ग्रामीण बोले…नकटी जैसी कार्रवाई का डर,एनआरडीए ने कहा-विस्थापन की कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं
रायपुर,04 जुलाई 2026। नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब राजधानी से लगे तूता गांव में भी जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। नवा रायपुर-अटल नगर विकास प्राधिकरण ने गांव के 35 मकानों पर नोटिस चस्पा कर निवासियों से 6 जुलाई तक जवाब मांगा है। नोटिस मिलने के बाद गांव के लोगों में अपने घरों को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों को यह डर है कि कहीं उनके साथ भी नकटी गांव जैसी कार्रवाई न हो जाए। हालांकि,एनआरडीए ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल गांव में किसी तरह की बेदखली या बुलडोजर कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। अभी केवल शिकायतों के आधार पर नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। एनआरडीए की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित मकान प्राधिकरण की जमीन पर बने हैं। नोटिस में प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। अगर तय समय तक वे जवाब नहीं देते हैं, तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण बोले…पीढि़यों से यहीं रह रहे हैं…
नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि कई परिवार पिछले 25 से 50 वर्षों से इसी स्थान पर रह रहे हैं। यहां उनकी कई पीढि़यां बसी हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर मकान अवैध थे तो इतने वर्षों तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। ग्रामीणों ने नोटिस हाथ में लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि नोटिस के बाद पूरे गांव में भय और असमंजस का माहौल है।
18 एकड़ जमीन पर मेडिकल कॉम्प्लेक्स का प्रस्ताव
एनआरडीए के अनुसार, तूता गांव की करीब 18 एकड़ जमीन पर मेडिकल कॉम्प्लेक्स विकसित करने का प्रस्ताव है। इसी संबंध में संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 6 जुलाई तक जवाब देने को कहा गया है।
एनआरडीए बोला…अभी विस्थापन की कोई कार्रवाई नहीं
एनआरडीए ने कहा है कहना है कि ग्राम तूता में फिलहाल किसी भी प्रकार की विस्थापन या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। अभी केवल शिकायतों के आधार पर नियमानुसार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
शिकायत के बाद जारी हुए नोटिस
एनआरडीए के मुताबिक, गांव में अतिक्रमण की शिकायतें लगातार मिल रही थी। इसके बाद अधिकारियों ने निरीक्षण कराया और संबंधित लोगों को प्राथमिक कारण बताओ नोटिस जारी किए। प्राधिकरण का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है। 2 जुलाई को गांव के प्रतिनिधियों और समाज के पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की।
पीएम आवास को भी नोटिस,खेत बेचकर और लोन लेकर बनाया था घर
रेखा सोनवानी ने बताया कि साल 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता राशि मिली थी। बाकी रकम उन्होंने खेत बेचकर और कर्ज लेकर जुटाई। करीब 10 लाख रुपए की लागत से उन्होंने अपना घर बनाया। रेखा ने कहा…अभी यह नहीं पता कि हमारा घर टूटेगा या नहीं,लेकिन नोटिस मिलने के बाद पूरा परिवार डरा हुआ है। नकटी गांव में भी पहले नोटिस दिए गए थे, उसके बाद प्रधानमंत्री आवास वाले मकानों पर भी बुलडोजर चला दिया गया। यही डर हमें भी सता रहा है। हमने खेत बेचकर और लोन लेकर यह घर बनाया है। अगर यह भी टूट गया तो हम कहां जाएंगे?’ हमारे पार खेत भी नहीं है।
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