकाला हो और जो समय से पहले शहर पहुंच गया हो, उसके सामने यदि केवल सेंटर की लोकेशन के कारण प्रवेश का संकट खड़ा हो जाए तो परेशानी स्वाभाविक है।
मामला सिर्फ गूगल मैप का नहीं, परीक्षा व्यवस्था का भी- इस पूरे मामले को केवल गूगल मैप की समस्या कहकर खत्म करना भी पर्याप्त नहीं होगा, सवाल यह है कि जब किसी बड़े विद्यालय को राज्य स्तरीय परीक्षा का केंद्र बनाया गया था तो क्या परीक्षा से पहले यह सुनिश्चित किया गया था कि उसकी डिजिटल लोकेशन सही और स्पष्ट रूप से उपलब्ध है या नहीं? क्या परीक्षा केंद्र की लोकेशन को अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जांचा गया था? क्या बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए मुख्य मार्गों पर परीक्षा केंद्र से संबंधित दिशा-सूचक लगाए गए थे? क्या केंद्र तक पहुंचने में परेशानी वाले स्थानों पर कोई सहायता व्यवस्था थी? ये ऐसे सवाल हैं जिन पर परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
इतने बड़े विद्यालय का पता डिजिटल मैप पर स्पष्ट क्यों नहीं?-स्वामी आत्मानंद विद्यालय का नाम किसी छोटे निजी भवन की तरह नहीं है, यह एक बड़ा और जाना-पहचाना विद्यालय है,जब ऐसे विद्यालय को राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र बनाया जाता है तो स्वाभाविक रूप से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का वहां पहुंचना तय होता है, ऐसे में यदि अभ्यर्थियों को उसके वास्तविक स्थान तक पहुंचने में परेशानी होती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि परीक्षा केंद्र की डिजिटल पहचान और लोकेशन को पहले से क्यों नहीं जांचा गया? यहां अभ्यर्थियों की परेशानी को केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या मानना भी उचित नहीं होगा,क्योंकि बाहर से आने वाला हर अभ्यर्थी उस शहर की गलियों और स्थानीय रास्तों से परिचित नहीं होता, वह प्रवेश पत्र पर दिए गए नाम को मोबाइल में डालकर रास्ता तलाशता है और जिस डिजिटल जानकारी पर उसे भरोसा होता है, उसी के आधार पर आगे बढ़ता है।
परीक्षा केंद्र की जानकारी सिर्फ प्रवेश पत्र में देना पर्याप्त नहीं- परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को प्रवेश पत्र में केंद्र का नाम और पता दिया जाता है,लेकिन आज के डिजिटल दौर में केवल कागज पर पता लिख देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता,विशेषकर जब परीक्षा केंद्र किसी दूसरे शहर या क्षेत्र में हो, तब आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि परीक्षा केंद्र की सटीक डिजिटल लोकेशन उपलब्ध हो, गूगल मैप या अन्य मैपिंग प्लेटफॉर्म पर नाम और स्थान स्पष्ट दिखाई दे, परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को लोकेशन जांचने की सलाह के साथ सही डिजिटल लिंक दिया जाए,प्रमुख मार्गों पर परीक्षा केंद्र के दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाएं,बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए जरूरत पड़ने पर हेल्प डेस्क या मार्गदर्शन व्यवस्था हो, परीक्षा केंद्र के आसपास पर्याप्त संकेतक लगाए जाएं, ताकि अभ्यर्थी अंतिम समय में रास्ता न भटकें।
परीक्षा के दिन कुछ मिनट की देरी भी भारी पड़ सकती है- प्रतियोगी परीक्षा में समय का महत्व किसी से छिपा नहीं है,अभ्यर्थी महीनों तक पढ़ाई करता है, आवेदन करता है, परीक्षा शुल्क जमा करता है, यात्रा की तैयारी करता है और परीक्षा के दिन निर्धारित समय से पहले निकलता है, ऐसे में अगर परीक्षा केंद्र खोजने में ही एक-दो घंटे निकल जाएं तो अभ्यर्थी की मानसिक स्थिति पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है, सबसे बड़ी बात यह है कि अभ्यर्थी को परीक्षा में अपने ज्ञान का प्रदर्शन करना है, न कि परीक्षा केंद्र खोजने की परीक्षा देनी है, यदि कोई अभ्यर्थी रास्ते की समस्या के कारण देर से पहुंचता है तो उसके लिए यह केवल 5 या 10 मिनट की देरी नहीं होती, उसके पीछे महीनों की तैयारी और आर्थिक खर्च जुड़ा होता है।
