- तीन बार पदोन्नति में लगभग 15 को फायदा,17 और लाइन में,जून के पहले सप्ताह में सूची आने की संभावना
- जहां फूट सेफ्टी ऑफिसर का पद होना था बेसिक भर्ती,वहां अब
- चपरासी से बन रहे अधिकारी! नियम केंद्र के,सिस्टम छत्तीसगढ़ वाला
- छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग का नया मॉडल,चपरासी से कंट्रोलर तक…बस प्रमोशन लेते जाइए!
- फूट सेफ्टी ऑफिसर का बेसिक पद खत्म? विभाग में चल रहा ‘गेट वन गेट फ्री’ प्रमोशन ऑफर!
- खाद्य विभाग का नया ऑफर,चपरासी भर्ती होइए, अधिकारी बन जाइए!
- तकनीकी डिग्री वाले लाइन में, प्रमोशन वाले कुर्सी पर!
- मिलावटी तेल पकड़ने वाला विभाग खुद ‘मिलावटी पात्रता’ में फंसा
- खाद्य विभाग में अब ‘गेट वन गेट फ्री’ प्रमोशन योजना सुपरहिट!
- राजपत्र पढि़ए मत…यहां नियम फाइलों में बदल जाते हैं!
- खाद्य विभाग में प्रमोशन का चमत्कार, 12वीं
- पास से तकनीकी अधिकारी तक का सफर
- आज चपरासी, कल कंट्रोलर…बस व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए!
- तकनीकी पद पर गैर-तकनीकी प्रमोशन? खाद्य विभाग की व्यवस्था सवालों में

-न्यूज डेस्क-
रायपुर,31 मई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग इन दिनों ऐसी वजहों से चर्चा में है,जिन्हें सुनकर सरकारी नियम भी शायद शर्म से फाइलों में छिप जाना चाहें, यह विभाग अब खाद्य सुरक्षा से ज्यादा पदोन्नति सुरक्षा के लिए जाना जाने लगा है, जिस विभाग को जनता के खाने की गुणवत्ता जांचनी थी, वहां अब खुद नियुक्तियों और योग्यताओं की गुणवत्ता सवालों में घिर गई है। सूत्र बताते हैं कि विभाग में जो कुछ चल रहा है,वैसा शायद ही देश के किसी दूसरे राज्य में देखने को मिले, क्योंकि यहां नियम किताबों में कुछ और हैं, लेकिन विभागीय व्यवस्था में कुछ और, हालत यह हो गई है कि अब विभाग के गलियारों में व्यंग्य में कहा जा रहा है छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग में नौकरी नहीं, मल्टीलेयर प्रमोशन स्कीम चल रही है, और यह व्यंग्य यूं ही पैदा नहीं हुआ।
12 वीं पास 1900 ग्रेड पे के कर्मचारी नमूना सहायक एवं चपरासी को एग्जीक्यूटिव अधिकारी बना सकती है?
धारा 91 केंद्र सरकार को प्रशासनिक मामलों एवं अन्य मं नियम रूल बनाने की शक्ति देती है जिसके तहत् केंद्र सरकार द्वारा फूड सेफ्टी ऑफिसर,एवं अभिहित अधिकारी के क्वालिफिकेशन योग्यता निर्धारित की गई है, तथा अभिहित अधिकारी पद के प्रमोशन संबंधित पात्रता के नियम भी निर्धारित किए गए तथा राज्य सरकार केवल इस प्रमोशन के प्रतिशत को तय कर सकता है परंतु पात्रता को नहीं, उल्लेखनीय ये है कि फूड सेफ्टी ऑफिसर पोस्ट को प्रमोशन से भरे जाने संबंधित कोई नियम नहीं बनाया हैं, तो क्या राज्य सरकार केंद्र सरकार के रूल नियम बनाने की शक्ति को ओवरराइड कर तथा केंद्र सरकार के बिना अनुमोदन के एफएसओ पद को प्रमोशन से भरे जाने एवं पात्रता के नियम बना सकती है? जबकि केंद्र सरकार ने एफएसओ की भर्ती एवं योग्यता का स्पष्ट नियम बनाए है, परंतु गैजेट नोटिफिकेशन भारत सरकार 2022 के अनुसार जिला अधिकारी या अभिहित अधिकारी के प्रमोशन रूल के तर्ज पर एफएसओ को प्रमोशन से भरे जाने का केंद्र सरकार का न ही कोई नियम है ना ही कोई निर्देश न ही कोई सर्कुलर, तो क्या राज्य सरकार केंद्रीय अधिनियम को ओवरराइड कर एफएसओ पोस्ट को अधिनियम से बाहर के किसी भी 12 वीं पास 1900 ग्रेड पे के कर्मचारी नमूना सहायक एवं चपरासी को एग्जीक्यूटिव अधिकारी बना सकती है?
