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रायपुर@खाद्य सुरक्षा विभाग में पदोन्नति का ‘फॉर्मूला’ सवालों में, केंद्रीय कानून के सामने राज्य के नियम कितने वैध?

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  • 12वीं पास नमूना सहायक से FSO तक का रास्ता किस नियम से? उठे गंभीर सवाल
  • FSO की कुर्सी पर किसका हक? भर्ती से ज्यादा पदोन्नति पर जोर, नियमों की वैधानिकता पर सवाल
  • खाद्य सुरक्षा विभाग में 10% से 25% पदोन्नति कोटा तक का खेल! नमूना सहायक को तकनीकी पद देने पर सवाल
  • संसदीय कानून बनाम विभागीय नियम, नमूना सहायक से FSO बनाने की प्रक्रिया कटघरे में
  • FSO की कमी या पदोन्नति की जल्दबाजी? डीपीसी की भूमिका और नियमों पर उठे सवाल
  • नियमों की किताब में FSO, विभाग में पदोन्नति का दूसरा रास्ता! आखिर किस आधार पर?
  • खाद्य सुरक्षा विभाग में ‘योग्यता’ की परीक्षा या ‘सेवा अवधि’ का सहारा? पदोन्नति व्यवस्था पर सवाल
  • FSO के पद पर किसका रास्ता साफ? केंद्रीय नियम, राज्य भर्ती व्यवस्था और डीपीसी आमने-सामने
  • चपरासी से नमूना सहायक और फिर FSO? विभागीय पदोन्नति व्यवस्था की वैधानिकता पर बड़ा सवाल
  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तकनीकी पद पर पदोन्नति का आधार क्या?

-न्यूज डेस्क-
रायपुर,12 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। आम आदमी के खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया खाद्य सुरक्षा विभाग खुद अपनी नियुक्ति और पदोन्नति व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है, मामला केवल किसी एक कर्मचारी को पदोन्नति देने या किसी एक डीपीसी के निर्णय तक सीमित नहीं है, सवाल उस पूरी व्यवस्था पर उठ रहा है जिसके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे वैधानिक और तकनीकी पद पर पहुंचने का रास्ता किन नियमों से तय किया जा रहा है। शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नमूना सहायक जैसे पद से खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था मौजूद है? यदि है तो उसका नियम क्या है, आदेश कब जारी हुआ, उसमें निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव क्या है तथा उसे किस सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृति दी? और यदि ऐसी व्यवस्था नहीं है तो फिर अब तक की पदोन्नतियों का आधार क्या रहा? यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी कोई सामान्य लिपिकीय अथवा प्रशासनिक पद नहीं है, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 37 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी का स्पष्ट प्रावधान है और धारा 38 में उसे प्रदत्त शक्तियों का उल्लेख है, अधिनियम की धारा 36 नामित अधिकारी तथा धारा 45 खाद्य विश्लेषक से संबंधित है।
संसदीय कानून के तहत बना खाद्य सुरक्षा का पूरा ढांचा
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 एक केंद्रीय अधिनियम है, जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक तय करना और उनके निर्माण,भंडारण, वितरण, बिक्री एवं आयात को नियंत्रित करते हुए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करना है,इंडिया कोड में इसे केंद्रीय अधिनियम के रूप में दर्ज किया गया है,इसी अधिनियम के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसआई की स्थापना हुई, खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियम, विनियम,मानक और तकनीकी व्यवस्था इसी केंद्रीय कानूनी ढांचे के अंतर्गत विकसित होती है,अधिनियम की धारा 91 केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति देती है,धारा 92 खाद्य प्राधिकरण को विनियम बनाने की शक्ति से संबंधित है,धारा 93 नियमों एवं विनियमों को संसद के समक्ष रखने का प्रावधान करती है,जबकि धारा 94 राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति देती है। इसलिए यह कहना कि राज्य सरकार की नियम बनाने की कोई शक्ति नहीं है,पूरी तरह सही नहीं होगा,असली जांच यह है कि राज्य द्वारा बनाए गए सेवा एवं भर्ती नियम केंद्रीय अधिनियम और उसके अधीन लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी
कोई सामान्य पद नहीं…

