विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री देव नारायण साहू और विधायक रेणुका सिंह ने किया शुभारंभ,भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षा पर दिया जोर
वक्ताओं ने कहा…विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं,बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रभावना की पाठशाला
-संवाददाता-
सोनहत,31 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। भारतीय संस्कृति,संस्कार और राष्ट्र निर्माण की भावना पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय, सोनहत का भव्य शुभारंभ गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ,समारोह में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही,शुभारंभ के अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति,नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा विद्यालय को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री देव नारायण साहू ने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा व्यवस्था केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है,बल्कि उसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है,जो संस्कारित, अनुशासित,चरित्रवान और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हों,उन्होंने कहा कि आज के समय में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति,नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी संस्कारों का समावेश अत्यंत आवश्यक है, यदि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम बन जाए और उसमें संस्कारों का अभाव हो,तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रोजगार ही नहीं,श्रेष्ठ नागरिक बनाना भी शिक्षा का उद्देश्य : रेणुका सिंह-कार्यक्रम की संरक्षक सदस्य एवं क्षेत्रीय विधायक रेणुका सिंह ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल नौकरी या रोजगार प्राप्त करना नहीं,बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो अपने परिवार,समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों,उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान के साथ संस्कारों पर आधारित रही है,सरस्वती शिशु मंदिर जैसे विद्यालय बच्चों में अनुशासन, नैतिकता, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करते हैं,उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विद्यालय आने वाले वर्षों में सोनहत क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनेगा।
विद्यालय केवल भवन नहीं, संस्कारों की पाठशाला-विद्यालय समिति के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल शिक्षा देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना का केंद्र है,यहां विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा,उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा से जोड़ें,जो उन्हें केवल सफल नहीं, बल्कि एक अच्छा और जिम्मेदार नागरिक भी बनाए।
बड़ी संख्या में शामिल हुए अभिभावक और गणमान्य नागरिक
कार्यक्रम में संरक्षक सदस्य सिद्धि विनायक पाण्डेय,विद्यालय समिति के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह,व्यवस्थापक प्रकाश रजवाड़े, प्रधानाचार्य दीपक पांडेय,संभाग समन्वयक राजेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे, समारोह का समापन माँ सरस्वती एवं भारत माता के जयघोष तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ,उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय आने वाले समय में सोनहत क्षेत्र में संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है विद्यालय
विद्यालय के व्यवस्थापक प्रकाश रजवाड़े ने कहा कि विद्यालय आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों का समन्वय करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है,उन्होंने कहा कि विद्यालय में अनुशासित शिक्षण व्यवस्था,योग्य शिक्षकों का मार्गदर्शन और संस्कार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जाएगा, उन्होंने अभिभावकों से अधिक से अधिक बच्चों का प्रवेश कराकर इस शिक्षा अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।
विद्या भारती की शिक्षा पद्धति की बताई विशेषताएं
संभाग समन्वयक राजेश मिश्रा ने विद्या भारती की संस्कार आधारित शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं,बल्कि राष्ट्रनिष्ठ, सेवाभावी, आत्मविश्वासी और चरित्रवान व्यक्तित्व का निर्माण करना है,उन्होंने बताया कि विद्या भारती के विद्यालयों में विद्यार्थियों के शारीरिक,मानसिक,बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास पर समान रूप से बल दिया जाता है, जिससे वे समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें।
प्रधानाचार्य ने बताई विद्यालय की भावी कार्ययोजना
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य दीपक पांडेय ने सभी अतिथियों,अभिभावकों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया,उन्होंने विद्यालय की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार,अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जोड़ना है,उन्होंने कहा कि विद्यालय में शिक्षा के साथ खेल,योग,सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा,ताकि बच्चे जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।
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