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भुवनेश्वर@बारिश के बीच जय जगन्नाथ से गूंजा पुरी…तीनों रथों के दर्शन को उमड़ी भीड़

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पुरी रथ यात्रा में भगदड़,एक श्रद्धालु की मौत,कई लोग घायल


भुवनेश्वर,13 जुलाई 2026। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष यात्रा के दौरान मौसम का मिजाज थोड़ा अलग रहा और इंद्रदेव भी अपनी पूरी कृपा बरसाते नजर आए। भारी बारिश के बावजूद भगवान जगन्नाथ,उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के प्रति भक्तों की श्रद्धा में रत्ती भर भी कमी नहीं दिखी। पुरी की सड़कों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष के साथ एकत्र हुए। बारिश के कारण सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती और जल-जमाव से निपटने के लिए उठाए गए कदमों ने सुनिश्चित किया कि यह पवित्र अनुष्ठान निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके। ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव के दौरान कथित भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में दम घुटने से एक श्रद्धालु की मौत की खबर सामने आई है। हालांकि,प्रशासन की ओर से अभी तक श्रद्धालु की मौत या भगदड़ जैसी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान मरीचि कुंड चौक के पास अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एक श्रद्धालु ने बताया कि बाहरी घेरे की रस्सी वाली बैरिकेडिंग गिर गई या फिर कुछ श्रद्धालु भीड़ के दबाव के कारण अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर गए। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक,इस दौरान करीब 40 से 50 लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए, जिससे कई श्रद्धालुओं को चोटें आईं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। कई लोगों को भीड़ से बाहर निकालकर एंबुलेंस और अस्पताल तक पहुंचाया गया। श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने स्वयं करीब 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि एक बुजुर्ग श्रद्धालु की दम घुटने के कारण मौत हो गई है। वहीं,सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लगातार बारिश के बीच करीब 200 लोगों को घुटन, चोट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पुरी के अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। पुरी में रथ यात्रा देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे थे। हर साल आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की यह रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। गुरुवार को पवित्र तटीय शहर में रथ यात्रा की शुरुआत निर्धारित समय से पहले ही भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए आयोजित ‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के साथ हुई। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। पुलिस, अग्निशमन विभाग और आपदा राहत टीमों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद भारी भीड़ और मौसम की स्थिति के कारण कुछ स्थानों पर दबाव की स्थिति बन गई। पुरी में तैनात फायर और इमरजेंसी सर्विस के आईजी डॉ. उमाशंकर डैश ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहली बार 25 स्पेशल रेस्क्यू यूनिट तैनात की गई थीं। प्रत्येक यूनिट में पांच प्रशिक्षित सदस्य और आधुनिक बचाव उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीमों ने अब तक करीब 100 लोगों को भीड़ में दबने और दम घुटने जैसी परेशानी से बचाया है। बचाए गए लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्थायी अस्पतालों और एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि रथ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं।
प्रशासन द्वारा सीसीटीवी फुटेज और अन्य माध्यमों से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर व्यवस्था की जा सके। पुरी रथ यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
अनोखी ‘पहांडी’ रस्म और भगवान का रथ पर पदार्पण
भारी वर्षा के कारण इस वर्ष ‘पहांडी’ रस्म में कुछ बदलाव किए गए। भगवान जगन्नाथ को बिना मुकुट पहनाए ही मंदिर से बाहर लाया गया और इस बार उन्हें झुलाते हुए नहीं, बल्कि अत्यंत सावधानी के साथ धीरे-धीरे रथ पर विराजमान किया गया। यात्रा से पूर्व पारंपरिक ‘आज्ञामाला’ रस्म पूरी की गई, जिसके बाद भगवान जगन्नाथ का ‘नंदीघोष’,बलभद्र का ‘तालध्वज’ और देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ रथ श्री मंदिर के सिंहद्वार के सामने लाया गया। मंदिर के सेवायतों और भक्तों की उपस्थिति में यह धार्मिक परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। इसके अलावा, चक्रराज श्री सुदर्शन को ‘धाड़ी पहांडी’ शोभायात्रा के जरिए उनके रथ तक पहुंचाया गया,जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति के सागर में डूब गया।
सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम और मॉक ड्रिल
लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए गए थे। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा बलों और पुलिस की कड़ी निगरानी है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, सेंट जॉन एम्बुलेंस, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ने मिलकर एक संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य भीड़ के नियंत्रण और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है ताकि श्रद्धालु बिना किसी डर के अपने आराध्य के दर्शन कर सकें।भगवान बलभद्र को मंदिर से लाकर रथ में बैठाया गया। पुरी के महाराज गजपति दिव्यसिंह देव ने सबसे आखिर में नंदीघोष रथ पर झाड़ू लगाई। पुरी में तेज बारिश हो रही है, लेकिर करीब 10 लाख लोग छाता लगाकर रथयात्रा में शामिल होने पहुंचे हैं।
देश भर में रथ यात्रा की धूमः गृह मंत्री की उपस्थिति
पुरी के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी रथ यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखा गया। जामालपुर के जगन्नाथ मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती संपन्न हुई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शामिल होकर दर्शन किए। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने ‘पहिंद विधि’ के तहत सोने की झाड़ू से रथ यात्रा के मार्ग की सफाई की, जिसके बाद यात्रा का औपचारिक प्रस्थान हुआ। भगवान जगन्नाथ की यह रथ यात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता और अटूट विश्वास का भी प्रतीक है। लाखों भक्तों के लिए यह वर्ष का सबसे पवित्र और प्रतीक्षित दिन होता है।


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