बिलासपुर,08 जून 2026। व्यापारिक और व्यक्तिगत लेनदेन से जुड़े विवादों को आपराधिक मामलों का स्वरूप देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने स्पष्ट कहा है कि केवल उधार ली गई रकम वापस नहीं करना अपने आप में ‘ठगी’, ‘आपराधिक विश्वासघात’ या ‘आपराधिक षड्यंत्र’ की श्रेणी में नहीं आता। मामला बिल्हा क्षेत्र के व्यापारी संतोष बंसल से जुड़ा है, जो स्टील और सीमेंट कारोबार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके परिचित संदीप गर्ग और उनकी पत्नी प्रीति गर्ग ने वर्ष 2022 में गंभीर बीमारी और व्यवसायिक जरूरतों का हवाला देकर उनसे 25 लाख रुपये उधार लिए थे।
वादी के अनुसार आरोपितों ने भरोसा दिलाया था कि संपत्ति बेचकर पूरी रकम लौटा दी जाएगी। बाद में ऐसा नहीं किया गया। मार्च 2024 में संदीप गर्ग का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी पत्नी प्रीति गर्ग ने कथित रूप से बाकी रकम लौटाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक बाद में परिवार की ओर से 1.65 लाख रुपये की आंशिक राशि वापस भी की गई, लेकिन शेष 23.35 लाख रुपये की वसूली नहीं होने पर व्यापारी ने पुलिस और अदालत का रुख किया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बिल्हा ने सितंबर 2025 में परिवाद खारिज करते हुए कहा था कि मामला धन-वसूली और लेनदेन से संबंधित है, इसलिए इसकी प्रकृति दीवानी है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए विशेष न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। विशेष अदालत ने सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केवल वादा पूरा नहीं होने से यह साबित नहीं होता कि शुरुआत से ही धोखाधड़ी या बेईमानी का इरादा था। आपराधिक अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि आरोपित ने लेनदेन की शुरुआत से ही धोखा देने की योजना बनाई थी। TAGSउधार की रकम नहीं लौटाना अपने आप में ठगी नहींकोर्टबिलासपुरबिलासपुर से जुड़ी खबर
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