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खड़गवां (एमसीबी)@ खड़गवां वन परिक्षेत्र में पौधारोपण से पहले उठे सवाल

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ठेकेदारी व्यवस्था से पौधों के नष्ट होने का खतरा, स्थानीय व्यवस्था छोड़ने पर ग्रामीणों ने जताई चिंता
-संवाददाता-
खड़गवां (एमसीबी),15 जून 2026 (घटती-घटना)।
वन विभाग द्वारा आगामी पौधारोपण अभियान की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, लेकिन अभियान शुरू होने से पहले ही परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं,वन परिक्षेत्र खड़गवां में नर्सरी से विभिन्न कम्पार्टमेंटों और रोपण स्थलों तक पौधों की ढुलाई के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों, पर्यावरण प्रेमियों और वन कार्यों से जुड़े जानकारों ने चिंता व्यक्त की है, उनका कहना है कि यदि पौधों की ढुलाई पूरी तरह ठेकेदारी व्यवस्था के भरोसे छोड़ दी गई तो पौधारोपण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और बड़ी संख्या में पौधों के नष्ट होने की आशंका बढ़ सकती है।
स्थानीय व्यवस्था से अब तक सुरक्षित पहुंचते थे पौधे
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों में वन विभाग के स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छोटे वाहनों और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पौधों को सीधे रोपण स्थलों तक पहुंचाते रहे हैं,जंगलों के भीतर स्थित कठिन और दुर्गम स्थानों तक पौधों को सावधानीपूर्वक ले जाया जाता था,जिससे उनकी जड़ों और शाखाओं को नुकसान नहीं पहुंचता था,स्थानीय लोगों का मानना है कि क्षेत्र की परिस्थितियों को समझने वाले कर्मचारियों की निगरानी में पौधों की ढुलाई अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित रहती थी और पौधों के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती थी।
बड़े वाहन सड़क तक पहुंचेंगे, फिर कौन ले जाएगा पौधे अंदर?
जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता यह है कि निविदा प्राप्त करने वाले ठेकेदार कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए बड़े वाहनों का उपयोग करेंगे,लेकिन वन क्षेत्रों के कई रोपण स्थल ऐसे हैं जहां तक बड़े ट्रक या भारी वाहन नहीं पहुंच सकते, ऐसी स्थिति में पौधों को सड़क किनारे उतारकर बाद में छोटे साधनों या श्रमिकों के माध्यम से अंदर पहुंचाना पड़ेगा। इस दोहरी प्रक्रिया के दौरान पौधों के टूटने,जड़ों के क्षतिग्रस्त होने और धूप में लंबे समय तक पड़े रहने से उनके सूखने का खतरा बढ़ सकता है।
हर पौधा महत्वपूर्ण, करोड़ों की योजना पर पड़ सकता है असर
वन विभाग हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण अभियान चलाता है,इन अभियानों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं,बल्कि उन्हें जीवित रखना और भविष्य का हरित आवरण तैयार करना होता है,विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवहन के दौरान पौधों की उचित देखभाल नहीं हुई तो पौधारोपण की सफलता दर प्रभावित हो सकती है। इससे न केवल सरकारी धन का नुकसान होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाए रखने की मांग…
क्षेत्रवासियों और वन कार्यों से जुड़े लोगों ने मांग की है कि पौधों की ढुलाई की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर ही कराई जाए, उनका कहना है कि स्थानीय वाहन चालकों, श्रमिकों और वन कर्मचारियों की निगरानी में पौधों को सुरक्षित रूप से रोपण स्थलों तक पहुंचाया जा सकता है, ग्रामीणों का तर्क है कि स्थानीय लोगों को क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, रास्तों और मौसम की बेहतर जानकारी होती है, जिससे पौधों के नुकसान की संभावना कम रहती है।
अब विभाग के फैसले पर टिकी निगाहें…
पौधारोपण अभियान शुरू होने से पहले उठे इन सवालों ने वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्षेत्रवासियों का कहना है कि पौधे केवल कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर भी हरे-भरे दिखने चाहिए, ऐसे में परिवहन व्यवस्था का निर्णय अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, अब सभी की निगाहें वन विभाग पर टिकी हैं कि वह स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आशंकाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है या नहीं, यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं बनाई गई तो हरियाली बढ़ाने का सपना कहीं कागजों तक सीमित होकर न रह जाए।


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