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राजपुर@प्रशासन निकले हैं गौधाम भूमि निरीक्षण में…मवेशी मयखाने में शराब मांगने नहीं आये हैं

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मतलबी पलकों के बेरूखी से आशियाना के तलाश में खड़े हैं

-संवाददाता-
राजपुर,08 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले के राजपुर प्रशासक प्रशासनिक अमला के साथ शासन की नई गो गोधाम योजना के लिए भूमि निरीक्षण करने की खबरें देखी जा रही है वहीं दूसरी और राजपुर के शराब दुकान के पास चीखने की दुकान के बगल में पलकों की बेरुखी के कारण मवेशी बरसात में आशियाने की तलाश में खड़े हैं। इनकी जिम्मेदार कौन? अजीब विडम्बना है छत्तीसगढ़ में सरकारे बदलने के बाद से देखा जा रहा है आवारा मवेशियों के लिए भाजपा शासन के द्वारा पलकों के द्वारा आवारा बनाए गए मवेशियों के गौ सेवा सदन के नाम पर लाखों लाखों रुपए का बजट बनाकर योजना के तहत आवारा बनाए गए मवेशियों के लिए अधिग्रहण कर गौ सेवा सदन के नाम पर महानगरों में आशियाना बनाया गया था,उक्त आशियाना में मवेशियों के देखभाल के लिए संचालक से लेकर मजदूरों की नियुक्ति की गई थी उनके लिए बजट के अनुसार आचार्य पानी से लेकर मृत्यु उपरांत मवेशियों को अग्नि देने मवेशी आशियाने की तलाश में भटकते नजर आते थे आज गौ सेवा सदन की भूमि का कोई अता पता नहीं। सरकार बदलने के बाद जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो नरवा गरवा बड़ी के तहत प्रदेश के समस्त पंचायत में करोड़ों खर्च करने की बात भी फलों के द्वारा बनाए गए आवारा पशुओं के लिए कोई गौशाला नहीं बचा है। वर्तमान भाजपा सरकार के द्वारा गौधाम योजना के तहत जिले के राजपुर एसडीएम देवेंद्र प्रधान प्रशासनिक अमला को लेकर गौधाम के लिए के लिए भूमि निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं नगर पंचायत क्षेत्र राजपुर के शराब दुकान के बगल में बने चिखना दुकान के बगल में खड़े पालकों के द्वारा आवारा मवेशी बारिश में आशियाना की तलाश में खड़े नजर आ रहे हैं।
गौधाम विषय को लेकर राजपुर नगर पंचायत क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों के द्वारा बताया गया कि मवेशियों के नाम पर शासन की इस तरह की योजनाएं सिर्फ और सिर्फ समाचारों तक ही देखी गई है सत्ता किसी की भी रही हो बजट का ज्यादा रकम आती तो है धरातल में दिखती कुछ नहीं नहीं जनता को पता चलती है रकम कब आई कब गई आज तक मवेशियों के लिए एक कांजी हाउस जिले में है यह ना तो देखी जा रही है नाही समाचार माध्यम से सुनी जा रही है। यह गौ धाम योजना पूर्व में चलाए गए गौ सेवा सदन और गौशाला की तरह जमीन दो हो जाएगी और पूर्व में बनाए गए शासकीय भूमि पर गौ सेवा सदन की भूमि निजी व्यक्ति की प्रॉपर्टी बनकर रह जाएगी। इससे अच्छा तो गौ सेवा सदन के फंड से प्रशासनिक देखरेख में कांजी हाउस के लिए पहल की जाती तो इस तरह आवारा मवेशीयो को किसी मयखाने के पास आशियाने के लिए खड़ा होते नहीं देखा जा सकता।


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