10 जून, 2026। देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा हाल ही में चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा किए जाने के बाद अब केंद्र की मोदी कैबिनेट में एक बहुत बड़े फेरबदल की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं. राजनीतिक सूत्रों और अंदरूनी चर्चाओं के हवाले से खबर है कि आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव कर सकते हैं. इस संभावित फेरबदल में मोदी सरकार के कुछ मौजूदा कद्दावर मंत्रियों की छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है. इन मुक्त किए गए नेताओं को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संगठन में नई, मजबूत और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपकर मैदान में उतारा जाएगा.
नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा और मंत्रियों को सांगठनिक कमान
दरअसल, इसी साल जनवरी महीने में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने वाले नितिन नबीन इस महीने के अंत तक अपनी नई राष्ट्रीय टीम और पदाधिकारियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं. बीजेपी आलाकमान का मुख्य उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है, और इसी रणनीति के तहत कैबिनेट में इस बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की जा रही है. हाल ही में पार्टी ने पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर सबको चौंकाया है. इसी क्रम में दिल्ली बीजेपी की कमान केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को सौंपी गई है, जबकि इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया जा चुका है.
18 जून को राज्यसभा की 25 सीटों पर वोटिंग
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच आगामी 18 जून को राज्यसभा की कुल 24 नियमित सीटों और एक खाली हुई उपचुनाव वाली सीट के लिए मतदान होना तय हुआ है. संबंधित राज्यों में विधायकों की मौजूदा संख्या बल के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी का कम से कम 10 महत्वपूर्ण सीटों पर एकतरफा जीतना तय माना जा रहा है. इन पक्की सीटों में पश्चिमी राज्य गुजरात की 4, राजस्थान की 2, मध्य प्रदेश की 2, पूर्वोत्तर के मणिपुर की 1 और अरुणाचल प्रदेश की 1 सीट प्रमुख रूप से शामिल है. इन नियमित सीटों के अतिरिक्त, ओडिशा राज्य की खाली हुई उपचुनाव वाली एकल सीट पर भी सत्ताधारी दल बीजेपी की जीत पूरी तरह से पक्की मानी जा रही है, जिससे उच्च सदन में पार्टी की स्थिति और मजबूत होगी.
रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का पत्ता कटा
इस चुनाव चक्र में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि मौजूदा मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को पार्टी ने दोबारा राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया है, जबकि उनका वर्तमान संसदीय कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने जा रहा है. राजनैतिक सूत्रों का कहना है कि रवनीत सिंह बिट्टू को अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य की राजनीति में कोई बहुत बड़ी और सक्रिय जिम्मेदारी दी जा सकती है. पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों और वहां मिली जीत से उत्साहित बीजेपी का अगला पूरा फोकस अब सीमावर्ती राज्य पंजाब पर टिक गया है.
शिरोमणि अकाली दल से अलग
बीजेपी ने अपनी इसी चुनावी रणनीति के तहत हाल ही में एक प्रमुख सिख चेहरा केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. इस नियुक्ति से पार्टी ने साफ और कड़े संकेत दे दिए हैं कि बीजेपी आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव अपने पुराने सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल के बैसाखियों के बिना, पूरी तरह अकेले अपने दम पर लड़ेगी. पार्टी इस बार पंजाब में कानून-व्यवस्था की बदहाली, बढ़ते नशे के कारोबार, अवैध धर्मांतरण और राज्य में ठप पड़े विकास कार्यों को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर आम आदमी पार्टी (आप) को सत्ता से बेदखल करने की पूरी तैयारी में जुट गई है. इस बड़ी रणनीति में पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को भी कोई बेहद अहम भूमिका दी जा सकती है.
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