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नई दिल्ली@अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी,19 जून को दस्तखत

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होर्मुज फिर खुलेगा,ट्रम्प बोले- दुनिया के जहाजो इंजन चालू करो,तेल को बहने दो
नई दिल्ली,15 जून 2026। अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर राजी हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता हो गया है। ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ कई महीनों की लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बना ली है और एमओयू को अंतिम रूप दे दिया गया है। ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा।
उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी। उन्होंने लिखा, ‘दुनिया के जहाजो, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’ इधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पीस डील पर दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच यह पहली हाई लेवल की बैठक होगी।
इजराइल का यूएस-ईरान शांति समझौते को मानने से इनकार…नेतन्याहू के मंत्री बोले- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे,हम अमेरिका के गुलाम नहीं…
इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी कहा है कि,उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। लेबनान,सीरिया और गाजा में बनाए गए सिक्योरिटी जोन में इजराइली सेना अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी। वहीं, इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने पीस डील पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘हम अमेरिका के गुलाम नहीं है। इजराइल एक आजाद देश हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता।‘
कांग्रेस ने अमेरिका-ईरान के बीच
अंतरिम शांति समझौते का किया स्वागत

कांग्रेस ने अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते का स्वागत किया है। कांग्रेस ने कहा है कि भले ही इस समझौते की पूरी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सबको उम्मीद है कि दोनों देशों के साथ इजराइल भी इस अंतरिम समझौते का पालन करेंगे। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोमवार को एक्स पोस्ट में कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के फिर से खुलने से भारत को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद संरचनात्मक समस्याएं जल्द ही दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि ये चिंताएं पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध से पहले की हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा के सिर्फ दो दिन बाद शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि रुपया एक वर्ष से अधिक समय से काफी दबाव में है और डॉलर की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।


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