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सोनहत/कोरिया@ शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता,वह स्वयं एक जीवंत किताब है : रेणुका सिंह

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  • विधायक गुरु सम्मान’ में वनांचल के शिक्षकों को सलाम,मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी,बाइक और लैपटॉप देकर बढ़ाया हौसला
  • गुरुओं के सम्मान में सोनहत ने रचा नया अध्याय विधायक गुरु सम्मान’ में वनांचल के शिक्षकों को सलाम,मेधावी विद्यार्थियों को मिले स्कूटी, बाइक और लैपटॉप
  • सेवानिवृत्त शिक्षक धर्मपाल राजवाड़े ने संभाली समारोह की अध्यक्षता
  • वनांचल में शिक्षा की मशाल जलाने वाले गुरुजनों का सम्मान सोनहत में ‘विधायक गुरु सम्मान’,प्रतिभावान विद्यार्थियों को भी मिला प्रोत्साहन
  • गुरु को सलाम,प्रतिभाओं को सम्मान,वनांचल के शिक्षकों के समर्पण को नमन, मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी,बाइक और लैपटॉप


-संवाददाता-
सोनहत/कोरिया,05 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
शिक्षक दिवस के अवसर पर सोनहत के सामुदायिक भवन में आयोजित ‘विधायक गुरु सम्मान’ समारोह शिक्षा,संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का विशेष अवसर बन गया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ प्रतिभावान विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया, खास तौर पर कोटडोल,रामगढ़ और अन्य दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षकों के योगदान को मंच से सराहा गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं, बल्कि वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक धर्मपाल राजवाड़े ने की, विधायक रेणुका सिंह की इस पहल को गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा से जोड़कर देखा गया।
शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता- समारोह को संबोधित करते हुए विधायक रेणुका सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं,बल्कि कई पीढि़यों का भविष्य गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है,उन्होंने कहा, शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता,वह स्वयं एक जीवंत किताब है,जिसके पास ज्ञान का असीमित भंडार होता है,उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है,लेकिन शिक्षक का ज्ञान, अनुभव और समाज के प्रति योगदान कभी समाप्त नहीं होता,शिक्षक बच्चों को सिर्फ विषय का ज्ञान नहीं देता,बल्कि संस्कार, अनुशासन और जीवन में सही दिशा चुनने की क्षमता भी देता है,विधायक ने कहा कि समाज में डॉक्टर,इंजीनियर,अधिकारी,जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार नागरिक के रूप में जो लोग आगे बढ़ते हैं,उनकी सफलता के पीछे किसी न किसी शिक्षक का मार्गदर्शन अवश्य होता है।
70 प्रतिशत वनांचल,फिर भी शिक्षा की लौ कायम-रेणुका सिंह ने भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र का बड़ा हिस्सा वनांचल है,कोटडोल और रामगढ़ जैसे इलाकों में प्राकृतिक सुंदरता के बीच रहने वाले लोगों की वास्तविक कठिनाइयों को बाहर से देखने वाले आसानी से नहीं समझ सकते,उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क,आवागमन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियां आज भी मौजूद हैं,इसके बावजूद शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं,उन्होंने कहा कि दुर्गम इलाकों में शिक्षा की जिम्मेदारी निभाना महज नौकरी नहीं,बल्कि सेवा और संकल्प है,ऐसे शिक्षकों के समर्पण को सम्मानित करना पूरे समाज का दायित्व है।
‘विधायक छात्र गौरव पुरस्कार’ से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा-विधायक ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किए गए ‘विधायक छात्र गौरव पुरस्कार’ को भी महत्वपूर्ण पहल बताया, उन्होंने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है,इसका उद्देश्य केवल कुछ विद्यार्थियों को पुरस्कार देना नहीं,बल्कि दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है, इससे शिक्षा के क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आगे बढ़ने की ललक पैदा होगी।
सेवानिवृत्त शिक्षक को अध्यक्षता देकर बढ़ाया सम्मान
समारोह की सबसे खास पहल वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षक धर्मपाल राजवाड़े को कार्यक्रम की अध्यक्षता सौंपना रही,वर्ष 2011 में शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए राजवाड़े को मंच पर विशेष सम्मान दिया गया,विधायक ने कहा कि शिक्षक की सेवानिवृत्ति केवल सरकारी सेवा से होती है। उसका अनुभव और ज्ञान समाज के लिए हमेशा उपयोगी रहता है, सेवानिवृत्त शिक्षक को कार्यक्रम की अध्यक्षता देना उनके अनुभव और योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने पर जोर
विधायक ने कोरिया और एमसीबी जिले के शिक्षा विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों से बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय के साथ काम करने का आह्वान किया,उन्होंने कहा कि क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थी और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर मिलें, उन्होंने अधिकारियों से ऐसी प्रतिभाओं को चिन्हित कर उन्हें दिल्ली के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास करने की बात कही।
टॉपर रागनी को स्कूटी,त्रिवेंद्र को बाइक
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया,टॉपर रागनी गुप्ता को स्कूटी और त्रिवेंद्र कुशवाहा को बाइक प्रदान की गई, इसके अलावा मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए गए, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को 11-11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। विधायक ने कहा कि ऐसे सम्मान विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के उत्साह को बढ़ाने का काम करते हैं।
गुरु-शिष्य परंपरा जीवन की दिशा तय करती है…
विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद सिंह ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला,उन्होंने कहा कि समर्पित शिक्षक विद्यार्थी के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है, उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,शत-प्रतिशत नामांकन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से गुरुजनों का सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मनेन्द्रगढ़ में भी होगा ऐसा आयोजन
बीईओ मनेन्द्रगढ़ विपिन पाण्डेय ने कार्यक्रम को शिक्षकों के सम्मान की दिशा में विशेष पहल बताया,उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त शिक्षक को कार्यक्रम की अध्यक्षता सौंपना पूरे शिक्षक समाज के सम्मान का प्रतीक है,उन्होंने कहा कि इस आयोजन से प्रेरणा लेते हुए अगले शैक्षणिक सत्र से मनेन्द्रगढ़ जिले में भी इसी तरह का शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा, सोनहत जनपद पंचायत उपाध्यक्ष संदीप जायसवाल ने भी शिक्षक के सम्मान को समाज की नैतिक जिम्मेदारी बताया, उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर सम्मान करने के साथ-साथ शिक्षकों के आदर्शों और बताए मार्ग पर चलना भी जरूरी है।
बच्चियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में छात्राओं ने गीत,नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया,उनकी प्रस्तुतियों से सामुदायिक भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, विधायक ने छात्राओं की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कार भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए आवश्यक हैं, समारोह का संदेश साफ रहा—शिक्षक का सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि उस ज्ञान,अनुभव और समर्पण के प्रति सम्मान है,जिससे समाज की आने वाली पीढि़यां तैयार होती हैं,विधायक की इस पहल में वनांचल के शिक्षकों को सम्मान, विद्यार्थियों को प्रोत्साहन और सेवानिवृत्त गुरु को मंच की अध्यक्षता—तीनों पहलुओं ने शिक्षक दिवस समारोह को अलग पहचान दी।


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