केदारपुर जगन्नाथ मंदिर से दुर्गाबाड़ी तक निकली भव्य शोभायात्रा…नौ दिन मौसी के घर में विराजेंगे महाप्रभु
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा गुरुवार को शहर में श्रद्धा,आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। केदारपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से उत्कल समाज के तत्वावधान में गाजे-बाजे और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भव्य रथयात्रा निकली। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। रथयात्रा को लेकर उत्कल समाज ने कई दिनों से व्यापक तैयारियां की थीं। गुरुवार सुबह से ही श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने रथ पूजा, नेत्र उत्सव, नवग्रह पूजन,छेरापहरा तथा पहंडी विजय सहित विभिन्न पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान जगन्नाथ,बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सुसज्जित रथ पर विराजित किया गया। इसके बाद जयघोष और भजन-कीर्तन के बीच रथयात्रा प्रारंभ हुई। रथयात्रा तिवारी बिल्डिंग मार्ग, जोड़ापीपल और चौपाटी के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर होते हुए आकाशवाणी चौक,गांधी चौक,घड़ी चौक, संगम चौक और ब्रह्म रोड से श्रीराम मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। कुछ देर विश्राम के बाद यात्रा जयस्तंभ चौक,सदर रोड, महामाया चौक, संगम चौक और देवीगंज रोड होते हुए दुर्गाबाड़ी पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। कई स्थानों पर स्वागत मंच बनाए गए थे,जहां रथ की आरती उतारी गई और प्रसाद का वितरण किया गया। धार्मिक वातावरण और भगवान के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।
नौ दिन मौसी घर में रहेंगे महाप्रभु : धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए महाप्रभु नौ दिनों तक दुर्गाबाड़ी स्थित मौसी घर में विराजमान रहेंगे। इस अवधि में वहां प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होंगे,जबकि केदारपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का पट बंद रहेगा।
बाहुड़ा यात्रा के साथ होगी मंदिर वापसी
नौ दिन बाद बाहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी,जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा पुनः रथ पर सवार होकर केदारपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे। मंदिर पहुंचने पर परंपरानुसार विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रथयात्रा महोत्सव का समापन होगा। उत्कल समाज ने श्रद्धालुओं से नौ दिनों तक आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।
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