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अंबिकापुर/मैनपाट,@ नर्मदापुर में 2.07 करोड़ के भुगतान पर सवाल,जांच में निर्माण कार्यों के बिना राशि आहरण का खुलासा

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बिना ग्रामसभा अनुमोदन,प्रमाणक और मूल्यांकन के राशि निकालने का आरोप,पंचायत के सरपंच-सचिव और वेंडरों को नोटिस

-संवाददाता-
अंबिकापुर/मैनपाट,12 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
ग्राम पंचायत नर्मदापुर में शासकीय योजनाओं और निर्माण कार्यों के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के भुगतान ने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं। शिकायतों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर 2 करोड़ 7 लाख 16 हजार रुपए से अधिक की राशि के आहरण में गंभीर वित्तीय अनियमितता पाए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के बाद संबंधितों को नोटिस जारी किए गए हैं। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने एसडीएम सीतापुर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था। दल ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक ग्राम पंचायत में मूलभूत, 15वें वित्त, स्वच्छ भारत मिशन सहित अन्य योजनाओं के तहत हुए कार्यों और भुगतान की जांच की।
कागजों में काम,जमीन पर कुछ नहीं? जांच में पंचायत के अभिलेखों के परीक्षण के दौरान बिना पर्याप्त प्रमाणक, मूल्यांकन, सत्यापन और नस्ती फाइल के राशि आहरण किए जाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी उल्लेखित है कि कई मामलों में ग्रामसभा के अनुमोदन के बिना राशि निकाली गई तथा जिन कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ, उनके मौके पर निर्माण कार्य नहीं पाए गए। यानी सरकारी रिकॉर्ड में खर्च का हिसाब दिखाई दिया,लेकिन मौके पर काम की स्थिति सवाल खड़े करती मिली। यही स्थिति पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
किसके कार्यकाल में कितनी राशि? जांच रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग समय में पंचायत के सरपंच-सचिवों तथा विभिन्न वेंडरों को राशि का भुगतान किया गया। इसमें सचिव सिकंदर प्रजापति के कार्यकाल में 60.64 लाख रुपए, सचिव चंद्रपाल सिंह के कार्यकाल में 8.13 लाख तथा सचिव अनिल यादव के कार्यकाल में 5.11 लाख रुपए के आहरण का उल्लेख है। इसी तरह सरपंच गणेश नाग के कार्यकाल में 5.11 लाख, सरपंच राजनाथ भैंसा के कार्यकाल में 60.66 लाख तथा सरपंच ललिता भैंसा के कार्यकाल में 7.89 लाख रुपए की राशि का उल्लेख जांच में किया गया है। इसके अलावा विभिन्न वेंडरों और फर्मों को करीब 40.78 लाख रुपए का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
निर्माण नहीं,फिर भुगतान किस बात का? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच रिपोर्ट में उल्लेखित कई भुगतानों के पीछे मौके पर निर्माण कार्य नहीं कराया जाना पाया गया है,तो फिर राशि किस आधार पर निकाली गई और भुगतान को किस स्तर पर सत्यापित किया गया? ग्रामसभा की स्वीकृति, तकनीकी मूल्यांकन,कार्य पूर्णता और स्थल सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं के बिना इतनी बड़ी राशि का भुगतान कैसे हुआ, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।


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