राज शेखावत बोले…अभिषेक कभी अधिकृत अध्यक्ष नहीं थे
220 पदाधिकारियों के संगठन छोड़ने का दावा फिजूल
रायपुर,01 जून 2026। छत्तीसगढ़ में राजपूत समाज की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों के केंद्र में बनी करणी सेना का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। कुछ दिन पहले डॉ. राज शेखावत की क्षत्रिय करणी सेना छोड़कर कालवी विचारधारा वाली राजपूत करणी सेना में शामिल हुए अभिषेक कुमार सिंह ने दावा किया था कि,उनके साथ प्रदेश के 220 पदाधिकारी भी संगठन छोड़ चुके हैं। अब इस पूरे मामले पर क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राज शेखावत ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर अभिषेक सिंह के दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। शेखावत का कहना है कि अभिषेक सिंह कभी भी संगठन के विधिवत नियुक्त और अधिकृत प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहे। उन्हें केवल विशेष परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व दिया गया था। संगठन के अनुसार छत्तीसगढ़ के अधिकृत प्रदेश अध्यक्ष पहले भी वीरेंद्र सिंह तोमर थे और वर्तमान में भी वही प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा है कि, अभिषेक सिंह और उनके कुछ सहयोगी संगठन के संविधान, अनुशासन और निर्धारित व्यवस्था के विपरीत गतिविधियां संचालित कर रहे थे। इसकी समीक्षा के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया था। संगठन का दावा है कि कार्यकारिणी भंग होने के बाद संबंधित लोगों के पास संगठन का प्रतिनिधित्व करने या उसके नाम से बयान जारी करने का कोई अधिकार नहीं था।
220 पदाधिकारियों के दावे पर उठाए सवाल : राष्ट्रीय कार्यालय ने अभिषेक सिंह के उस दावे को भी खारिज किया है जिसमें उन्होंने अपने साथ 220 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के संगठन छोड़ने की बात कही थी। संगठन का कहना है कि अभिषेक सिंह के पास न तो संगठन की वास्तविक सदस्य संख्या का अधिकृत रिकॉर्ड था और न ही वे ऐसी स्थिति में थे कि पूरे प्रदेश संगठन की ओर से कोई दावा कर सकें। स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अधिकांश जिला, तहसील, संभाग और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी आज भी संगठन के साथ जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व और संगठन की विचारधारा के प्रति निष्ठावान हैं।
तोमर बंधुओं के मुद्दे के बाद बढ़े मतभेद : दरअसल, प्रदेश में चर्चित तोमर बंधुओं के मामले के दौरान क्षत्रिय करणी सेना की ओर से चलाए गए आंदोलन के बाद संगठन के भीतर वैचारिक मतभेद सामने आने लगे थे। उस समय प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन अभिषेक सिंह की टीम कर रही थी। आंदोलन के दौरान संगठन को विरोध और आलोचना का भी सामना करना पड़ा था।
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