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रायपुर@छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल…

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2 जुलाई से ग्रेड-पे और सामाजिक सुरक्षा की मांग

रायपुर,24 जून 2026। छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारी एक बार फिर सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। अपनी लंबित मांगों के समर्थन में इन कर्मचारियों ने 2 जुलाई से प्रदेशभर में चरणबद्ध हड़ताल करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन की घोषणा से राज्य के ग्रामीण विकास कार्यों और मनरेगा के तहत चल रही योजनाओं पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। मनरेगा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी महत्वपूर्ण मांगें पूरी नहीं की जातीं, वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। इस आंदोलन में राज्य के विभिन्न जिलों से 12 हजार से अधिक कर्मचारी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
चरणबद्ध होगा आंदोलन का स्वरूप : मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा जारी की गई कार्ययोजना के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन तीन चरणों में संपन्न होगा। आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई को जनपद स्तर से की जाएगी, जहां कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट होंगे। इसके अगले दिन यानी 3 जुलाई को प्रदर्शन का दायरा बढ़ाकर जिला स्तर तक ले जाया जाएगा, जहां जिला मुख्यालयों पर सरकार को अपनी नाराजगी से अवगत कराया जाएगा। अंत में, 4 जुलाई को आंदोलन का समापन राज्य स्तरीय प्रदर्शन के रूप में होगा, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में कर्मचारी रायपुर पहुंचेंगे। कर्मचारियों की यह संगठित रणनीति सरकार पर दबाव बनाने के लिए काफी मानी जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी से प्रशासन सतर्क : छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस चरणबद्ध हड़ताल के बाद भी राज्य सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती है, तो वे आगामी दिनों में ‘उग्र आंदोलन’ का रास्ता अख्तियार करेंगे। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा काम बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना का पूरा तंत्र ठप हो जाएगा। इस अल्टीमेटम के बाद से ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और सरकार के स्तर पर इस स्थिति को संभालने के लिए विचार-विमर्श की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ेगा सीधा असर : मनरेगा के तहत राज्य में बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। यदि 12 हजार से अधिक कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो इसका सीधा असर दैनिक मजदूरी भुगतान, नए कार्यों के आवंटन और चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी पर पड़ेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ी इस सबसे बड़ी योजना का पहिया थमने से आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें अब 2 जुलाई पर टिकी हैं कि क्या सरकार और कर्मचारी संघ के बीच किसी प्रकार का समझौता हो पाता है या फिर प्रदेश में एक लंबा गतिरोध देखने को मिलेगा।
ग्रेड पे और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा
मनरेगा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबे समय से लंबित ‘ग्रेड पे’ का निर्धारण, एक ठोस ‘एचआर पॉलिसी’ का निर्माण और कर्मचारियों के लिए ‘सामाजिक सुरक्षा’ सुनिश्चित करना शामिल है। इन कर्मचारियों का तर्क है कि वे वर्षों से मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं और सेवा शर्तों के मामले में उन्हें लगातार अनदेखा किया जा रहा है। उनका कहना है कि अस्थाई सेवा और असुरक्षित भविष्य के कारण वे मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त करना संभव नहीं है।


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