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HIGH COURT ON POLICE : अपराध की जांच पर दें ध्यान, प्राइवेट रिकवरी एजेंट की भूमिका न निभाएं

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डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल


बिलासपुर,11 जून 2026। हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि पुलिस निजी वसूली एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकती।
डिवीजन बेंच ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 बीनएसएस के नियमों का उल्लंघन कर एक फाइनेंस कंपनी एनबीएफसी के बैंक खाते में राशि ‘होल्ड’ करने के पुलिस के आदेश को खारिज कर दिया है। नई दिल्ली की ‘ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड एनबीएफसी कंपनी से जुड़ा है। कंपनी उद्योगों और छोटे व्यवसायियों को लोन देने का काम करती है। कंपनी का एक खाता कोटक महिंद्रा बैंक रायपुर ब्रांच में संचालित है, जिसमें देशभर के कर्जदारों की ईएमआई के तौर पर प्रतिदिन 12 से 15 करोड़ रुपए आते हैं।

धोखाधड़ी का केस दर्ज
कंपनी ने रायपुर की एक फर्म ‘श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड’ को कच्चा माल खरीदने के लिए करीब 10 करोड़ रुपए की लोन सुविधा दी थी। बाद में श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट्स का माल सप्लाई करने वाली एक अन्य कंपनी ओएफबी टेक से वजन में धोखाधड़ी को लेकर विवाद हो गया। जिसके बाद मंदिर हसौद थाना में करीब 6.9 लाख रुपए जो बाद में 43.38 लाख रुपये आंकी गई की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
कंपनी न तो आरोपी और ना संबंध
मामले की जांच करते हुए मंदिर हसौद पुलिस ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के आक्सीजो फाइनेंस कंपनी के खाते से लेनदेन पर पूरी तरह रोक लगा दी। बाद में कंपनी के 53 करोड़ 47 लाख 17 हजार 835 रुपए की राशि को ‘होल्ड’ पर डाल दिया। बाद में जब मामला बढ़ा, तो पुलिस ने इसे घटाकर 43.38 लाख रुपए होल्ड रखने का नया आदेश जारी किया। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ आक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिन्हा और विवेक चोपड़ा ने पैरवी की।

रोजमर्रा का बिजनेस ठप
इसमें बताया गया कि, कंपनी न तो इस एफआईआर में आरोपी है और न ही कंपनी का माल की शॉर्ट-सप्लाई या धोखाधड़ी से कोई सीधा संबंध है। पुलिस ने महज एक सिविल, कमर्शियल विवाद में दबाव बनाने के लिए कंपनी का पूरा खाता फ्रीज कर दिया। जिससे उसका रोजमर्रा का बिजनेस ठप हो गया। यह कार्रवाई पूरी तरह से मनमानी, दुर्भावनापूर्ण और व्यापार करने के संवैधानिक अधिकार का हनन है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और बीएनएसएस की धाराओं की स्पष्ट व्याख्या की।
53 करोड़ से अधिक होल्ड कर देना पूरी तरह से असंगत
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, न कि किसी कमर्शियल विवाद में एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए ‘प्राइवेट रिकवरी एजेंट’ की तरह काम करना। कोर्ट ने कहा है, एफआईआर में शुरुआती नुकसान सिर्फ कुछ लाख रुपए का बताया गया था, उसके एवज में जनता के पैसे का प्रबंधन करने वाली एक विनियमित संस्था के 53 करोड़ से अधिक रुपए होल्ड कर देना पूरी तरह से असंगत, अतार्किक और दंडात्मक है। डिवीजन बेंच ने याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस द्वारा जारी 13 अप्रैल 2026 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत राशि को होल्ड पर रखा गया था।
कोटक महिंद्रा बैंक और पुलिस को दी हिदायत, बिना शर्त हटाएं होल्ड
डिवीजन बेंच ने कोटक महिंद्रा बैंक को आदेश दिया है, वह याचिकाकर्ता कंपनी के बैंक खाते से सभी तरह के होल्ड या प्रतिबंध तुरंत और बिना शर्त हटाए, ताकि कंपनी अपने खातों का सुचारू रूप से संचालन कर सके। कोर्ट ने कहा, यदि पुलिस को लगता है कि कोई राशि अपराध से जुड़ी है, तो वे कानून सम्मत तरीके से मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 107 बीएनएसएस के तहत जा सकते हैं, न कि अपनी मर्जी से मनमाना फैसला ले सकते हैं।


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