पुलिस ने सूदखोर को दबोचा,ऊंचे ब्याज और जान से मारने की धमकी से टूट गया था संदीप

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शहर के चर्चित कारोबारी संदीप अग्रवाल की आत्महत्या मामले में पुलिस जांच ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। शुरुआती तौर पर आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रही इस घटना में अब सूदखोरी, मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकियों का गंभीर पहलू सामने आया है। करीब दो सप्ताह तक चली जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि अत्यधिक ब्याज पर दिए गए कर्ज की वसूली के लिए आरोपी लगातार मृतक पर दबाव बना रहा था। ब्याज और मूलधन की रकम नहीं मिलने पर आरोपी ने कई बार जान से मारने की धमकी दी,जिससे मृतक मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस के अनुसार मामले की जांच मर्ग क्रमांक 44/2026 के तहत शुरू की गई थी। जांच के दौरान घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट को सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। इसके बाद मृतक के पिता, पत्नी और अन्य परिजनों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन की तकनीकी जांच कर कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाला, वहीं बैंक खाते के लेन-देन का भी बारीकी से विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि मृतक संदीप अग्रवाल और आरोपी पंकज चौधरी के बीच लंबे समय से पैसों का लेन-देन चल रहा था। दोनों के बीच कई बार फोन पर बातचीत भी हुई थी। बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने मृतक को ऊंची ब्याज दर पर रकम उधार दी थी। समय पर पैसा वापस नहीं मिलने पर वह लगातार ब्याज और मूलधन की मांग करते हुए दबाव बना रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा दी जा रही धमकियों और लगातार मानसिक प्रताड़ना ने मृतक को गहरे तनाव में पहुंचा दिया। जांच के दौरान पुलिस को मिले सुसाइड नोट में भी मृतक ने अपनी परेशानी का जिक्र किया है। उसने लिखा कि आरोपी की प्रताड़ना और लगातार बढ़ते दबाव के कारण वह बेहद परेशान हो चुका है। पुलिस के अनुसार मृतक ने आत्महत्या से पहले अपने पिता और पत्नी को भी आरोपी द्वारा दी जा रही धमकियों की जानकारी दी थी। परिजनों के बयान भी पुलिस जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। इन सभी तथ्यों के आधार पर कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 487/2026 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण), धारा 351(3) (आपराधिक धमकी) तथा कर्जा एक्ट की धारा 4 के तहत मामला कायम किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल ने नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल को आरोपी के विरुद्ध तत्काल और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी पंकज चौधरी (50), निवासी राजेंद्र वार्ड, दर्रीपारा, अंबिकापुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी गोलमोल जवाब देता रहा और मेमोरेण्डम कथन देने से भी इंकार करता रहा। हालांकि उसने घटना में प्रयुक्त मोबाइल पुलिस को सौंप दिया, जिसे जब्त कर जांच में शामिल किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। मामले की विवेचना अभी जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
सुसाइड नोट बना सबसे बड़ा सबूत : पुलिस के मुताबिक मृतक के पास से मिला सुसाइड नोट इस पूरे मामले का सबसे अहम साक्ष्य साबित हुआ। इसमें मृतक ने अपनी मानसिक पीड़ा, आर्थिक दबाव और आरोपी द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का उल्लेख किया है। इसी के आधार पर जांच की दिशा बदली और पुलिस तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में सफल रही।
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