

उद्गम स्थल के कायाकल्प की दिशा में बढ़े ठोस कदम
‘दैनिक घटती-घटना’ की मुहिम और जनभावनाओं के बाद जिला प्रशासन सक्रिय ,कलेक्टर ने किया उद्गम स्थल का निरीक्षण
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,28 जून (घटती-घटना)। जिले की जीवनदायिनी हसदेव नदी के संरक्षण, संवर्धन और पर्यटन विकास को लेकर शुरू हुई जनजागरण की मुहिम अब प्रशासनिक पहल में बदलती नजर आ रही है,शुक्रवार को कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने स्वयं हसदेव नदी के उद्गम स्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से चर्चा की,उनके सुझाव सुने और सभी को हसदेव नदी के संरक्षण की शपथ दिलाई,निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि हसदेव केवल एक नदी नहीं, बल्कि कोरिया जिले की प्राकृतिक,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी शासन और समाज दोनों की है।
’दैनिक घटती-घटना’ ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
हसदेव नदी के संरक्षण को लेकर दैनिक ‘घटती-घटना’ ने हाल ही में ‘हसदो की सिसकियाँ और मिटता वजूद : कंक्रीट के चमकते शहरों के नाम एक रूहानी वसीयत’ शीर्षक से विशेष समाचार प्रकाशित किया था, इस समाचार में उद्गम क्षेत्र में घटते जंगल, कम होता जलस्तर,सूखती सहायक नदियों,अमृतधारा और गौरघाट जैसे पर्यटन स्थलों पर मंडराते संकट तथा बढ़ते तापमान की गंभीरता को विस्तार से प्रकाशित किया गया था, साथ ही नर्मदा नदी की तर्ज पर‘ग्रीन हसदो कॉरिडोर’विकसित करने तथा उद्गम स्थल से अमृतधारा तक दोनों तटों के 500 मीटर क्षेत्र को ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ एवं वृहद वृक्षारोपण क्षेत्र घोषित करने की मांग भी उठाई गई थी।
सुशासन तिहार में भी सौंपा गया था विस्तृत ज्ञापन
समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजन पाण्डेय, जिला उपाध्यक्ष अजय गुप्ता एवं ब्लॉक अध्यक्ष एहसानुल हक ने सुशासन तिहार शिविर के दौरान कलेक्टर कोरिया के नाम एसडीएम सोनहत को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था,ज्ञापन में हसदेव उद्गम स्थल से अमृतधारा तक ग्रीन हसदो कॉरिडोर विकसित करने, दोनों तटों के 500 मीटर क्षेत्र को नो-कंस्ट्रक्शन एवं ट्री-प्लांटेशन जोन घोषित करने,हलफली और बनिया जैसी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्य कराने,वैज्ञानिक अध्ययन कराने तथा व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने की मांग की गई थी।
जनभावनाओं को मिला प्रशासन का सकारात्मक उत्तर-अब जिला प्रशासन द्वारा उद्गम स्थल के निरीक्षण और संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों को जनभावनाओं का सम्मान माना जा रहा है,कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने पंचायत,वन एवं जल संसाधन विभाग की संयुक्त समिति गठित कर सर्वसम्मति से विकास प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं,ताकि हसदेव उद्गम स्थल को पर्यटन,आस्था और पर्यावरण संरक्षण के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
जनभागीदारी से तैयार होगा संरक्षण का मॉडल…
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि हसदेव नदी केवल कोरिया जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की धरोहर है, इसलिए इसके संरक्षण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर विकास योजना तैयार करने का निर्णय संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
कलेक्टर ने दिया व्यापक कार्ययोजना तैयार करने कड़ा निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले की सभी उद्गम नदियों के ऐतिहासिक महत्व का दस्तावेजीकरण करने,विद्यालयों के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने,नदी संरक्षण विषय पर प्रतियोगिताएं कराने तथा उद्गम स्थलों पर जनजागरूकता कार्यक्रम और मेले आयोजित करने के निर्देश दिए, साथ ही कैचमेंट क्षेत्र में वृक्षारोपण,वाटर रिचार्ज,जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण तथा वीबीजीआरएएम,कैम्पा,मनरेगा और डीएमएफ जैसी योजनाओं के माध्यम से व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया।
हसदेव को मिल सकती है नई पहचान
यदि प्रशासन की यह पहल जनभागीदारी और सतत प्रयासों के साथ आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में हसदेव नदी का उद्गम स्थल केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म एवं पर्यावरण संरक्षण मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकता है,वर्षों से उठ रही जनभावनाओं, मीडिया की सकारात्मक भूमिका और प्रशासन की सक्रियता का यह समन्वय हसदेव नदी के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।
नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ा संरक्षण अभियान
हसदेव नदी ने वर्षों से लाखों लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया है, कृषि को जीवन दिया है और प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है,ऐसे में इसका संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का भी दायित्व है,जिला प्रशासन की यह पहल आने वाली पीढि़यों के लिए जल,जंगल और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश देती है,यदि यह अभियान इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा तो हसदेव नदी का उद्गम स्थल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणास्रोत बन सकता है।
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