
जैविक खेती को बढ़ावा देने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किसानों से किया आह्वान
-संवाददाता-
खड़गवां,10 जून 2026 (घटती-घटना)। कृषिविकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग,एमसीबी द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत जैविक खेती मिशन योजनांतर्गत जिला स्तरीय कृषक सम्मेलन का आयोजन खड़गवां में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में जिलेभर से 300 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, इसके बाद किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव और जैविक खेती के लाभों से अवगत कराया।
जैविक खेती समय की मांग : मंत्री जायसवाल- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, लेकिन पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं, उन्होंने कहा कि बेमौसम पैदा होने वाली सब्जियां और रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। ऐसे में जैविक खेती और जैविक खाद को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
नैनो डीएपी और सनई की खेती पर जोर- मंत्री ने किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी एक बोतल लगभग 80 डिसमिल भूमि के लिए पर्याप्त होती है, उन्होंने किसानों से सनई (सन) की खेती अपनाने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कृषि महाविद्यालय से मिलने वाले लाभ बताए- स्वास्थ्य मंत्री ने कृषि महाविद्यालयों द्वारा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं तथा लागत कम कर सकते हैं।
300 से अधिक किसान हुए शामिल- सम्मेलन में कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुनील असमेद सोनवानी, भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष रामप्रताप गुप्ता, नगर पंचायत लेदरी अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह राणा सहित कई जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं जिलेभर से आए 300 से अधिक किसान उपस्थित रहे, कार्यक्रम के दौरान ‘तुहर लाईका, तुहर दुआरी, तुहर कमी श्याम बिहारी’ संदेश भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक कर पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देना रहा।
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