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अंबिकापुर@पुलिस की गिरफ्त से छूटा सजायाफ्ता हत्यारा

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  • अब जांच के घेरे में स्थानीय संपर्क और पुलिस समन्वय
  • झारखंड से अंबिकापुर तक फरारी का सफर,आजीवन कारावास प्राप्त दोषी के मामले ने खोले कई राज
  • अंबिकापुर में छिपा था वासेपुर हत्याकांड का सजायाफ्ता दोषी? फरारी ने खड़े किए कई असहज सवाल
  • सजायाफ्ता फरार आरोपी,पुलिस कार्रवाई और स्थानीय संपर्क…अब जांच बताएगी पूरा सच
  • झारखंड पुलिस की दबिश,आरोपी फरार…क्या स्थानीय सहयोग से बचता रहा सजायाफ्ता दोषी?
  • क्या वर्षों तक कानून को चकमा देता रहा सजायाफ्ता दोषी? अंबिकापुर में कार्रवाई के बाद कई परतें खुलनी बाकी
  • झारखंड पुलिस के ऑपरेशन ने उठाए बड़े सवाल, फरार दोषी तक कैसे पहुंचा संरक्षण का शक?
  • आजीवन कारावास प्राप्त दोषी की अंबिकापुर में मौजूदगी ने हिलाया
  • सिस्टम,जांच के घेरे में कई पहलू
  • वासेपुर से अंबिकापुर तक : फरार सजायाफ्ता की कहानी या पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती?

अंबिकापुर,04 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। झारखंड के धनबाद जिले के बहुचर्चित वासेपुर दोहरे हत्याकांड में न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद वर्षों से फरार चल रहे दोषी की तलाश आखिरकार सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर तक पहुंच गई, झारखंड पुलिस को सूचना मिली कि दोषी लंबे समय से अंबिकापुर में रह रहा है,सूचना के आधार पर पुलिस ने पूरी गोपनीयता के साथ कार्रवाई की,लेकिन घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि आरोपी पुलिस की पकड़ से निकल गया, इसके बाद शुरू हुआ सवालों का ऐसा सिलसिला, जिसका जवाब अब केवल पुलिस जांच ही दे सकती है,यह मामला अब केवल एक फरार अपराधी का नहीं रह गया है, यह अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय,स्थानीय सूचना तंत्र,फरार अपराधियों के संभावित नेटवर्क और कानून-व्यवस्था की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। बता दे की झारखंड के वासेपुर में खूंखार गैंगस्टर साबिर जो आजीवन कारावास प्राप्त दोषी है अंबिकापुर में इतने वर्षों तक छुपे रहने को लेकर सरगुजा पुलिस पर लग रहे हैं सवालिया निशान? लोगों में इस बात को लेकर के फूट रहा है बड़ा गुस्सा कि कोई भी बाहरी संदिग्ध व्यक्ति अंबिकापुर शहर में यदि आकर के निवास करता है तो पुलिस ने क्यों नहीं किया जांच-पड़ताल? क्या पुलिस का सूचना तंत्र है कमजोर? गरीब मजदूर किस्म के लोगों को तो आए दिन मुसाफिराना दर्ज करने के नाम पर किया जाता है परेशान? घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हुई है कि क्या परिवहन नेटवर्क का इस्तेमाल किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, पुलिस सूत्रों के अनुसार यदि जांच के दौरान ऐसे किसी पहलू के संकेत मिलते हैं तो संबंधित एजेंसियां आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी, इसी बीच लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि न्यायालय से दोषसिद्ध एक फरार आरोपी लंबे समय तक अंबिकापुर में रह रहा था?
