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अम्बिकापुर@अंबिकापुर में आई बैंक नहीं,इसलिए नेत्रदान के बाद कॉर्निया भेजने में होती है देरी

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जागरूकता के बावजूद दानदाताओं की संख्या सीमित,सुरक्षित रखने से लेकर प्रत्यारोपण तक बिलासपुर पर निर्भरता

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,05 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन अंबिकापुर में आई बैंक की सुविधा नहीं होने से नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया अब भी बिलासपुर पर निर्भर है। नेत्रदान के बाद आंखों से निकाले गए आईबॉल को सुरक्षित रखने और समय पर संबंधित आई बैंक तक पहुंचाने की चुनौती बनी रहती है। इसका सीधा असर जरूरतमंद मरीजों को समय पर कॉर्निया उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर पड़ता है। इसी बीच अजीरमा निवासी स्व. कौनतये जायसवाल के निधन के बाद उनके पुत्र अजेय जायसवाल ने पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया। बताया गया कि स्व. कौनतये जायसवाल ने वर्ष 1986 में नेत्रदान का संकल्प लिया था। निधन के बाद परिजनों की सहमति से 4 सितंबर को नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। जिला नोडल अधिकारी अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत टोप्पो के मार्गदर्शन में चिकित्सकीय टीम ने आईबॉल सुरक्षित रूप से निकाला। नेत्रदान के बाद आईबॉल को सुरक्षित रखते हुए रात करीब 4 बजे सिम्स आई बैंक, बिलासपुर भेजा गया। आगामी एक-दो दिनों में दो कॉर्नियल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इससे कॉर्नियल बीमारी के कारण दृष्टिबाधित दो मरीजों को रोशनी मिलने की उम्मीद है। एक नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में उजाला संभव है।
जागरूक लोग ही आगे आ रहे : सरगुजा में नेत्रदान पखवाड़े के दौरान लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद नेत्रदान करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसकी एक बड़ी वजह लोगों में नेत्रदान को लेकर भ्रांतियां और पर्याप्त जागरूकता का अभाव भी माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार,परिवार की सहमति और समय पर सूचना मिलने पर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
आई बैंक होता तो स्थानीय स्तर पर मिलती सुविधा :अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में आई बैंक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नेत्रदान के बाद आईबॉल को सुरक्षित रखते हुए बिलासपुर भेजना पड़ता है। दूरी के कारण समय प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि अंबिकापुर में ही आई बैंक की सुविधा उपलब्ध हो,तो नेत्रदान के बाद कॉर्निया के संरक्षण,जांच और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है। डॉ. रजत टोप्पो ने कहा कि स्व. कौनतये जायसवाल का नेत्रदान और उनके पुत्र अजेय जायसवाल का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक है। अब जरूरत केवल नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की नहीं,बल्कि अंबिकापुर में आई बैंक जैसी आवश्यक सुविधा विकसित करने की भी है,ताकि दान की गई आंखों से अधिक से अधिक जरूरतमंदों को समय पर रोशनी मिल सके।


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