खाद्य सुरक्षा अधिकारी को अधिनियम की धारा 37 के तहत नियुक्त किया गया है, नियम 2.1.3 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी की योग्यता एवं निर्देश से संबंधित प्रोविजन दिये गये हैं,एफएसएसएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर खाद्य सुरक्षा और मानक नियम,2011 और बाद में खाद्य सुरक्षा अधिकारी की योग्यता से संबंधित सूचनाएं भी उपलब्ध हैं, (एफएसएसएआई) खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता का महत्व इसलिए है क्योंकि इस पद के माध्यम से खाद्य सुरक्षा कानून को जमीन पर लागू किया जाता है,खाद्य सुरक्षा अधिकारी का निरीक्षण,नमूना निर्धारण, जांच,खाद्य कानून के उल्लंघन की कार्रवाई और अन्य वैधानिक जिम्मेदारियां निभाई जाती हैं, इसलिए इस पद की योग्यता को केवल सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं देखा जा सकता।
12वीं पास से तकनीकी पद तक पहुंचने की राह?
शिकायत में दावा किया गया है कि नमूना सहायक पद पर 12वीं पास योग्यता वाले कर्मचारी भी कार्यरत रहे हैं और इन्हीं में से कुछ को खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया अपनाई गई,यदि यह तथ्य दस्तावेजों से सही साबित होता है तो यह सवाल और बड़ा हो जाता है कि क्या केवल विभाग में लंबे समय तक सेवा करना खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे तकनीकी पद के लिए पर्याप्त माना गया? यदि नहीं, तो आवश्यक तकनीकी योग्यता का परीक्षण कैसे हुआ? और यदि हां,तो उस व्यवस्था का नियम क्या है? यहां किसी कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता को आधार बनाकर उसे व्यक्तिगत रूप से अयोग्य घोषित करना उचित नहीं होगा,असली मुद्दा यह है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद की निर्धारित योग्यता और विभागीय पदोन्नति के नियमों के बीच वास्तविक संबंध क्या है।
10 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक पदोन्नति कोटे का रहस्य-
पूरे मामले में 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटा किए जाने की बात भी सामने आई है, यदि यह संशोधन हुआ है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 10 प्रतिशत पदोन्नति कोटा किस आदेश से था? 25 प्रतिशत किस आदेश से हुआ? आदेश की तारीख क्या है? किस सक्षम प्राधिकारी ने इसे स्वीकृत किया? क्या यह राजपत्र में प्रकाशित हुआ? क्या इसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी की केंद्रीय योग्यता का परीक्षण किया गया? क्या पदोन्नति कोटे में किन-किन पदों को पात्र माना गया? इन सवालों का उत्तर मिलते ही विवाद का एक बड़ा हिस्सा स्वतः स्पष्ट हो सकता है।
अभिहित अधिकारी के लिए पांच साल का अनुभव—लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी का क्या?- यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है, खाद्य सुरक्षा और मानक नियम के नियम 2.1.2 में नामित अधिकारी के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में कम से कम पांच साल का अनुभव रखने की पात्रता का प्रावधान है, साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्त व्यक्ति को भी निर्धारित योग्यता के अनुरूप होना चाहिए, यानी केंद्रीय नियमों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुभव को ऊपर के पद के लिए महत्व दिया गया है, जाहिर से एक बड़ा सवाल पैदा होता है कि जब केंद्रीय नियम नामित अधिकारी जैसे उच्च पद के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुभव को महत्व देते हैं, तब खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मूल तकनीकी पद पर पहुंचने के लिए राज्य की पदोन्नति व्यवस्था में किस प्रकार का अनुभव और योग्यता निर्धारित की गई है? यही वह कड़ी है जिसकी जांच आवश्यक है।
क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी की सीधी भर्ती हुई?- शिकायतकर्ता ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है—जब विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद रिक्त हैं तो इन पदों की सीधी भर्ती के लिए क्या किया गया? क्या स्थापना शाखा ने रिक्त पदों का आकलन किया? क्या भर्ती का प्रस्ताव भेजा? कितने पदों का प्रस्ताव भेजा? क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद को प्राथमिकता सूची में रखा गया? यदि नहीं रखा गया तो क्यों? और यदि पदोन्नति से पद भरे जा रहे हैं तो सीधी भर्ती के हिस्से को कैसे निर्धारित किया गया? यह जानकारी विभाग की स्थापना शाखा की फाइल से सामने आ सकती है।
क्या युवाओं के लिए रास्ता बंद हो रहा है?- खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने के लिए देशभर में विभिन्न तकनीकी और विज्ञान आधारित पाठ्यक्रमों से आने वाले युवा पात्र होते हैं, एफएसएसएआई समय-समय पर मान्य योग्यताओं को अधिसूचित करता है, 2023 की अधिसूचना और 2025 के संशोधन इसका उदाहरण हैं,ऐसे में यदि किसी राज्य में विभागीय पदोन्नति के माध्यम से बड़ी संख्या में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद भरे जाते हैं तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठेगा कि सीधी भर्ती और पदोन्नति के बीच अनुपात क्या है,युवाओं की दृष्टि से सवाल यह है कि वे वर्षों तक तकनीकी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करें या विभागीय पदोन्नति का रास्ता उनके लिए उपलब्ध नहीं होने के कारण अलग रास्ता चुनें? इसका समाधान केवल स्पष्ट भर्ती नियमों से हो सकता है।