सरकार और परीक्षा एजेंसी को भी सोचना होगा-इस मामले से छत्तीसगढ़ सरकार और परीक्षा आयोजन से जुड़े अधिकारियों के सामने एक व्यावहारिक सवाल खड़ा होता है, डिजिटल युग में जब हर जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने की बात होती है, तब एक परीक्षा केंद्र की सटीक लोकेशन उपलब्ध कराना भी व्यवस्था का हिस्सा क्यों न हो? अगर किसी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र खोजने में परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदारी केवल अभ्यर्थी पर डालना भी उचित नहीं होगा,अभ्यर्थी को यह कहा जा सकता है कि वह एक दिन पहले सेंटर देख ले, लेकिन यदि डिजिटल मैप पर ही लोकेशन स्पष्ट नहीं है तो एक दिन पहले जाकर सेंटर तलाशना भी हर अभ्यर्थी के लिए संभव नहीं है, खासकर उन अभ्यर्थियों के लिए जो दूरदराज के क्षेत्रों से आते हैं और परीक्षा के दिन ही शहर पहुंचते हैं।
एक छोटी तकनीकी कमी,लेकिन अभ्यर्थी के लिए बड़ा नुकसान-देखने में यह समस्या बहुत सामान्य लग सकती है—गूगल मैप पर लोकेशन नहीं मिली और कुछ देर रास्ता खोजने में लग गई, लेकिन परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी की नजर से देखा जाए तो यही छोटी तकनीकी कमी उसके लिए बहुत बड़ी परेशानी बन सकती है, एक अभ्यर्थी तीन घंटे यात्रा करके परीक्षा केंद्र वाले शहर में पहुंचता है, इसके बाद भी यदि उसे सेंटर तलाशने में अतिरिक्त समय देना पड़े, फिर 5-10 मिनट की देरी के कारण उसे केंद्र के बाहर अपनी स्थिति समझानी पड़े, तो उसकी पूरी परीक्षा व्यवस्था तनाव में बदल जाती है, मामला केवल गूगल मैप का नहीं है, मामला उस व्यवस्था का है जिसमें एक अभ्यर्थी को परीक्षा देने के लिए घर से निकलने के बाद परीक्षा केंद्र तक बिना किसी भ्रम और परेशानी के पहुंचना चाहिए।
अब जिम्मेदारों को करना चाहिए समीक्षा-इस पूरे मामले से परीक्षा व्यवस्था के सामने एक सीख भी निकलती है,भविष्य में किसी भी बड़े प्रतियोगी या पात्रता परीक्षा के लिए केंद्र तय करने के साथ-साथ उसकी ग्राउंड और डिजिटल दोनों स्तरों पर पहुंच की जांच की जानी चाहिए, परीक्षा केंद्र का नाम सही है या नहीं,पता सही है या नहीं, मोबाइल मैप पर लोकेशन सही है या नहीं, मुख्य सड़क से वहां पहुंचने का रास्ता स्पष्ट है या नहीं—इन सभी चीजों की जांच परीक्षा से पहले होनी चाहिए, अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले केंद्र का पता उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि वह पता उन्हें वास्तव में परीक्षा केंद्र तक पहुंचाए, सवाल जो अब उठना जरूरी है, जब इतने बड़े विद्यालय को सीईटी-2026 जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का केंद्र बनाया गया, तो क्या परीक्षा से पहले उसकी डिजिटल लोकेशन की जांच की गई थी? अगर जांच की गई थी तो अभ्यर्थियों को सेंटर तलाशने में इतनी परेशानी क्यों हुई? और अगर जांच नहीं की गई थी तो इतनी बड़ी परीक्षा के केंद्र निर्धारण में इस बुनियादी व्यवस्था को नजरअंदाज क्यों किया गया? अभ्यर्थियों की परेशानी को केवल ‘रास्ता नहीं मिला’ कहकर खत्म नहीं किया जा सकता, यह डिजिटल दौर में परीक्षा केंद्रों की तैयारी, सूचना व्यवस्था और अभ्यर्थी सुविधा की समीक्षा का विषय है।
तीन घंटे का सफर,फिर भी खत्म नहीं हुई सेंटर तलाशने की परेशानी…
अभ्यर्थियों के अनुसार वे परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचने के उद्देश्य से काफी पहले अपने घर से निकले थे,लंबा सफर तय कर वे अंबिकापुर पहुंचे,लेकिन इसके बाद जब उन्होंने मोबाइल में गूगल मैप के जरिए केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद विद्यालय की लोकेशन तलाशनी शुरू की तो उन्हें अपेक्षित सुविधा नहीं मिली, कोई एक स्थान स्पष्ट रूप से पकड़ में नहीं आने के कारण रास्ता तलाशने में समय लगता गया, एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर जाने,फिर लोकेशन जांचने और आसपास के लोगों से पूछने के बीच काफी समय निकल गया, परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों के लिए यह केवल रास्ता भटकने का मामला नहीं था,उनके सामने लगातार घड़ी चल रही थी, परीक्षा का निर्धारित समय नजदीक आ रहा था और दूसरी तरफ सेंटर तक पहुंचने का रास्ता ही पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था, यही कारण रहा कि कुछ अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के आसपास पहुंचने के बाद भी अंदर जाने की प्रक्रिया को लेकर तनाव में नजर आए।
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