Breaking News

अंबिकापुर@सरगुजा भाजपा में फिर उठा बगावत का सुर…जिलाध्यक्ष बदलने की मांग ने पकड़ा जोर…

Share

  • सोशल मीडिया पोस्ट से गरमाई संगठन की सियासत,
  • 10 सितंबर को प्रदेश अध्यक्ष को दस्तावेजों के साथ ज्ञापन देने का दावा,सवाल…
  • ‘नाराजगी कितनी बड़ी और शिकायत आखिर है क्या?’

अंबिकापुर,23 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। सत्ता के गलियारों में संगठन की मजबूती के दावे भले ही लगातार सुनाई देते हों, लेकिन सरगुजा भाजपा में इन दिनों सोशल मीडिया की राजनीति कुछ और कहानी कहती नजर आ रही है। जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया को बदले जाने की मांग को लेकर एक बार फिर कथित तौर पर असंतोष के सुर तेज होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान को सार्वजनिक बहस के बीच ला दिया है।
वायरल पोस्ट के अनुसार भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष राजू पांडेय ने दावा किया है कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं में जिलाध्यक्ष को लेकर असंतोष है और उन्हें पद से हटाने की मांग की जा रही है। पोस्ट में प्रदेश भाजपा कार्यालय में आंदोलन की चेतावनी के साथ 10 सितंबर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को दस्तावेजों सहित ज्ञापन सौंपने की बात भी कही गई है।
हालांकि, अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। न ही यह स्पष्ट है कि कथित रूप से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की संख्या कितनी है और उनकी वास्तविक शिकायतें क्या हैं।

‘बूथ का कार्यकर्ता नाराज’… लेकिन नाराजगी की वजह?
राजनीति में सबसे दिलचस्प सवाल अक्सर वही होता है जिसका जवाब सबसे कम मिलता है। यहां भी कहानी कुछ ऐसी ही है। पोस्ट में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के असंतोष का दावा तो किया गया है, लेकिन असंतोष का कारण क्या है, किन फैसलों से कार्यकर्ता नाराज हैं और जिलाध्यक्ष पर आखिर कौन-कौन से आरोप हैं, इसका स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
यानी फिलहाल राजनीतिक समीकरण का गणित तो सामने है, लेकिन सवालों का हिसाब बाकी है।
यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के भीतर और बाहर चर्चा शुरू हो गई है कि मामला वास्तव में जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का है या फिर संगठन के भीतर चल रही गुटीय राजनीति का एक और अध्याय।

संगठन में विरोध की आवाज या पद की राजनीति?
भाजपा एक कैडर आधारित पार्टी होने का दावा करती है, जहां बूथ स्तर के कार्यकर्ता को संगठन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। ऐसे में यदि वास्तव में बूथ कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग जिलाध्यक्ष बदलने की मांग कर रहा है तो यह संगठन के लिए सामान्य शिकायत नहीं, बल्कि गंभीर राजनीतिक संकेत माना जाएगा।
लेकिन दूसरी तरफ सवाल यह भी है कि क्या कुछ पदाधिकारियों की नाराजगी को पूरे बूथ कैडर की आवाज माना जा सकता है?
यही वह बिंदु है जहां सोशल मीडिया पोस्ट और जमीनी संगठन के बीच अंतर की पड़ताल जरूरी हो जाती है।

‘दस्तावेज लेकर आएंगे’—अब असली परीक्षा 10 सितंबर को
वायरल पोस्ट में 10 सितंबर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के समक्ष दस्तावेजों के साथ ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है। यदि वास्तव में ऐसा होता है तो यह विवाद सोशल मीडिया पोस्ट से निकलकर पार्टी के आधिकारिक मंच तक पहुंच जाएगा। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व के सामने दो रास्ते होंगे—या तो शिकायत को संगठनात्मक स्तर पर गंभीरता से लेकर जांच कराई जाए, या फिर इसे स्थानीय स्तर की असहमति मानकर संगठन के भीतर ही सुलझाया जाए। फिलहाल 10 सितंबर की तारीख इस राजनीतिक पटकथा का अगला महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।

दिलचस्प संयोग—जिलाध्यक्ष अब भी सक्रिय
उपलब्ध सार्वजनिक सामग्री में भारत सिंह सिसोदिया के सरगुजा भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में सक्रिय होने के हालिया उदाहरण भी सामने आते हैं। अगस्त 2026 में भाजपा से जुड़ी गतिविधियों में उनके जिलाध्यक्ष के रूप में उल्लेख मिलता है।
यानी संगठन की सार्वजनिक गतिविधियों में नेतृत्व की भूमिका जारी है, जबकि दूसरी ओर सोशल मीडिया पर नेतृत्व परिवर्तन की मांग का दावा सामने आ रहा है। यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है।

सोशल मीडिया बना संगठन की ‘नई बैठक’
पहले पार्टी के भीतर नाराजगी बंद कमरों की बैठकों तक सीमित रहती थी। अब सोशल मीडिया ने उस कमरे की दीवार ही हटा दी है। कोई नाराज है तो पोस्ट करता है, कोई समर्थन में आता है तो कमेंट करता है और देखते ही देखते संगठन की अंदरूनी चर्चा सार्वजनिक विमर्श बन जाती है।
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होना और पार्टी के आधिकारिक स्तर पर शिकायत सिद्ध होना—दो अलग बातें हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भाजपा सरगुजा में कोई बड़ा संगठनात्मक संकट खड़ा हो गया है। इतना जरूर है कि जिलाध्यक्ष बदलने की मांग का दावा सामने आना पार्टी के लिए नजरअंदाज करने लायक संकेत भी नहीं है।

अब सवाल प्रदेश नेतृत्व से ज्यादा स्थानीय संगठन से

आखिर नाराजगी है तो किस बात की?
कितने कार्यकर्ता नाराज हैं?
क्या बूथ स्तर पर इसका वास्तविक आधार है?
क्या 10 सितंबर को सचमुच ज्ञापन सौंपा जाएगा?
और यदि ज्ञापन सौंपा गया तो उसमें कौन से दस्तावेज होंगे?

इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि यह ‘सोशल मीडिया की बगावत’ है या वास्तव में संगठन के भीतर उठ रही जमीन की आवाज।
फिलहाल सरगुजा भाजपा की राजनीति में गेंद प्रदेश नेतृत्व के पाले में जाने से पहले ही सोशल मीडिया के मैदान में उछल चुकी है। अब देखना यह है कि 10 सितंबर को यह गेंद ज्ञापन के रूप में प्रदेश कार्यालय पहुंचती है या उससे पहले ही संगठन के भीतर कोई ‘समझौता एक्सप्रेस’ चल पड़ती है।


Share

Check Also

सीतापुर@ विधायक रामकुमार टोप्पो ने घुटरापारा माझी बस्ती को लिया गोद

Share मूलभूत सुविधाओं से वंचित बस्ती के समग्र विकास का लिया संकल्प, ग्रामीणों की समस्याएं …

Leave a Reply