
- गुणवत्ता जांच ने बढ़ाई उम्मीदें…अब गोबरी नदी पुल पर भी निगाहों का इंतजार…
- कागज नहीं,जमीन पर जांच…कलेक्टर रेना जमील ने खुद खोदकर देखी सड़क की गुणवत्ता…
- सड़कों की परतें नापीं,कॉम्पैक्शन जांचा… कलेक्टर का सख्त रुख देख ठेकेदारों में हलचल…
- निर्माण में समझौता नहीं : तड़के निरीक्षण पर निकलीं कलेक्टर,अधिकारियों को दिया कड़ा निर्देश
- गुणवत्ता की पड़ताल के लिए मैदान में उतरीं कलेक्टर, अब गोबरी नदी पुल पर भी जनता की उम्मीदें…
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर 01 जून 2026 (घटती-घटना)। जिले में लंबे समय से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों के बीच सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील का तड़के सुबह सड़कों पर उतरकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना चर्चा का विषय बना हुआ है,आमतौर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन फाइलों, रिपोर्टों और बैठकों तक सीमित रह जाता है, लेकिन इस बार कलेक्टर स्वयं सुबह 6 बजे लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण करने पहुंचीं, निरीक्षण के दौरान जिस तरह सड़क की चौड़ाई,ढलान, एलाइनमेंट और कॉम्पैक्शन की जांच की गई, यहां तक कि सड़क की खुदाई कर परतों की मोटाई भी जांची गई, उससे लोगों के बीच यह संदेश गया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन इस बार गंभीर दिखाई दे रहा है।
कलेक्टर ने मौके पर जांची सड़कों की असलियत-सूरजपुर,प्रेमनगर और रामानुजनगर क्षेत्र में हुए इस सघन निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं किया बल्कि निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की भी जांच कराई, सड़क की प्रत्येक परत की मोटाई मानक अनुरूप है या नहीं, इसके लिए मौके पर खुदाई कराई गई, कॉम्पैक्शन की जांच हुई, जल निकासी की व्यवस्था देखी गई और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा, निर्माण एजेंसियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों को यह भी निर्देशित किया गया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और तकनीकी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो।
15 जून से पहले अधिकाधिक कार्य पूर्ण करने क ा निर्देश
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले अधिक से अधिक निर्माण कार्य पूरे किए जाएं, उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, अच्छी सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापारिक गतिविधियों की रीढ़ भी होती हैं,यही कारण है कि निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन प्रमुख मार्गों का किया निरीक्षण
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कलेक्टर ने कई महत्वपूर्ण मार्गों का निरीक्षण किया, जिनमें तिलसिवा से भैंसामार गोंड़पारा,लांची से सत्तीपारा,परशुरामपुर-उमेश्वरपुर मार्ग से मोहनपुर पंडोपारा, उमेश्वरपुर से पार्वतीपुर सरईपारा तथा सलका कर्मी टिकरा से लक्ष्मीपुर खास मार्ग शामिल रहे, इसके अलावा कंचनपुर से काशी कुर्रीपारा और प्रेमनगर रोड से राजाकछार तक के नवीनीकरण कार्यों का भी जायजा लिया गया, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत देवीपुर-महामाया पंडुम मार्ग,बड़ाकापाद-पम्पापुर-कोट-पटना मार्ग, उमेश्वरपुर-कुमरभवना मार्ग,वृंदावन-सलका मार्ग और नारा-प्रेमनगर-रामानुजनगर मार्ग सहित कई निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
गोबरी नदी पुल पर बढ़ी निगरानी की मांग…
क्षेत्र के लोगों का मानना है कि गोबरी नदी पुल का मामला केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि हजारों ग्रामीणों के आवागमन, शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ा विषय है, बरसात करीब है और रपटा पुल की स्थिति को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है, ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि कलेक्टर सड़कों की तरह इस मामले पर भी सीधे संज्ञान लेंगी और निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश जारी करेंगी।
जनता की उम्मीदें अब गोबरी नदी पुल पर भी…
कलेक्टर के इस निरीक्षण के बाद जिले में एक नई चर्चा शुरू हो गई है, लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि जिस तरह सड़कों की गुणवत्ता की जांच स्वयं कलेक्टर ने की है, उसी तरह गोबरी नदी पर बन रहे स्थायी पुल और लंबे समय से अधूरे पड़े रपटा पुल के मामले को भी गंभीरता से लिया जाएगा, गोबरी नदी का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है, पुराना पुल टूटे लगभग 11 महीने होने जा रहे हैं, लेकिन वैकल्पिक रपटा पुल अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। दूसरी ओर 3 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से स्थायी पुल का निर्माण भी जारी है,ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंच सकती हैं, तो गोबरी नदी पुल की वास्तविक स्थिति का भी निरीक्षण होना चाहिए,इससे न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता स्पष्ट होगी बल्कि कार्य की गति और जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी।
कलेक्टर की कार्यशैली ने बढ़ाया भरोसा
जिले में लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला है जब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी स्वयं सुबह-सुबह मैदान में उतरा हो, यही वजह है कि लोगों के बीच यह संदेश गया है कि यदि शिकायतें और समाचार तथ्यात्मक हैं तो उन पर कार्रवाई भी संभव है,अब लोगों की नजरें गोबरी नदी पर टिक गई हैं,जहां अधूरा रपटा पुल,निर्माणाधीन स्थायी पुल और मानसून की दस्तक एक साथ कई सवाल खड़े कर रहे हैं,सड़कों की गुणवत्ता की जांच ने जहां जनता का भरोसा बढ़ाया है, वहीं अब यह उम्मीद भी मजबूत हुई है कि गोबरी नदी पुल मामले में भी जल्द कोई ठोस पहल देखने को मिल सकती है।
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