Breaking News

बैकुंठपुर/सोनहत@ डीजीपी की गोपनीय बैठक में क्या छिपा रह गया?

Share

  • नौगई तिहरे हत्याकांड पर कई सवाल अब भी अनुत्तरित
  • नौगई तिहरा हत्याकांड : क्या विभागीय जवाबदेही पर हमेशा के लिए पड़ गया पर्दा?
  • डीजीपी की समीक्षा बैठक में विवेचना पर संतोष…लेकिन स्थानीय स्तर पर पुलिस की प्रतिक्रिया…सूचना तंत्र और विभागीय जवाबदेही को लेकर चर्चाएं जारी…अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर…
  • नौगई तिहरा हत्याकांड के बाद उठे सवालों पर क्या हमेशा के लिए लग गया विराम?
  • सीबीआई जांच की अनुशंसा के बीच विभागीय जवाबदेही पर सन्नाटा,गोपनीय समीक्षा बैठक में क्या छूट गए महत्वपूर्ण सवाल?
  • विशेष सूत्रों का दावा-डीजीपी जानना चाहते थे आखिर घटना हुई कैसे,अधिकारियों ने
  • बताया- सब कुछ सामान्य था…
  • अब जिले में ‘नौगई कांड’ का नाम लेकर दी जा रही धमकियां भी बनी चिंता का विषय
  • डीजीपी की समीक्षा बैठक के बाद भी पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल बरकरार, अब निगाहें सीबीआई जांच पर…
  • नौगई कांडः आरोपी कटघरे में,लेकिन पुलिस व्यवस्था पर उठे सवालों का जवाब कौन देगा?
  • डीजीपी की समीक्षा,सीबीआई जांच की राह… लेकिन पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल अब भी कायम
  • सीबीआई करेगी हत्या की जांच,पर पुलिस व्यवस्था की समीक्षा कौन करेगा?
  • कोरिया के शांत माहौल को झकझोरने वाला नौगई कांड,अब पुलिस व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
  • डीजीपी पहुंचे, समीक्षा हुई…लेकिन नौगई कांड के अनुत्तरित सवाल आज भी बरकरार

