बोले…सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता
विक्टोरिया(सेशेल्स),28 जून 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल 50 वर्षों के नहीं बल्कि इनकी जड़ें अगस्त 1770 तक जाती हैं, जब ‘थेलेमाक’ नामक जहाज से पांच भारतीय पहली बार यहां पहुंचे थे। दुनिया भले ही सेशेल्स को हिंद महासागर स्थित छोटे-छोटे द्वीपों के समूह के रूप में देखती हो लेकिन भारत की नजर में सेशेल्स एक विशाल महासागरीय राष्ट्र है,जिसकी भूमिका हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण है। तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उनके लिए विशेष सम्मान का क्षण है। उन्होंने स्पीकर सिल्वेन लिबेआन, सरकारी कामकाज के नेता बर्नार्ड जॉर्जेस, विपक्ष के नेता, सांसदों और सेशेल्स की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वह भारत के 1.4 अरब लोगों की शुभकामनाएं लेकर आए हैं। साल 2015 में प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली यात्रा सेशेल्स की ही थी और एक दशक बाद यहां लौटने पर उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि हिंद महासागर के लिए भारत के दृष्टिकोण में सेशेल्स की विशेष और केंद्रीय भूमिका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर यहां उपस्थित होकर प्रसन्न हैं। भारत और सेशेल्स का रिश्ता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि यह साझा इतिहास, विश्वास, समुद्री सहयोग और जन-जन के संबंधों पर आधारित है। भारत और सेशेल्स का भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है और दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने के लिए साथ मिलकर काम करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने भारत के ‘म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन’ (महासागर) विजन जिक्र करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण इस विश्वास पर आधारित है कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत और सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोग मानचित्र पर सेशेल्स को एक छोटे द्वीपीय देश के रूप में देखते हैं लेकिन वास्तविकता इससे कहीं बड़ी है। सेशेल्स का समुद्री क्षेत्र लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसलिए इसे छोटा द्वीपीय देश नहीं बल्कि एक बड़ा महासागरीय राष्ट्र कहा जाना चाहिए। ब्लू इकोनॉमी वैश्विक विमर्श का विषय बनने से बहुत पहले सेशेल्स समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और ब्लू बॉन्ड जैसे नवाचारों के माध्यम से दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री सुरक्षा,क्षमता निर्माण,हाइड्रोग्राफी और समुद्री क्षेत्र की निगरानी के क्षेत्र में भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों का सहयोग सुरक्षित और स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। एक समुद्री राष्ट्र की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा से जुड़ी है, एक की समृद्धि दूसरे की समृद्धि को मजबूत करती है और क्षेत्रीय स्थिरता सभी के हित में है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भारत-सेशेल्स संबंधों की गहराई का महत्वपूर्ण प्रतीक है। 50 वर्ष पहले जब सेशेल्स स्वतंत्र हुआ था, तब भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि मित्रता और एकजुटता के प्रतीक के रूप में पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था। आज स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भारतीय नौसेना के आईएनएस इक्षक और आईएनएस तरकश पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में बहुत कुछ बदला है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना नहीं बदली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेशेल्स रक्षा बलों की पेशेवर क्षमता और समर्पण का सम्मान करता है। दशकों से दोनों देशों की सेनाएं, तटरक्षक बल और समुद्री एजेंसियां साथ प्रशिक्षण लेती रही हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मिलकर कार्य करती रही हैं। उन्होंने सेशेल्स की सांस्कृतिक विविधता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की सबसे बड़ी शक्ति उसके लोग हैं।
पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर्यावरण की रक्षा,जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और लंबे समय. तक पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में किए गए काम के लिए मिला है। पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। इससे पहले मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी खाद्य एवं कृषि संगठन ने उन्हें एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्रदान किया था।
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