रायपुर,13 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने नए शिक्षा सत्र से राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में राष्ट्रगान,राष्ट्रगीत, राज्यगीत तथा सरस्वती वंदना का नियमित आयोजन अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए सभी विद्यालयों को निर्धारित व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक चेतना के विकास के उद्देश्य से विद्यालयों में प्रतिदिन निर्धारित समय-सारणी के अनुसार विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर आयोजित प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान,राष्ट्रगीत, दीप मंत्र,सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्याह्न भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक वाचन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
16 जून से खुलेंगे स्कूल
छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल 16 जून से ही खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार (12 जून) को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 16 जून 2026 से पढ़ाई शुरू होगी। आदेश के मुताबिक, प्रदेश में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक गर्मी छुट्टी घोषित किया गया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 का नियमित संचालन 16 जून से शुरू किया जाएगा। इससे पहले गर्मी के कारण स्कूल खुलने में देरी की अटकलें लगाई जा रही थी।
तिलक लगाकर होगा बच्चों का स्वागत
स्कूल खुलने के साथ ही एडमिशन फेस्ट होगा। तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया जाएगा। नए बच्चों के एडमिशन के लिए गांवों-शहरों में मुनादी की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने स्पेशल प्लान तैयार किया गया है। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स का सम्मान किया जाएगा। वहीं प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार फ्री किताबें दी जाएगी।
नई व्यवस्था पर आपत्ति…
कांग्रेस प्रदेश संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों के लिए दिन में 3 अलग-अलग समय पर कई मंत्रों और धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य कर दिया है। आखिर सरकारी स्कूलों में इस तरह की अनिवार्यता की जरूरत क्यों है।
हर धर्म और समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं…
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल किसी एक विचारधारा या धर्म के नहीं हैं। यहां सभी धर्मों, समुदायों और वर्गों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य करना उचित नहीं है।
आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग…
कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। पार्टी ने सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक और वैचारिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए।
गायत्री मंत्र में विश्व कल्याण का संदेश
वहीं,कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि जब-जब सनातन की बात आती है, कांग्रेस नेताओं को परेशानी होने लगती है। गायत्री मंत्र में विश्व कल्याण का संदेश है, फिर भी कांग्रेस को इससे आपत्ति है।
आदेश में क्या लिखा है…
स्कूल शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र 2026-27 से सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों के ज्ञान के विकास और उन्हें अपनी संस्कृति से परिचित कराने के लिए प्रार्थनाओं का आयोजन करने का निर्देश दिया है। 12 जून को जारी आदेश में विभाग ने सभी स्कूलों को रोजाना प्रार्थना कराना सुनिश्चित करने को भी कहा है।
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