रायपुर,16 जुलाई 2016। छत्तीसगढ़ में गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। राज्य शासन ने पूरे प्रदेश में धर्म स्वातंर्त्य अधिनियम-2026 को पूरी तरह से प्रभावी कर दिया है। इस कानून के लागू होते ही अब धोखे से धर्म बदलने वालों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। राजपत्र में इस कानून का प्रकाशन होने के बाद से पुलिस और प्रशासन को विशेष शक्तियां मिल गई हैं। यही वजह है कि अब प्रदेश में किसी भी नागरिक को डराकर या लालच देकर धर्म बदलने पर सीधे जेल जाना होगा। नए नियमों के तहत सजा की अवधि को पहले के मुकाबले काफी कड़ा कर दिया गया है।
सामूहिक धर्मांतरण पर अब सीधे आजीवन कारावास : इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति बलपूर्वक या धोखाधड़ी से सामूहिक धर्मांतरण कराता है,तो उसे सख्त सजा दी जाएगी। अदालत ऐसे दोषियों को अब सीधे आजीवन कारावास तक की सजा सुना सकती है। इसके साथ ही दोषियों पर 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
पीडि़त के आधार पर तय होगी सजा की अवधि : अगर धर्म परिवर्तन की शिकार कोई महिला,नाबालिग या अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग का व्यक्ति होता है,तो कानून और अधिक सख्त हो जाएगा। इस स्थिति में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 साल से लेकर अधिकतम 20 साल तक की जेल हो सकती है। सामान्य मामलों में भी अब 7 से 10 साल की सजा के साथ कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया है। अक्सर देखा गया है कि सिर्फ शादी करने के उद्देश्य से लोग अपना मूल धर्म बदल लेते हैं। नए अधिनियम में इस पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। अब केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन पूरी तरह अमान्य होगा और उस शादी को शून्य घोषित कर दिया जाएगा।
कलेक्टर को 60 दिन पहले देनी होगी लिखित सूचना
यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से भी अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे अब एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने की तारीख से कम से कम 60 दिन पहले जिले के कलेक्टर को लिखित रूप में सूचना देनी होगी। बिना जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति के किया गया कोई भी धर्म परिवर्तन अवैध माना जाएगा।
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