मेरो-आमाडांड-मुकुंदपुर से छोटे डंपरों में रेत परिवहन की चर्चा,विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,23 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी वन परिक्षेत्र के मेरो,आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं,स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से रेत का अवैध उत्खनन कर छोटे डंपरों के माध्यम से मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी की ओर परिवहन किया जा रहा है, आरोप यह भी है कि लगातार वाहनों की आवाजाही के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन क्षेत्र से प्रतिदिन रेत से लदे वाहन निकल रहे हैं तो संबंधित विभाग और मैदानी अमले की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ रही? कार्रवाई के अभाव को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं,हालांकि अवैध उत्खनन और किसी अधिकारी की संलिप्तता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कार्रवाई नहीं होने से संरक्षण की चर्चा-स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि मेरो,आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है,ग्रामीणों के मुताबिक छोटे डंपरों के जरिए रेत का परिवहन किए जाने के कारण यह गतिविधि लगातार जारी रहने की बात सामने आ रही है,ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह परिवहन अवैध है तो अब तक जिम्मेदार विभाग ने इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कार्रवाई के अभाव के पीछे किसी स्तर पर संरक्षण हो सकता है,हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अभी कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है,ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है,ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
गरीब हितग्राहियों पर सख्ती,रेत परिवहन पर नरमी?- ग्रामीणों ने विभागीय कार्रवाई को लेकर असमानता के आरोप भी लगाए हैं, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए क्रेशर से गिट्टी अथवा निर्माण सामग्री लेकर जाने वाले वाहनों को कई बार रोककर पूछताछ किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं,दूसरी ओर,रेत से भरे छोटे डंपरों के लगातार आवागमन को लेकर सवाल उठ रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई भी समान रूप से होनी चाहिए,गरीब हितग्राहियों के निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री की जांच और अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई के बीच कथित अंतर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
कथित लेन-देन की चर्चाओं ने बढ़ाई गंभीरता-
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ वाहन संचालकों और संबंधित लोगों के बीच कथित लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आने का दावा किया जा रहा है,यदि भविष्य में जांच के दौरान ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामला केवल अवैध रेत उत्खनन और परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा।बल्कि विभागीय संरक्षण और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का विषय भी बन सकता है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर मौके पर जाकर की जानी चाहिए।
उच्चस्तरीय जांच की मांग– क्षेत्रवासियों ने शासन और जिला प्रशासन से मेरो, आमाडांड और मुकुंदपुर क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ग्रामीणों का कहना है कि रेत उत्खनन स्थल, परिवहन में लगे वाहनों, संबंधित अनुमति, खनिज एवं वन विभाग के रिकॉर्ड तथा मैदानी अमले की गतिविधियों की जांच की जाए, साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार अथवा वाहन संचालक की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब जांच पर टिकी निगाहें- मेरो, आमाडांड और मुकुंदपुर में कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर उठे सवालों के बाद अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है, क्या विभाग मौके पर जाकर जांच करेगा? क्या रेत परिवहन में लगे वाहनों की जांच होगी? क्या वन एवं खनिज विभाग के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा? और सबसे अहम, यदि अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो इसके पीछे जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्षेत्र में वास्तव में अवैध रेत उत्खनन हो रहा है या लगाए जा रहे आरोपों के पीछे कोई अन्य तथ्य है।
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