75 वर्षीय महिला की मृत्यु पर परिजन और समाज नहीं पहुंचे,निगम की मदद से पूरी हुई अंतिम विदाई
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। वार्ड क्रमांक 4 शंकरनगर की 75 वर्षीय सावित्री बाई की मौत के बाद जब उनके अंतिम संस्कार के लिए न परिवार का कोई सदस्य आगे आया और न ही समाज के लोग, तब नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने मानवीय पहल करते हुए उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया। घटना ने सामाजिक संवेदनाओं और रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जाता है कि पति की मृत्यु के बाद सावित्री बाई ने वर्षों पहले दूसरे समाज के व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया था। इसके बाद परिवार और समाज ने उनसे संबंध तोड़ लिए थे।
जीवनभर चला यह बहिष्कार उनकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं हुआ। महिला की कोई संतान भी नहीं थी। महापौर को जब जानकारी मिली कि महिला का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं है, तो वे स्वयं मौके पर पहुंचीं। नगर निगम की व्यवस्था से जेसीबी के जरिए गड्ढा खुदवाया गया और सामाजिक परंपराओं के अनुसार उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया। महापौर भी पूरे समय मौके पर मौजूद रहीं। बताया गया कि महिला के साथ रह रहे व्यक्ति ने अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उसके परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी।
महापौर बोलीं— इंसानियत सबसे बड़ा धर्म : महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी यदि समाज और परिजन साथ न दें तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार हर व्यक्ति का सम्मानजनक अधिकार है और ऐसी परिस्थिति में मानवता निभाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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