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राजपुर@आईटीआई और हॉस्टल की जमीन पर विवाद : पट्टा सही या फर्जी? ग्रामीणों का सवाल,

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कार्रवाई का इंतजार,सरपंच के नेतृत्व में चक्काजाम की तैयारी

-संवाददाता-
राजपुर,28 जून 2026 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले के राजपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत करजी के उद्देनुपारा में स्थित आईटीआई भवन एवं हॉस्टल की भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शासकीय भवन की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे बाउंड्रीवॉल निर्माण पर कथित पट्टाधारियों द्वारा आपत्ति जताते हुए न्यायालय से स्थगन आदेश लेने के बाद अब ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत करजी के सरपंच संजय शांडिल्य के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच और निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।
15 साल बाद सामने आया भूमि अधिकार का दावा : सरपंच द्वारा एसडीएम राजपुर को दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उद्देनुपारा स्थित आईटीआई भवन एवं हॉस्टल का निर्माण तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में शासकीय भूमि पर कराया गया था। वर्षों से यहां छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन निर्माण के समय से लेकर अब तक किसी ने भी भूमि पर अपना दावा नहीं किया। सरपंच का आरोप है कि अब जब छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए पंचायत द्वारा ग्राम सभा प्रस्ताव के बाद बाउंड्रीवॉल निर्माण कराया जा रहा था, तभी दुर्ग निवासी मदन सिंह एवं संतोष सिंह द्वारा भूमि पर अधिकार जताते हुए निर्माण रुकवा दिया गया।
दशकों तक खामोशी,निर्माण के वक्त ही क्यों जागा दावा? ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भूमि पर निजी अधिकार था तो आईटीआई भवन और हॉस्टल निर्माण के समय आपत्ति क्यों नहीं की गई? करीब एक दशक से अधिक समय तक शासकीय संस्था संचालित होती रही, तब तक कोई दावा सामने नहीं आया। लेकिन जैसे ही सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू हुआ, अचानक जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
पट्टे की वैधता पर उठ रहे सवाल : सरपंच ने अपने आवेदन में खसरा नंबर 554 और 555 सहित भूमि रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि संबंधित जमीन रिकॉर्ड में तालाब एवं शासकीय उपयोग की भूमि के रूप में दर्ज बताई जा रही है। वहीं सेटलमेंट रिकॉर्ड में इसे छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि भूमि शासकीय उपयोग की थी तो निजी पट्टा किस आधार पर जारी हुआ? पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में तत्कालीन पटवारी और आरआई की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।
जाति प्रविष्टि को लेकर भी सवाल : सरपंच ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पट्टा रिकॉर्ड में जाति कंवर दर्शाई गई है, जबकि पट्टाधारी सामान्य वर्ग से आते हैं। इस बिंदु की भी जांच की मांग की गई है।
एसडीएम के आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समाधान : सरपंच के अनुसार मामले को लेकर 11 मई और 22 मई 2026 को एसडीएम राजपुर को आवेदन देकर शिकायत की गई थी। प्रशासन द्वारा कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। विवादित भूमि पर निर्माण रुके रहने और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन भूमि रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या फिर आईटीआई और हॉस्टल की भूमि का विवाद आगे भी चलता रहेगा।


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