पशुपालन विभाग की सलाह- साफ-सफाई, स्वच्छ पानी और संतुलित आहार से बचाव संभव
अंबिकापुर,30 जून 2026 (घटती-घटना)। बारिश का मौसम शुरू होते ही पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को सतर्क रहने और समय पर पशुओं का टीकाकरण कराने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु में नमी, जलभराव और मच्छर-मक्खियों के बढ़ते प्रकोप से पशुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि बरसात में पशु शेड की साफ-सफाई सबसे जरूरी है। शेड का फर्श हमेशा सूखा रखना चाहिए और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था के साथ नालियों की नियमित सफाई करने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पशुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना जरूरी है। खुले स्थानों या गड्ढों में जमा दूषित पानी पीने से पशु बीमार हो सकते हैं। इसलिए शेड के पास साफ पानी की व्यवस्था रखें।
टीकाकरण से रोकी जा सकती हैं गंभीर बीमारियां
डॉ. मिश्रा ने बताया कि बरसात में गलघोटू, लंगड़ा बुखार (ब्लैक क्वार्टर), एंटेरोटॉक्सिमिया, पीपीआर, स्वाइन फीवर और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनसे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। पशुधन विकास विभाग द्वारा कई बीमारियों के टीके नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले पशुओं का कृमिनाशन (डीवॉर्मिंग) कराएं। इसके बाद कराया गया टीकाकरण अधिक प्रभावी रहता है।
बारिश में बरतें अतिरिक्त सावधानी
पशुपालन विभाग ने अपील की है कि भारी बारिश के दौरान पशुओं को खुले में न छोड़ें और खेतों में काम न कराएं। समय-समय पर पशु शेड में रोगाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करें। नीम की पत्तियों और गोबर के कंडों का धुआं करने से मच्छर-मक्खियों का प्रकोप भी कम किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि थोड़ी सावधानी और समय पर उपचार से पशुधन को बीमारियों से बचाया जा सकता है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकती है।
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