
- नवविवाहिताओं के गले में सम्मान या सवालों की माला?
- 179 जोड़ों के सामूहिक विवाह के चार महीने बाद उठा विवाद,
- कांग्रेस ने कलेक्टर से मांगी उच्चस्तरीय जांच
-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़,13 जून 2026 (घटती-घटना)। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सम्मान और सहायता पहुंचाना होता है,लेकिन जब उन्हीं योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगें तो चर्चा सिर्फ योजना की नहीं,बल्कि पूरे सिस्टम की होने लगती है,सरगुजा संभाग के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित किए गए कथित नकली मंगलसूत्र का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवविवाहित महिलाओं को जो मंगलसूत्र वितरित किए गए थे,उनमें से कई कथित रूप से चांदी के बजाय गिलट के निकले हैं,यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं होगा,बल्कि उन महिलाओं की भावनाओं और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय भी बन जाएगा, जिन्हें सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और सम्मान के नाम पर यह उपहार दिया था।
फरवरी में हुआ था सामूहिक विवाह, जून में उठे सवाल…
जानकारी के अनुसार 10 फरवरी को विकासखंड खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 179 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया था,इस आयोजन में नवविवाहित जोड़ों को शासन की ओर से विभिन्न सामग्री प्रदान की गई थी,जिनमें मंगलसूत्र भी शामिल था,अब कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें जो मंगलसूत्र दिए गए थे, वे चांदी के नहीं बल्कि गिलट के हैं। महिलाओं द्वारा सार्वजनिक रूप से मंगलसूत्र दिखाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित हो रहे हैं,जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

बेटियों के सम्मान और विश्वास से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता,मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में चांदी के नाम पर नकली या घटिया मंगलसूत्र बांटना बेहद शर्मनाक है,यह सिर्फ वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि हमारी गरीब बेटियों के स्वाभिमान पर चोट है, भाजपा सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग तुरंत इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराए। जब तक जांच पूरी न हो, जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए और पीडि़त बेटियों को असली चांदी के मानक मंगलसूत्र वापस दिए जाएं, अगर सरकार ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो बेटियों के न्याय के लिए हम सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेंगे।
— गुलाब कमरो (पूर्व विधायक)
सवाल सिर्फ मंगलसूत्र का नहीं, भरोसे का भी…
भारतीय समाज में मंगलसूत्र केवल एक आभूषण नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन और सामाजिक सम्मान का प्रतीक माना जाता है, ऐसे में यदि सरकारी योजना के तहत वितरित सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो स्वाभाविक रूप से लोगों का भरोसा भी प्रभावित होता है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से किसी सामग्री को चांदी का बताकर वितरित किया गया और बाद में वह गिलट की निकली तो यह गंभीर जांच का विषय है,वहीं यदि शुरू से ही सामग्री का स्वरूप स्पष्ट था तो फिर भ्रम की स्थिति कैसे बनी, इसका उत्तर भी संबंधित विभाग को देना होगा।
विपक्ष ने सरकार को घेरा…
कांग्रेस नेता सौरव मिश्रा ने मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि महिला सम्मान और सुशासन के दावे करने वाली सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई, उन्होंने अपने बयान में कहा कि जिस सरगुजा संभाग से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आते हैं, जहां महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का राजनीतिक क्षेत्र है और जिस जिले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विधायक रेणुका सिंह का प्रभाव क्षेत्र है, वहां यदि महिलाओं से जुड़ी योजना में इस प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो यह निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है,कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, साथ ही खरीदी प्रक्रिया से लेकर वितरण तक की पूरी श्रृंखला की जांच सार्वजनिक रूप से सामने लाई जानी चाहिए।
महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका पर नजर…
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से किया जाता है, इसलिए पूरे मामले में विभाग की भूमिका भी चर्चा में है,जानकारों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करना आवश्यक होगा,सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, विशेषकर उन योजनाओं में जो सीधे तौर पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों से जुड़ी हों।
जांच की मांग हुई तेज…
सौरव मिश्रा ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए,उन्होंने कहा है कि खरीदी,गुणवत्ता परीक्षण और वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए,साथ ही उन्होंने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने की भी मांग की है।
अब सबकी नजर प्रशासन पर…
फिलहाल मामला आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच है, महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी,लेकिन इतना तय है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसे संवेदनशील कार्यक्रम में उठे इस विवाद ने प्रशासन और सरकार दोनों को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल गलतफहमी है,गुणवत्ता में कमी है या फिर वास्तव में कहीं कोई गंभीर अनियमितता हुई है? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा,तब तक नवविवाहित महिलाओं के गले में लटका यह मंगलसूत्र सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि कई सवालों का प्रतीक बन चुका है।
खरीदी प्रक्रिया पर भी उठ रहे प्रश्न
विवाद सामने आने के बाद अब कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर मंगलसूत्र की खरीदी किस एजेंसी या आपूर्तिकर्ता से की गई? सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किस स्तर पर हुआ? क्या वितरण से पहले कोई तकनीकी या गुणवत्ता जांच कराई गई थी? यदि कराई गई थी तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
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