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अम्बिकापुर@गरीबों के मकान तोड़ना सरकारों की पुरानी प्रवृत्ति, अब कब्जाधारियों को करेंगे संगठित : अमरनाथ पांडे

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नकटी गांव में पुनर्वास की मांग,सरकार पर साधा निशाना,बोले…बिना वैकल्पिक व्यवस्था गरीबों को बेघर करना अन्याय

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,06 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। हाईकोर्ट अधिवक्ता अमरनाथ पांडे ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि गरीबों के मकान तोड़ने की प्रवृत्ति नई नहीं है,बल्कि भाजपा और कांग्रेस—दोनों सरकारों के कार्यकाल में ऐसी कार्रवाई होती रही है। हालांकि उन्होंने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने गरीबों के आवासों की सुरक्षा के लिए अलग सोच के साथ काम किया था। अमरनाथ पांडे ने कहा कि वर्ष 1986 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने ‘नगरीय क्षेत्र में भूमिहीन व्यक्तियों को पट्टा धृति अधिकारों का प्रदान किया जाना अधिनियम’ लागू किया था। इस कानून के तहत यदि कोई भूमिहीन गरीब परिवार शहरी क्षेत्र में सीमित भूमि पर वर्षों से निवास कर रहा है,तो उसे संरक्षण देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार ऐसे लोगों को हटाने से पहले कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित कर सुनवाई करना,उनकी आपत्तियां सुनना, सरकार की आवश्यकता बताना तथा पहले वैकल्पिक भूमि या आवास उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके बाद ही बेदखली की कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद की सरकारों में इस व्यवस्था की भावना को नजरअंदाज किया गया। उनके अनुसार गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाने से पहले उन्हें न्यायालय जाने तक का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत जाना चाहता है तो उसे इसका अवसर मिलना चाहिए। नकटी गांव में हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए अमरनाथ पांडे ने कहा कि जिन गरीब परिवारों के मकान तोड़े गए हैं,उन्हें उसी गांव में पुनर्वास कर आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कोई भी व्यक्ति शौक से स्लम या शासकीय भूमि पर झोपड़ी बनाकर नहीं रहता,बल्कि आर्थिक मजबूरी और रहने के लिए निजी जमीन नहीं होने के कारण ऐसे स्थानों पर आश्रय लेने को विवश होता है। उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बड़े उद्योगों और परियोजनाओं के लिए गरीबों को विस्थापित किया जा रहा है,जबकि उनके पुनर्वास को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। अमरनाथ पांडे ने घोषणा की कि वे पूरे छत्तीसगढ़ में शासकीय भूमि पर निवास करने वाले गरीब कब्जाधारियों को संगठित करेंगे और उनके अधिकारों की लड़ाई कानूनी तथा लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि गरीबों के घर उजाड़ने वालों का लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक विरोध किया जाएगा।


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