क्या डीपीसी में खाद्य सुरक्षा का विशेषज्ञ था?- पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न डीपीसी से जुड़ा है, यदि खाद्य सुरक्षा अधिकारी तकनीकी पद है तो डीपीसी में बैठे अधिकारियों को संबंधित केंद्रीय कानून, नियम और राज्य के भर्ती नियमों का ज्ञान होना चाहिए, क्या डीपीसी में खाद्य सुरक्षा के मूल कैडर का अधिकारी था? क्या उसने नियमों की व्याख्या की? क्या नोटशीट में यह लिखा गया कि संबंधित कर्मचारी खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद के लिए केंद्रीय योग्यता पूरी करता है? क्या किसी अधिकारी ने आपत्ति दर्ज की? क्या किसी ने यह लिखा कि नमूना सहायक का पद खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए नियमों में पात्र है? क्या एफएसएसएआई की अधिसूचनाओं का संदर्भ फाइल में लगाया गया? यदि इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड में मौजूद है तो विभाग के पास अपनी व्यवस्था को स्पष्ट करने का सबसे मजबूत आधार होगा।
चपरासी से नमूना सहायक और फिर खाद्य सुरक्षा अधिकारी वाली बहस- शिकायत में एक बेहद तीखा सवाल उठाया गया है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि तकनीकी पदों की मूल भर्ती व्यवस्था कमजोर होती चली जाए—पहले सामान्य पद पर नियुक्ति हो,वर्षों बाद नमूना सहायक बनाया जाए और फिर सेवा अवधि के आधार पर तकनीकी पद तक पहुंचने का रास्ता खुल जाए,यदि ऐसा कोई वास्तविक सेवा नियम है तो उसका परीक्षण होना चाहिए,लेकिन यदि ऐसा नियम नहीं है और इस प्रकार की पदोन्नति केवल विभागीय आदेशों की व्याख्या पर आधारित है तो मामला और गंभीर हो जाता है, क्योंकि तब सवाल किसी व्यक्ति की पदोन्नति का नहीं बल्कि पूरे कैडर निर्माण की वैधानिकता का होगा।
दूसरे राज्यों में व्यवस्था कैसी है?- शिकायतकर्ता का कहना है कि कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पदों को राजपत्रित पद मानते हुए लोक सेवा आयोग अथवा अन्य प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया से भरा जाता है,इस दावे की राज्यवार पुष्टि अलग से आवश्यक होगी, लेकिन यह तुलना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है,यदि अधिकांश राज्यों में तकनीकी पदों की सीधी भर्ती को प्राथमिकता दी जा रही है और छत्तीसगढ़ में विभागीय पदोन्नति के माध्यम से अलग मॉडल अपनाया गया है तो दोनों व्यवस्थाओं की तुलना की जानी चाहिए,सवाल यह नहीं कि कौन सा मॉडल सही है, सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ का मॉडल किस विधिक आधार पर बना है।
एफएसएसएआई के केंद्रीय ढांचे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता-एफएसएसएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर खाद्य सुरक्षा और मानक नियम, 2011, खाद्य सुरक्षा अधिकारी की योग्यता संबंधी अधिसूचनाएं और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न नियम-विनियम उपलब्ध हैं, एफएसएसएआई स्वयं स्पष्ट करता है कि उसके कम्पेंडियम केवल संदर्भ के लिए हैं और मूल राजपत्र अधिसूचनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, यानी विवाद की स्थिति में किसी वेबसाइट पर उपलब्ध सारांश से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा—मूल राजपत्र, मूल नियम और राज्य का विधिवत भर्ती/सेवा नियम, यही दस्तावेज इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकते हैं।
‘नियम’ किसने पढ़े और किसने समझे?
यहां मामला केवल इतना नहीं है कि डीपीसी ने क्या निर्णय लिया, बड़ा सवाल यह है कि डीपीसी को जो प्रस्ताव दिया गया,उसमें नियमों की व्याख्या किसने की? क्या स्थापना शाखा ने संबंधित केंद्रीय कानून का परीक्षण किया? क्या विभागीय विधि अधिकारी से राय ली? क्या शासन स्तर पर यह परीक्षण हुआ कि प्रस्तावित पदोन्नति केंद्रीय कानून के अनुरूप है? क्या नोटशीट में संभावित कानूनी विवाद की संभावना का उल्लेख किया गया? क्योंकि यदि बाद में यही मामला न्यायालय में जाता है तो पूरी फाइल की नोटशीट यह तय करेगी कि निर्णय किस आधार पर लिया गया था।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कमी का मुद्दा भी महत्वपूर्ण
यदि विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद लंबे समय से रिक्त हैं तो इसका सीधा प्रभाव खाद्य सुरक्षा की निगरानी पर पड़ सकता है,खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, नमूना संग्रह, लाइसेंसिंग व्यवस्था में सहयोग, मिलावट की जांच और कानून के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त संख्या में सक्षम अधिकारी आवश्यक हैं,इसलिए सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि विभाग में वर्तमान में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कितने स्वीकृत पद हैं,कितने कार्यरत हैं और कितने रिक्त हैं,यदि पद रिक्त हैं तो उनकी भर्ती कब होगी? क्या पदोन्नति से सभी रिक्तियां भरना समाधान है या सीधी भर्ती भी आवश्यक है?
नमूना सहायक का वास्तविक काम क्या है?
यह सवाल भी जांच का विषय है कि नमूना सहायक के पद पर कार्यरत कर्मचारियों से वास्तव में कौन-कौन से कार्य लिए जाते हैं,क्या उनका कार्य केवल सैंपलिंग प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग तक सीमित है? क्या उन्हें खाद्य सुरक्षा अधिकारी के समान वैधानिक शक्तियां प्राप्त हैं? क्या वे स्वतंत्र रूप से निरीक्षण कर सकते हैं? क्या वे वैधानिक नमूना ले सकते हैं? क्या वे किसी खाद्य प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिकारी की तरह कार्रवाई कर सकते हैं? क्या उनके कार्यों का स्पष्ट विभागीय जॉब चार्ट मौजूद है? यदि नमूना सहायक और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारियों में स्पष्ट अंतर है तो फिर पदोन्नति के समय उस अंतर को किस तरह समाप्त किया जाता है—यह जानना आवश्यक है।

