- यूपी के ट्रांसपोर्टर ने सोनहत थाने में दी शिकायत, कहा- नीलगिरी लोडिंग बताकर बुलाया,
- जेसीबी से भरवाई जा रही थी इमारती लकड़ी
- कट्टे की नोक पर ट्रक में लोड हुई लकड़ी? चालक से मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप
- शिकायत में चार नामजद, वन विभाग के एक कर्मचारी की भूमिका पर भी गंभीर आरोप, पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
रवि सिंह
बैकुंठपुर/सोनहत 23 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में अवैध लकड़ी कारोबार को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वन विभाग की कार्रवाई,कथित लकड़ी माफिया के नेटवर्क और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी ट्रक मालिक हरिओम पाण्डेय द्वारा सोनहत थाना में की गई लिखित शिकायत के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नीलगिरी लकड़ी परिवहन के नाम पर उनके वाहन को कोरिया बुलाया गया, लेकिन मौके पर पहुंचने पर जेसीबी मशीन से इमारती लकड़ी लोड कराई जा रही थी, इतना ही नहीं, चालक और क्लीनर को कथित रूप से कट्टा दिखाकर डराया गया और बाद में वन विभाग की कार्रवाई में केवल वाहन को ही जब्त कर लिया गया।
शिकायतकर्ता हरिओम पाण्डेय ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का निवासी है और परिवहन व्यवसाय से जुड़ा हुआ है, उसके स्वामित्व की ट्रक क्रमांक यूपी-70-एनटी-9299 माल परिवहन का कार्य करती है,शिकायत के अनुसार जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान उसकी पहचान ट्रांसपोर्ट एजेंट विशाल सिंह से हुई थी,जिसने पहले भी नीलगिरी लकड़ी ढुलाई का काम कराया था, आवेदन के अनुसार 11 जून 2026 को विशाल सिंह ने फोन कर बताया कि उसकी गाड़ी घरघोड़ा क्षेत्र में है और सोनहत से अम्बिकापुर तक नीलगिरी लकड़ी पहुंचाने का काम करना है, जिसके एवज में 45 हजार रुपये भाड़ा दिया जाएगा, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी भरोसे पर वाहन को कार्य के लिए भेजा गया और रास्ते में 10 हजार रुपये का डीजल भी भरवाया गया।
शिकायत में नामजद लोगों पर अपराध दर्ज करने की मांग…
हरिओम पाण्डेय ने अपने आवेदन में स्पष्ट कहा है कि उसका और उसके चालक का 12-13 जून की घटना से कोई संबंध नहीं है तथा उन्हें सुनियोजित तरीके से फंसाया गया है, उन्होंने पुलिस से कृष प्रजापति, भागवत यादव,कमलेश तिवारी और विशाल सिंह के विरुद्ध अपराध दर्ज कर जांच करने की मांग की है।
अब सवाल कई…जवाब किसी के पास नहीं…इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं…
यदि नीलगिरी लकड़ी की ढुलाई होनी थी तो इमारती लकड़ी कहां से आई?
जेसीबी मशीन से रात में लकड़ी लोड कराने वाले लोग कौन थे?
चालक को कथित रूप से कट्टा दिखाकर धमकाने की जांच होगी या नहीं?
वन विभाग की कार्रवाई केवल वाहन तक क्यों सीमित रही?
शिकायत में जिन लोगों के नाम हैं,उनसे पूछताछ कब होगी?
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच की जाएगी या नहीं?
क्या कोरिया जिले में सक्रिय किसी बड़े लकड़ी सिंडिकेट का यह हिस्सा है?
