
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,08 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। सावन शुरू होते ही सरगुजा में 41 साल पुरानी कांवर यात्रा की परंपरा फिर जीवंत हो गई। शनिवार को शंकरघाट स्थित बांक नदी से हजारों कांवरियों ने जल उठाया और करीब 85 किलोमीटर की पदयात्रा पर कैलाश गुफा के लिए रवाना हुए। यहां पहुंचकर कांवरिये भगवान कैलाशनाथेश्वर का जलाभिषेक करेंगे। शनिवार सुबह शंकरघाट से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों तक बोलबम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। सरगुजा कांवरिया सेवा संघ के तत्वावधान में निकाली जाने वाली इस यात्रा में सरगुजा के अलावा कोरिया, रायगढ़, जशपुर और सीमावर्ती राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे। कांवरियों का आना शुक्रवार दोपहर से ही शुरू हो गया था। मध्यरात्रि के बाद करीब एक बजे से शंकरघाट में बांक नदी से जल उठाने के लिए भीड़ जुटने लगी। बड़ी संख्या में कांवरियों ने रात में शंकरघाट में ही विश्राम किया। शनिवार सुबह कांवरिये नाचते-गाते और जयघोष करते हुए कैलाश गुफा के लिए रवाना हुए। यात्रा में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल रहे। कई जत्थे सूर्योदय से पहले ही शहर से आगे निकल गए। अंबिकापुर से बतौली तक सडक पर कांवरियों का रेला दिखाई दिया।
रास्ते में सेवा,जगह-जगह स्वागत
कांवरियों की सुविधा के लिए यात्रा मार्ग पर विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने जलपान, पेयजल और नाश्ते की व्यवस्था की। जगह-जगह कांवरियों का स्वागत भी किया गया। यात्रा के दौरान विभिन्न संगठनों ने भगवान शिव-पार्वती और गणेश की जीवंत झांकियां भी निकालीं,जो आकर्षण का केंद्र रहीं।
सुरक्षा के लिए प्रशासन ने संभाली व्यवस्था : कांवर यात्रा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। अधिकारियों की मजिस्टि्रयल ड्यूटी लगाई गई थी। शंकरघाट से शुरू हुई यात्रा लुचकी, चेंद्रा और लमगांव होते हुए देर शाम बतौली पहुंची। यहां विश्राम के बाद कांवरियों का जत्था कैलाश गुफा के लिए रवाना होगा।
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