रवि सिंह
बैकुंठपुर/सोनहत,06 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले के बहुचर्चित नौगई तिहरे हत्याकांड ने केवल तीन लोगों की जान नहीं ली,बल्कि जिले की कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए थे,राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी है,लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या घटना के दौरान पुलिस व्यवस्था में यदि कोई चूक हुई थी तो उसकी समीक्षा भी होगी या पूरा मामला अब केवल आरोपियों की गिरफ्तारी और मुकदमे तक सीमित रह जाएगा? छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के कोरिया दौरे के दौरान इस प्रकरण को लेकर हुई समीक्षा बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि अब विभागीय जिम्मेदारी तय होने की संभावना लगभग समाप्त होती दिख रही है।
बता दे की छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुणदेव गौतम ने पुलिस महानिदेशक का पदभार संभालने के बाद पहली बार जिला कोरिया का दौरा किया, यह दौरा केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी विशेष रहा, क्योंकि कोरिया ही वह जिला है जहां उन्होंने अपने पुलिस सेवा जीवन की शुरुआत पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में की थी,लंबे समय बाद अपने पहले कार्यक्षेत्र में लौटे डीजीपी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि कोरिया उनके लिए हमेशा विशेष रहेगा और यहां आकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई,रक्षित केंद्र बैकुंठपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने जिले की कानून-व्यवस्था,अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा तथा पुलिसिंग व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की,उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और संवेदनशील, जवाबदेह तथा जनहितैषी पुलिसिंग के माध्यम से इस विश्वास को और मजबूत करना होगा।
कानून-व्यवस्था पर विस्तृत समीक्षा- रक्षित केंद्र बैकुंठपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में डीजीपी ने जिले के अपराधों की स्थिति, लंबित मामलों, महिला सुरक्षा,साइबर अपराध, यातायात व्यवस्था,सामुदायिक पुलिसिंग तथा जनसुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की,उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के साथ-साथ जनता के साथ संवाद और विश्वास का वातावरण भी मजबूत किया जाए,डीजीपी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं,बल्कि अपराध की रोकथाम और समाज में सुरक्षा का वातावरण तैयार करना भी है।
डीजीपी की गोपनीय बैठक में आखिर क्या हुई चर्चा?-विशेष सूत्रों के अनुसार पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने बैकुंठपुर में अधिकारियों के साथ नौगई तिहरे हत्याकांड पर अलग से विस्तृत समीक्षा की, बैठक में पुलिस महानिरीक्षक,पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित थाना स्तर के अधिकारी मौजूद थे,सूत्रों का कहना है कि डीजीपी का मुख्य प्रश्न यही था कि कोरिया जैसे शांत जिले में इतनी बड़ी घटना आखिर हुई कैसे और क्या इसे रोका जा सकता था? लेकिन बैठक में मौजूद अधिकारियों ने घटना को मुख्य रूप से आपसी रंजिश का परिणाम बताते हुए विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की गंभीर चूक से इनकार किया, सूत्रों का दावा है कि किसी भी अधिकारी ने यह स्वीकार नहीं किया कि पुलिस व्यवस्था में कोई कमी रह गई थी।
क्या कुछ महत्वपूर्ण तथ्य डीजीपी के सामने नहीं रखे गए?
विशेष सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान कुछ ऐसे बिंदु सामने नहीं आए जिनकी चर्चा लंबे समय से स्थानीय स्तर पर होती रही है,सूत्रों का दावा है कि घटना वाले दिन सोनहत थाना प्रभारी अपने थाना क्षेत्र में मौजूद गंभीर परिस्थितियों की निगरानी करने के बजाय दूसरे थाना क्षेत्र में हुई चोरी के मामले के संबंध में बाहर गए हुए थे, यदि यह तथ्य सही है तो यह जांच का विषय हो सकता है कि उस दौरान थाना क्षेत्र की निगरानी किसके जिम्मे थी और क्या इससे पुलिस की प्रतिक्रिया प्रभावित हुई,हालांकि इस संबंध में पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिकॉर्ड में कोई प्रभारी,काम कोई और?
विशेष सूत्रों ने एक और महत्वपूर्ण दावा किया है, बताया जा रहा है कि विभागीय रिकॉर्ड में साइबर शाखा की जिम्मेदारी एक अधिकारी के नाम दर्ज है,जबकि वास्तविक काम किसी अन्य अधिकारी द्वारा देखा जा रहा है,यदि ऐसा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय बनता है कि क्या इसके लिए कोई विधिवत आदेश जारी हुआ था अथवा केवल कार्य सुविधा के लिए ऐसा किया गया,इस संबंध में भी पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
सीबीआई जांच के बाद क्या विभागीय कार्रवाई की संभावना खत्म?
राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा किए जाने के बाद अब पुलिस विभाग के भीतर यह माना जा रहा है कि आगे की जांच एजेंसी करेगी, लेकिन जिले में चर्चा इस बात की भी है कि यदि घटना के समय पुलिस व्यवस्था में कोई कमी रही होगी तो क्या उसकी जवाबदेही भी कभी तय होगी? कई लोगों का मानना है कि अब पूरा ध्यान केवल आपराधिक जांच पर रहेगा जबकि पुलिस व्यवस्था से जुड़े सवाल धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं।
अब धमकियों में भी लिया जा रहा ‘नौगई कांड’ का नाम
नौगई तिहरे हत्याकांड का सबसे चिंताजनक सामाजिक प्रभाव अब सामने आने लगा है, हाल ही में सोनहत क्षेत्र में एक विवाद के दौरान कथित रूप से ‘नौगई जैसी घटना कर देंगे’ जैसी धमकी दिए जाने का मामला भी चर्चा में आया, यदि इस प्रकार की घटनाएं बढ़ती हैं तो यह केवल एक आपराधिक मामले का प्रभाव नहीं बल्कि समाज में भय का स्थायी वातावरण बनने का संकेत माना जाएगा,विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जघन्य अपराध का भय यदि अपराधियों द्वारा धमकी के रूप में इस्तेमाल होने लगे तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
लोग पूछ रहे- क्या सब कुछ केवल ‘आपसी रंजिश’ था?
क्या घटना पूरी तरह रोकी नहीं जा सकती थी?
सूचना तंत्र समय पर सक्रिय था या नहीं?
पुलिस की प्रतिक्रिया पर्याप्त थी?
घटना के समय पुलिस बल की उपलब्धता क्या थी?
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या नई व्यवस्था बनाई गई? इन प्रश्नों का सार्वजनिक उत्तर अभी तक सामने नहीं आया है।