न्यायालय ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा-उपलब्ध न्यायालयीन अभिलेखों के अनुसार आरोपी साबिर आलम धनबाद के वर्ष 2001 के चर्चित दोहरे हत्याकांड में दोषसिद्ध है, इस प्रकरण में न्यायालय ने वर्ष 2007 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी,इसके बाद से वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा,झारखंड पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी,पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल ही में विश्वसनीय सूचना मिलने पर अंबिकापुर में दबिश दी गई, उपलब्ध न्यायालयीन रिकॉर्ड और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार धनबाद के चर्चित दोहरे हत्याकांड में न्यायालय ने कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, इसके बाद कुछ दोषियों ने न्यायिक प्रक्रिया का सामना किया, जबकि कुछ फरार हो गए,झारखंड पुलिस वर्षों से फरार दोषियों की तलाश में थी, हाल के दिनों में पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली कि इनमें से एक दोषसिद्ध आरोपी अंबिकापुर क्षेत्र में रह रहा है, इसी सूचना के आधार पर विशेष टीम गठित कर कार्रवाई की गई।
स्थानीय लोगों ने जताई चिंता,पुलिस से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग- खरसिया नाका क्षेत्र के मोमिनपुरा के एक निवासी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि घटना के बाद क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल है, उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाई या फरार आरोपी की सहायता की है,तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए,स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की कि पुलिस क्षेत्र में सघन सत्यापन अभियान चलाए, बाहरी व्यक्तियों के निवास और गतिविधियों की जांच करे तथा यदि किसी प्रकार की धमकी या अवैध गतिविधियों की शिकायत मिलती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाए, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
परिवहन नेटवर्क, आपराधिक गतिविधियों की आशंकाएं और पुलिस के सामने कई सवाल– यात्री बसो का संचालन में पिछले महीने बस संचालक की बस से गांजा तस्करी हो रही थी,जिस पर सूरजपुर पुलिस ने कार्यवही भी जो अभी भी थाने जप्त है,सूत्र बताते है की इनकी बसों में अन्य मादक पदार्थों के अलावा जंगली जानवरों की कीमती खाल भी दुसरे राज्य में भेजा जाता है।
गोपनीय ऑपरेशन और अचानक बदला घटनाक्रम
झारखंड पुलिस का कहना है कि इतने गंभीर मामले में कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखना आवश्यक था,पुलिस का तर्क है कि यदि पहले से सूचना व्यापक स्तर पर साझा की जाती तो आरोपी को भनक लग सकती थी और वह फरार हो सकता था,सूत्रों के अनुसार पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में भी ले लिया था, लेकिन घटनास्थल पर उत्पन्न परिस्थितियों के बीच वह पुलिस की पकड़ से निकल गया, झारखंड पुलिस के अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि कार्रवाई के दौरान आरोपी फरार हो गया और तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
दो राज्यों की पुलिस का अलग-अलग पक्ष
यहीं से विवाद की दूसरी परत शुरू होती है, सरगुजा पुलिस का पक्ष सामने आया कि झारखंड पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं दी थी,दूसरी ओर झारखंड पुलिस का कहना है कि गोपनीयता ऑपरेशन की आवश्यकता थी और आरोपी के फरार होने के बाद तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित कर संयुक्त अभियान चलाया गया,दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं,लेकिन इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा प्रश्न वही है यदि स्थानीय पुलिस पहले से साथ होती तो क्या आरोपी भाग पाता? और दूसरा प्रश्न यदि पहले सूचना दी जाती तो क्या आरोपी पहले ही फरार हो जाता? इन दोनों सवालों का उत्तर केवल जांच के बाद ही सामने आएगा।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर वर्षों तक अंबिकापुर में कैसे रहा?-
पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है,यदि वास्तव में न्यायालय से दोषसिद्ध और वर्षों से फरार आरोपी अंबिकापुर में रह रहा था, तो क्या उसने पहचान बदल ली थी? क्या वह फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहा था? क्या उसका स्थानीय स्तर पर कोई सहयोगी था? क्या किसी ने उसे शरण दी? क्या उसकी गतिविधियों की किसी एजेंसी को जानकारी नहीं थी? यही वे प्रश्न हैं जिन पर अब पुलिस की जांच केंद्रित बताई जा रही है।
वासेपुर दोहरे हत्याकांड के अपराधी को बस संचालक का संरक्षण?