चालक से संपर्क टूटा, फिर मिली वाहन जब्ती की सूचना
शिकायत के अनुसार 13 जून को जब वाहन मालिक ने चालक रामदयाल यादव से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल बंद मिला,इससे चिंतित होकर उसने डायल-112 के माध्यम से जानकारी ली। बाद में उसे बताया गया कि उसका ट्रक वन विभाग द्वारा अवैध लकड़ी परिवहन के मामले में जब्त कर लिया गया है,शिकायतकर्ता का कहना है कि समाचार पत्र में प्रकाशित खबर भी उसे व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी गई।
ओदारी गांव पहुंचते ही बदल गई पूरी कहानी
शिकायतकर्ता के अनुसार जब वह 16 जून को बैकुंठपुर पहुंचा और चालक तथा क्लीनर से मुलाकात की तो उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। चालक ने बताया कि बैकुंठपुर पहुंचने पर नीले रंग की एक अर्टिगा कार में सवार तीन व्यक्ति—भागवत यादव, कमलेश तिवारी और कृष प्रजापति—मिले। उन्होंने कहा कि विशाल सिंह ने उन्हें भेजा है और सोनहत के ओदारी गांव चलना है, जहां से नीलगिरी लकड़ी लोड करनी है, आरोप है कि उक्त लोग आगे-आगे कार से चले और ट्रक को पीछे आने के लिए कहा गया,कटगोड़ी चौक के पास कृष प्रजापति ट्रक में बैठ गया और चालक से कहा कि रास्ता उसे नहीं मालूम,इसलिए वह खुद वाहन को गंतव्य तक पहुंचाएगा,इसके बाद देर रात ट्रक को ओदारी गांव के समीप एक स्थान पर ले जाया गया।
नीलगिरी नहीं,जेसीबी से लोड हो रही थी मोटी इमारती लकड़ी
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा यहीं से शुरू होता है, चालक के अनुसार मौके पर पहुंचने के बाद उसने देखा कि वहां नीलगिरी लकड़ी नहीं बल्कि बड़ी मात्रा में मोटी-मोटी इमारती लकड़ी रखी हुई थी, आरोप है कि भागवत यादव,कमलेश तिवारी और कृष प्रजापति जेसीबी मशीन की मदद से लकड़ी ट्रक में भरवाने लगे,जब चालक और क्लीनर ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से उन्हें धमकाया गया,शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कृष प्रजापति ने चालक को गाली-गलौज करते हुए कनपटी पर कट्टा अड़ा दिया और कहा कि यदि लकड़ी लोड नहीं होने दी तो गोली मार देगा,इसके बाद चालक और क्लीनर के साथ मारपीट भी की गई।
वन विभाग पहुंचा, लेकिन असली आरोपी भाग गए?
शिकायत के अनुसार करीब साढ़े तीन बजे वन विभाग की टीम एक बोलेरो वाहन और कुछ मोटरसाइकिलों से मौके पर पहुंची, इसके बाद ट्रक को कब्जे में लेकर बैकुंठपुर डिपो ले जाया गया,आरोप है कि इस दौरान चालक का मोबाइल और वाहन के दस्तावेज भी रख लिए गए, सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया है कि मौके पर मौजूद कथित लकड़ी लोड कराने वाले लोगों से वन विभाग के कर्मचारियों ने अलग से बातचीत की और बाद में उन्हें वहां से जाने दिया,शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वास्तविक आरोपियों को बचाया गया जबकि वाहन को जब्त कर कार्रवाई का केंद्र बना दिया गया।
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड खोल सकते हैं पूरा राज
शिकायतकर्ता का दावा है कि चालक के मोबाइल फोन में विशाल सिंह,भागवत यादव, कमलेश तिवारी और कृष प्रजापति के मोबाइल नंबर एवं बातचीत का रिकॉर्ड मौजूद है, आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले मई 2026 में भी इन्हीं लोगों के माध्यम से नीलगिरी लकड़ी ढुलाई का काम कराया गया था,शिकायतकर्ता ने पुलिस से मोबाइल कॉल डिटेल्स और संपर्क रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
पुलिस जांच से खुलेगा सच
फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं,यदि पुलिस निष्पक्ष जांच कर मोबाइल कॉल डिटेल्स,लोकेशन डेटा,वाहन मूवमेंट और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ करती है तो पूरे घटनाक्रम की कई परतें खुल सकती हैं,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस शिकायत में नामजद लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच आगे बढ़ाएगी,या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा,कोरिया जिले में चर्चाओं का विषय बना यह मामला आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासों की वजह बन सकता है।
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