कोल खदान विस्तार से ऐतिहासिक धरोहर और पर्यावरण पर खतरे की आशंका, संरक्षण के लिए एकजुट होने का आह्वान
उदयपुर,10 जून 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान मानी जाने वाली रामगढ़ पहाड़ी के संरक्षण और संवर्धन को लेकर 13 जून को एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों से शामिल होने की अपील की गई है।
समिति के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल खदान परियोजना से रामगढ़ पहाड़ी के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही क्षेत्र के वन, जैव विविधता और लाखों पेड़ों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता व्यक्त की गई है।
समिति का कहना है कि रामगढ़ पहाड़ी केवल एक प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल है। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने वनवास काल के दौरान इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था, जिसके कारण यह स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वन संपदा, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता और जनभागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आयोजित परिचर्चा में संभावित प्रभावों, संरक्षण के उपायों तथा आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
यह परिचर्चा 13 जून 2026 को दोपहर 12 बजे रामगढ़, उदयपुर में आयोजित होगी। समिति ने क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों एवं जनप्रतिनिधियों से कार्यक्रम में शामिल होकर रामगढ़ संरक्षण के प्रयासों को मजबूती प्रदान करने की अपील की है।
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