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कोरिया@ पहली बारिश में बह गई नहर

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  • आश्रम में मिली गली हुई ईंटें
  • जिला पंचायत अध्यक्ष के निरीक्षण में खुली विकास कार्यों की परतें
  • ग्रामीणों की शिकायतों ने खींचा ध्यान,मौके पर पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित राम पैकरा तो सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
  • पहली बारिश में बह गया विकास! कागजों में मजबूत,जमीन पर कमजोर,निर्माण कार्यों की हकीकत देखकर भड़के जिला पंचायत अध्यक्ष
  • ग्रामीणों की शिकायत निकली सही,निरीक्षण में उजागर हुई गुणवत्ता विहीन निर्माण की कहानी
  • विकास के नाम पर खेल? पहली बारिश में टूटी नहर, आश्रम निर्माण में मिलीं गंभीर खामियां
  • जब अध्यक्ष पहुंचे मैदान में,खुल गई निर्माण एजेंसियों और निरीक्षण तंत्र की असली तस्वीर
  • सरकारी धन से बना ढांचा पहली बारिश में ढहा, जिला पंचायत अध्यक्ष ने दिखाई सख्ती
  • निरीक्षण फाइलों में हुआ या जमीन पर? बहती नहर और गली ईंटों ने खड़े किए बड़े सवाल
  • विकास की दीवार पहली बारिश में ढही, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज…