झारखंड और बिहार में अपराध करके सरगुजा में अपना व साम्राज्य स्थापित करने वाले एक अंबिकापुर निवासी व्यक्ति और परिवार के दो दर्जन से अधिक सदस्यों की होगी जांच पिछले तीन दशक से सरगुजा जिले में नए-नए खरसिया नाका में जमा रखे हैं अपना पैर? उसके परिवार के सभी सदस्यों की स्थिति है संदिग्ध…आए दिन कर रहे हैं विवाद, लोगों को उठा लेने जान से मारने की देते हैं धमकी, फरार मुजरिम को पनाह देते है, अभी अंबिकापुर की हालही घटना ने बैतूल और उसके परिवार संरक्षण की कलाई खोल दी, खरसिया नाका में मोमिनपुरा के निवासी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया की खूंखार अपराधी को खरसिया नाका में पुलिस की जीप से जबरदस्ती उतार कर भाग देने वाले के ऊपर कार्यवाही से क्यों कतरा रही है अंबिकापुर पुलिस? क्या अंबिकापुर को भी वासेपुर बनाने की चल रही है गुपचुप योजना…अंबिकापुर पुलिस खतरनाक कथित बैतूल नामक राजहंस का बस संचालक पर है क्यों मेहरबान, नहीं किया अभी तक इन पर कोई एफआईआर ना किसी कि गई अभी तक गिरफ्तारी, घटना दिवस के दूसरे रात खरसिया नाका में मोमिनपुरा के उसके समर्थक गैंगस्टर के पुत्रों के द्वारा जश्न मनाया गया…पड़ाका फोड़कर मिठाइयां बांट बिरयानी खाकर कर मनाया गया जश्न।
क्या स्थानीय सूचना तंत्र कमजोर पड़ा?-
इस घटना ने स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं, सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी दूसरे राज्य का दोषसिद्ध फरार अपराधी यदि लंबे समय तक किसी शहर में रह सके तो यह स्थानीय सूचना तंत्र की भी समीक्षा का विषय बन जाता है, यद्यपि अभी तक पुलिस ने यह स्वीकार नहीं किया है कि आरोपी कितने समय से अंबिकापुर में था, लेकिन यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
पुलिस कार्रवाई में बाधा—अब जांच का अहम बिंदु-
घटना के दौरान पुलिस कार्रवाई में कथित बाधा पहुंचने की भी जांच की जा रही है, पुलिस उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है, यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर पुलिस के वैध कार्य में बाधा पहुंचाई अथवा आरोपी को फरार होने में सहायता की, तो उसके विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई हो सकती है, फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
अंतरराज्यीय अपराध और स्थानीय कानून-व्यवस्था-
यह मामला एक बड़े प्रश्न की ओर भी संकेत करता है, देश में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जहां गंभीर अपराधों में वांछित आरोपी दूसरे राज्यों में जाकर नई पहचान के साथ रहने का प्रयास करते हैं, ऐसी स्थिति में स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियों और अंतरराज्यीय समन्वय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, यदि समय रहते सूचना का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई प्रभावी हो, तो ऐसे मामलों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
क्या अब जांच स्थानीय संपर्कों तक पहुंचेगी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच केवल फरार आरोपी की तलाश तक सीमित नहीं है,यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था,कहां-कहां आता-जाता था,उसकी आर्थिक गतिविधियां क्या थीं,और क्या उसे किसी प्रकार का स्थानीय सहयोग प्राप्त था,हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी व्यक्ति को आधिकारिक रूप से दोषी नहीं ठहराया है।
कानून क्या कहता है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि कोई आरोपी न्यायालय से दोषसिद्ध और फरार है, उसे शरण देता है,उसकी गिरफ्तारी में बाधा पहुंचाता है या फरारी में सहायता करता है, तो उसके विरुद्ध भी अलग से आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है,लेकिन ऐसी कार्रवाई केवल जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही संभव है।
अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरगुजा पुलिस की…
झारखंड पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी कर लौट चुकी है, अब लोगों की निगाहें सरगुजा पुलिस पर हैं, क्या स्थानीय पुलिस अपने स्तर पर फरार आरोपी की तलाश तेज करेगी? क्या झारखंड पुलिस के साथ संयुक्त अभियान फिर चलेगा? क्या पुलिस कार्रवाई में कथित बाधा पहुंचाने वाले लोगों की पहचान होगी? क्या जांच स्थानीय संपर्कों तक पहुंचेगी? इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने वाले दिनों में पुलिस जांच से ही सामने आएंगे।


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