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बैकुंठपुर@ स्थानांतरण के बाद भी नई पदस्थापना पर नहीं पहुंचीं एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे, उठ रहे कई सवाल

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क्या बिलासपुर तबादले से असंतुष्ट हैं? सूत्रों के हवाले से आदेश संशोधन के प्रयास की चर्चा, विभाग की ओर से नहीं आई कोई आधिकारिक पुष्टि
पुलिस महकमे में अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है, ऐसे में स्थानांतरण आदेश के बाद भी कोरिया में मौजूदगी चर्चा का विषय बनी

-संवाददाता-
बैकुंठपुर,31 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हाल ही में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के तबादलों की सूची जारी की गई,जिसमें कोरिया जिले की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) सुरेशा चौबे का स्थानांतरण बिलासपुर जिले के लिए किया गया है,सामान्यतः पुलिस विभाग में स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद अधिकारी शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर लेते हैं,क्योंकि पुलिस सेवा को अनुशासन और समयबद्ध कार्यप्रणाली के लिए जाना जाता है,लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है,सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे अब तक बिलासपुर में कार्यभार ग्रहण करने नहीं पहुंची हैं और अभी भी कोरिया जिले में मौजूद हैं,इसे लेकर प्रशासनिक और पुलिस महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या तबादले से असंतुष्ट हैं?
कोरिया जिले में सुरेशा चौबे के बने रहने को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह अपने स्थानांतरण से संतुष्ट नहीं हैं? हालांकि इसका कोई आधिकारिक उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं है,सूत्रों का दावा है कि वह अपने स्थानांतरण आदेश में संशोधन कराने के लिए प्रयासरत हैं,हालांकि इस संबंध में न तो स्वयं सुरेशा चौबे ने कोई बयान दिया है और न ही पुलिस मुख्यालय या गृह विभाग की ओर से कोई पुष्टि की गई है,इसलिए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस विभाग में ऐसे मामले कम देखने को मिलते हैं…
पुलिस विभाग में स्थानांतरण आदेश के बाद तत्काल कार्यभार ग्रहण करने की परंपरा रही है, अधिकांश मामलों में अधिकारी बिना विलंब नए पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर जिम्मेदारी संभाल लेते हैं,यही कारण है कि एडिशनल एसपी के मामले में हो रही देरी प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है,यदि किसी अधिकारी को स्थानांतरण आदेश पर आपत्ति होती है या संशोधन की मांग करनी होती है, तो सामान्यतः शासन स्तर पर प्रक्रिया अपनाई जाती है,जब तक संशोधित आदेश जारी नहीं होता, तब तक मूल आदेश प्रभावी माना जाता है।
आधिकारिक चुप्पी से बढ़ रही अटकलें
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक न तो पुलिस मुख्यालय और न ही एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे की ओर से स्थानांतरण में देरी के कारणों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है, यदि वास्तव में पदस्थापना आदेश में संशोधन के लिए आवेदन किया गया है,तो भी इसकी कोई अधिकृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
कार्यकाल के दौरान कई संवेदनशील मामलों से जुड़ा रहा नाम
सुरेशा चौबे का कोरिया जिले में कार्यकाल भले ही बहुत लंबा नहीं रहा,लेकिन इस दौरान कई चर्चित और संवेदनशील घटनाएं सामने आईं,सबसे अधिक चर्चा सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई तिहरा हत्याकांड की रही,इस घटना के दौरान वह प्रभारी पुलिस अधीक्षक का दायित्व भी संभाल रही थीं,घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई, शुरुआती जांच और अधिकारियों के बयानों को लेकर लगातार सवाल उठे थे,पीडि़त परिवार ने सार्वजनिक रूप से पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया था और कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए थे,हालांकि पुलिस विभाग ने समय-समय पर अपनी कार्रवाई और जांच को नियमसम्मत बताया था,इसके अलावा बैकुंठपुर क्षेत्र की कुछ अन्य घटनाओं को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली चर्चा में रही।
क्या इन घटनाओं का तबादले से संबंध है?
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हालिया घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के कारण उनका स्थानांतरण किया गया,हालांकि यह केवल चर्चाओं और कयासों तक सीमित है, राज्य शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश में किसी भी अधिकारी के तबादले का कारण उल्लेखित नहीं किया गया है, इसलिए यह कहना कि स्थानांतरण किसी विशेष घटना के कारण हुआ,फिलहाल तथ्यों के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता।
अब शासन और पुलिस मुख्यालय की प्रतिक्रिया पर नजर
फिलहाल पूरा मामला अटकलों और सूत्रों के दावों के बीच है, अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे शीघ्र बिलासपुर में कार्यभार ग्रहण करेंगी या फिर शासन की ओर से उनके स्थानांतरण आदेश में कोई संशोधन जारी किया जाएगा, यदि आने वाले दिनों में कोई आधिकारिक आदेश या स्पष्टीकरण जारी होता है,तो इससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी, इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल चर्चा में हैं-
– स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण क्यों नहीं किया गया?
– क्या शासन से आदेश संशोधन का अनुरोध किया गया है?
– यदि किया गया है तो क्या उस पर कोई निर्णय लंबित है?
– क्या कोरिया जिले में अभी किसी विशेष प्रशासनिक दायित्व के कारण उन्हें रोका गया है?
– या फिर यह केवल विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है? इन सभी सवालों के स्पष्ट उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।


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