हर जगह हर समय पुलिस मौजूद नहीं रह सकती,जनता का सहयोग जरूरी : डीजीपी
डीजीपी अरुणदेव गौतम ने कहा कि पुलिस हर समय हर स्थान पर मौजूद नहीं रह सकती, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने में आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है,उन्होंने लोगों से समय पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने,अफवाहों से बचने तथा सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की, उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष,संवेदनशील और जनोन्मुखी पुलिसिंग अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक पुलिसकर्मी का व्यवहार आम नागरिक के प्रति सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण होना चाहिए, डीजीपी ने महिला एवं बाल सुरक्षा,साइबर अपराधों पर प्रभावी निगरानी और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया,साथ ही सड़क सुरक्षा मितानों के कार्यों की सराहना करते हुए सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की समय पर सहायता को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले सड़क सुरक्षा मितानों एवं राहवीर योजना के तहत सहयोग करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया।
जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी
अपने संबोधन में डीजीपी अरुणदेव गौतम ने कहा कि पुलिस की असली ताकत हथियार या संसाधन नहीं,बल्कि जनता का विश्वास है,यदि जनता पुलिस पर भरोसा करेगी तो अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना कहीं अधिक आसान होगा,उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
डीजीपी ने क्या कहा?
अपने दौरे के दौरान पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि कोरिया हमेशा शांत जिला रहा है और नौगई जैसी घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, उन्होंने समीक्षा बैठक में विवेचना की प्रगति पर संतोष जताया तथा कहा कि अब मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की जा चुकी है, उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष विवेचना, जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग तथा कानून-व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा, पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. सुरेशा चौबे, जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारी, एसडीओपी, डीएसपी, थाना एवं चौकी प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अब निगाहें सीबीआई के निर्णय पर…
फिलहाल पूरा मामला सीबीआई जांच की ओर बढ़ चुका है,अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या जांच केवल हत्या की साजिश,आरोपियों की भूमिका और साक्ष्यों तक सीमित रहेगी,या फिर घटना के समय पुलिस व्यवस्था,प्रतिक्रिया,सूचना तंत्र और प्रशासनिक निर्णयों की भी वस्तुनिष्ठ समीक्षा होगी,यदि जांच इन पहलुओं तक पहुंचती है,तभी उन तमाम सवालों का जवाब मिल सकेगा जो आज भी जिले की जनता के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
मुख्य बातें…
डीजीपी बनने के बाद पहली बार कोरिया पहुंचे अरुणदेव गौतम।
कोरिया को बताया अपना पहला कार्यक्षेत्र और पुराने दिनों को किया याद।
नौगई तिहरा हत्याकांड को शांत जिले के लिए ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया।
जांच की प्रगति पर जताया संतोष,कहा…जरूरत पड़ने पर सीबीआई जांच की अनुशंसा पहले से की जा चुकी है।
पुलिस और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग को बताया प्रभावी पुलिसिंग की सबसे बड़ी कुंजी।
महिला सुरक्षा,साइबर अपराध,सामुदायिक पुलिसिंग और आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग पर दिया विशेष जोर।


Share

Check Also

बलरामपुर@ सड़क सुरक्षा पर कलेक्टर-एसपी सख्त

Share अतिक्रमण और यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाईबलरामपुर,06 जुलाई 2026(घटती-घटना)। जिले में लगातार …

Leave a Reply