  अब विभाग से मांगे जाने चाहिए ये दस्तावेज,पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विभाग को कम से कम निम्न दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए...

– पहलाः खाद्य सुरक्षा अधिकारी के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति।
– दूसराः खाद्य सुरक्षा अधिकारीकी सीधी भर्ती के लिए पिछले 10 वर्षों में भेजे गए प्रस्ताव।
– तीसराः नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति का मूल सेवा नियम।
– चौथाः 10 प्रतिशत से 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटा बढ़ाने का आदेश।
– पांचवांः अब तक हुई डीपीसी की कार्यवाही और नोटशीट।
– छठाः पदोन्नत कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता और संबंधित अनुभव।
– सातवांः इस प्रक्रिया में विधि विभाग अथवा सक्षम विशेषज्ञ की राय।
– आठवांः एफएसएसएआई की संबंधित अधिसूचनाओं को डीपीसी के सामने रखने का रिकॉर्ड।
– नौवांः खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद की सीधी भर्ती को लेकर स्थापना शाखा की प्राथमिकता और प्रस्ताव।
– दसवांः राज्य के वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियम की प्रमाणित प्रति।


व्यवस्था कानून चला रहा है या व्याख्या?-

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य किसी कर्मचारी को पद देना नहीं,बल्कि आम नागरिक को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है,इसलिए जिस पद को खाद्य सुरक्षा कानून के प्रवर्तन की जिम्मेदारी दी गई है,उस पद की योग्यता और तकनीकी दक्षता से समझौता नहीं होना चाहिए,यदि नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने की व्यवस्था स्पष्ट नियम,निर्धारित योग्यता, आवश्यक अनुभव और सक्षम स्वीकृति के साथ मौजूद है तो विभाग को उसे सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए, लेकिन यदि नियम स्पष्ट नहीं है,डीपीसी की नोटशीट में वैधानिक आधार नहीं है,केंद्रीय अधिसूचनाओं का परीक्षण नहीं हुआ है और पदोन्नति केवल विभागीय व्याख्या के आधार पर हुई है तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी जांच का विषय होगा, घटती-घटना की पड़ताल का अगला सवाल यही है की खाद्य सुरक्षा विभाग में आखिर खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भर्ती और पदोन्नति का वास्तविक नियम क्या है? और उससे भी बड़ा सवाल है की क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाने से पहले ‘खाद्य सुरक्षा कानून’ देखा गया या सिर्फ ‘सेवा नियम’ की फाइल देखी गई? अब विभाग के पास जवाब देने का अवसर है, क्योंकि इस पूरे विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मूल राजपत्र, भर्ती नियम, डीपीसी नोटशीट और पदोन्नति आदेश को सार्वजनिक करने से होगा।


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