-रवि सिंह-
कोरिया,13 जून 2026 (घटती-घटना)।
विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, सरकारी फाइलों में योजनाएं स्वीकृत होती हैं,टेंडर जारी होते हैं,भुगतान होता है और कागजों में विकास की चमचमाती तस्वीर तैयार कर दी जाती है, लेकिन जब वही विकास कार्य पहली बारिश में बहने लगें,दीवारें खड़ी होने से पहले झुक जाएं और निर्माण सामग्री हाथ लगाने भर से टूटने लगे, तब सवाल केवल निर्माण एजेंसियों पर नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र पर खड़े होते हैं,कोरिया जिले में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित राम पैकरा स्वयं निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने निकले, निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने ग्रामीणों की शिकायतों को सही साबित कर दिया और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
शिकायतों का अंबार,तब मैदान में उतरे अध्यक्ष
पिछले कुछ समय से विभिन्न गांवों से जिला पंचायत अध्यक्ष को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य गुणवत्ताविहीन तरीके से किए जा रहे हैं,ग्रामीणों का आरोप था कि निर्माण सामग्री में कटौती की जा रही है, मानकों का पालन नहीं हो रहा और जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, इन्हीं शिकायतों की वास्तविकता जानने के लिए शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित राम पैकरा ने औचक निरीक्षण का निर्णय लिया। उनके साथ स्थानीय ग्रामीण और संबंधित क्षेत्र के लोग भी मौजूद रहे।
नारायण चौक की नहर बनी जांच का पहला केंद्र-निरीक्षण का पहला पड़ाव आमापारा ग्राम का नारायण चौक रहा, जहां हाल ही में नहर निर्माण का कार्य पूरा किया गया था, यह नहर किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होना है, लेकिन मौके पर पहुंचते ही जिला पंचायत अध्यक्ष के सामने जो दृश्य था, उसने सभी को हैरान कर दिया, करीब पंद्रह दिन पहले बनी नहर की दीवार कई स्थानों पर टूट चुकी थी। कहीं प्लास्टर उखड़ चुका था तो कहीं पूरी दीवार ही धराशायी दिखाई दी, पहली ही बारिश में नहर का यह हाल देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी दिखाई दी,ग्रामीणों का कहना था कि निर्माण के दौरान ही उन्होंने कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया, अब जब पहली बारिश में ही नहर की दीवारें जवाब दे गईं तो उनकी आशंकाएं सही साबित होती नजर आ रही हैं।
पहली बारिश में बह गया विकास नहर की टूटी हुई दीवारें किसी तकनीकी रिपोर्ट की मोहताज नहीं थीं, वे स्वयं बता रही थीं कि निर्माण में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है,स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय यह रहा कि जिस निर्माण को वर्षों तक किसानों की सेवा करनी थी, वह पहली ही बारिश की परीक्षा में असफल हो गया,ग्रामीणों का कहना था कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और सरकारी धन भी व्यर्थ चला जाएगा।
किसानों की जीवनरेखा पर लापरवाही क्यों?-नहर निर्माण कार्य केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि किसानों की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है, सिंचाई सुविधाओं के अभाव में खेती प्रभावित होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है,ऐसे में यदि नहर निर्माण में लापरवाही बरती गई है तो इसका प्रभाव केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि किसानों की आजीविका पर भी पड़ेगा,यही कारण है कि निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष ने इसे गंभीर विषय बताते हुए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
आश्रम निर्माण में भी मिलीं गंभीर खामियां-नहर निरीक्षण के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष ग्राम झरनापारा पहुंचे, जहां धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत कन्या आश्रम सत्तीपारा में अतिरिक्त कक्ष निर्माण का कार्य चल रहा है, यहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं मिली,निर्माण स्थल पर रखी गई कई ईंटें पहले से ही क्षतिग्रस्त और गली हुई अवस्था में मिलीं,कई ईंटों की मजबूती इतनी कमजोर दिखाई दी कि उन्हें हाथ से ही आसानी से तोड़ा जा सकता था, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता देखकर जिला पंचायत अध्यक्ष ने नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यस्थलों पर नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
सोशल मीडिया में वायरल हुई तस्वीरें-निरीक्षण के दौरान ली गई तस्वीरें सोशल मीडिया में भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं,तस्वीरों में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठते दिखाई दे रहे हैं, लोग पूछ रहे हैं कि यदि जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर ऐसी स्थिति देख सकते हैं तो संबंधित विभागीय अधिकारियों और तकनीकी अमले की नजर इन खामियों पर पहले क्यों नहीं पड़ी?
निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल-पूरा मामला केवल निर्माण एजेंसियों तक सीमित नहीं है, इस निरीक्षण ने विभागीय निरीक्षण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं,ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह जाता है,फाइलों में गुणवत्ता प्रमाणित कर दी जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति अलग होती है, यदि समय-समय पर ईमानदारी से निरीक्षण किया जाता तो नहर पहली बारिश में नहीं बहती और आश्रम निर्माण में खराब सामग्री का उपयोग भी नहीं होता।
जनप्रतिनिधि बने निरीक्षक, व्यवस्था पर सवाल-ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी रही कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष को स्वयं गांव-गांव जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचनी पड़ रही है, तो संबंधित विभागों की निगरानी प्रणाली आखिर क्या कर रही है? यह स्थिति बताती है कि कहीं न कहीं जवाबदेही का अभाव है और विकास कार्यों की निगरानी में गंभीर कमियां मौजूद हैं।
अब कार्रवाई की उम्मीद…
निरीक्षण के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि उनकी शिकायतों पर अब गंभीरता से कार्रवाई होगी, लोग चाहते हैं कि केवल जांच की घोषणा न हो बल्कि दोषी एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी हो,क्योंकि विकास कार्यों में होने वाली लापरवाही का नुकसान केवल सरकारी धन का नहीं होता, बल्कि जनता के भरोसे का भी होता है,पहली बारिश में बह चुकी नहर और आश्रम में मिली गली हुई ईंटें केवल निर्माण कार्यों की कमजोरी नहीं दिखातीं, बल्कि यह भी बताती हैं कि यदि निगरानी कमजोर हो जाए तो विकास के नाम पर खड़ी की गई इमारतें कितनी जल्दी ढह सकती हैं, अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन कितना सख्त रुख अपनाता है और क्या वास्तव में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंच पाती है।
अध्यक्ष ने मौके से लगाई अधिकारियों को फटकार…
स्थिति को गंभीर मानते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित राम पैकरा ने तत्काल संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया,उन्होंने निर्माण कार्य की जांच कराने तथा जांच पूर्ण होने तक भुगतान रोकने का निर्देश दिया,ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कराया गया और पूरी स्थिति का दस्तावेजीकरण किया गया,अध्यक्ष ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि मामले को जिला पंचायत की सामान्य सभा में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा,उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी एजेंसी को घटिया निर्माण कर भुगतान लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


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