छत्तीसगढ़ मॉडल में ‘गेट वन गेट फ्री’ प्रमोशन योजना-खाद्य विभाग में प्रमोशन का जो नया मॉडल चर्चा में है, उसे कर्मचारी अब ‘गेट वन गेट फ्री योजना’ कहने लगे हैं, क्यों? क्योंकि यहां प्रमोशन भी मिल रहा है, पद भी बढ़ रहा है और पदस्थापना भी वहीं बनी रहती है, यानी एक लाभ के साथ दूसरा लाभ मुफ्त, एक कर्मचारी ने हंसते हुए कहा यह सरकारी विभाग कम, सुपरमार्केट ऑफर ज्यादा लग रहा है।
तीन बार पदोन्नति में लगभग 15 को फायदा,17 और लाइन में, जून के पहले सप्ताह में सूची आने की संभावना-सूत्रों के अनुसार नमूना सहायक पद से अब तक तीन चरणों में लगभग 15 लोगों को पदोन्नति दी जा चुकी है, और अब हालात ऐसे हैं कि विभाग में प्रमोशन की नई सूची आने की चर्चा तेज हो गई है, बताया जा रहा है कि हाल ही में भर्ती और प्रमोशन प्रतिशत 10′ से बढ़ाकर 25′ कर दिया गया, अब 17 और लोगों को पदोन्नति देने की तैयारी की चर्चा है और जून के पहले सप्ताह में सूची आने की संभावना बताई जा रही है,अब सवाल उठ रहा है क्या फूड सेफ्टी ऑफिसर का मूल तकनीकी पद धीरे-धीरे प्रमोशनल पद में बदलता जा रहा है?
क्या पैसे लेकर तय हो रही पात्रता?- विभागीय हलकों में सबसे गंभीर चर्चा कथित लेनदेन को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि कई मामलों में मोटी रकम के आधार पर फाइलों को आगे बढ़ाया गया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय कर्मचारी खुले में भले न बोलें, बंद कमरों में चर्चा खूब हो रही है, एक कर्मचारी ने तंज कसते हुए कहा जहां नियम अटकते हैं, वहां नोटशीट और नोट दोनों काम आते हैं।
क्या छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के नियम खत्म हो जाते हैं?- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 94 राज्य सरकार को भर्ती नियम बनाने का अधिकार देती है,लेकिन कानूनी मानदंडों का कहना है कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय तकनीकी पात्रता खत्म नहीं कर सकती, यानी प्रमोशन प्रतिशत बदल सकता है, भर्ती प्रक्रिया बदल सकती है, लेकिन एफएसओ की मूल तकनीकी प्रकृति नहीं, बिलकुल सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो रहा है, क्योंकि यदि केंद्र सरकार कहती है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी तकनीकी पद है, तो फिर वह प्रमोशन की मानदंडों से सामान्य प्रशासनिक पद जैसा कैसे बन गया?
अब विभाग में चल रहा सबसे बड़ा व्यंग्य- विभागीय गलियारों में इन दिनों कई चर्चाएं वायरल हैं, कोई कहता है यहां फूड सेफ्टी नहीं, प्रमोशन सेफ्टी चल रही है, दूसरा बता रहा है एफएसओ बनने के लिए अब फूड टेक्नोलॉजी नहीं, फाइल टेक्नोलॉजी चाहिए, तीसरा सबसे तीखा व्यंग्य करता है आज चपरासी है, कल कंट्रोलर भी बन सकता है… बस व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
जहां डायरेक्ट भर्ती होनी थी,वहां प्रमोशन की सीढि़यां लग गईं
फूड सेफ्टी ऑफिसर यानी एफएसओ का पद केंद्र सरकार के अनुसार टेक्निकल और सलाहकार वाला मूल पद माना जाता है, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 तथा एफएसएसएआई रूल्स के अनुसार इस पद के लिए फूड टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, एग्रीकल्चर साइंस जैसे सब्जेक्ट्स में टेक्निकल डिग्री जरूरी है, यानी यह पद ऐसा माना गया जहां सीधे योग्य तकनीकी अभ्यर्थियों की भर्ती होनी चाहिए, लेकिन छत्तीसगढ़ में कथित रूप से इसकी पूरी आत्मा ही बदल दी गई, यहां अब व्यवस्था कुछ ऐसी बताई जा रही है की चपरासी से नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी यानी जिस पद तक पहुंचने के लिए देशभर में छात्र सालों तक तकनीकी पढ़ाई करते हैं, वही पद यहां कथित रूप से प्रमोशन की सीढि़यों से हासिल किया जा रहा है।
12वीं पास से टेक्निकल अफसर विभाग में सबसे बड़ा सवाल
सूत्रों के अनुसार मॉडल सहायक जैसे पदों पर 12वीं पास कर्मचारी भर्ती हुए, फिर समय के साथ वे प्रमोशन करने वाले फूड सेफ्टी ऑफिसर बनने लगे, अब विभाग के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है, 12वीं पास व्यक्ति अचानक बायोटेक्नोलॉजी और फूड टेक्नोलॉजी का विशेषज्ञ कैसे बन गया? यदि कोई कर्मचारी नौकरी करते हुए टेक्निकल डिग्री ले भी आता है, तो सवाल यह है कि वह रेगुलर ड्यूटी के बीच रेगुलर टेक्निकल पढ़ाई कब और कैसे कर रहा था? विभागीय कर्मचारी अब व्यंग्य में कहते हैं यहाँ डिग्री नहीं, व्यवस्था रेगुलर है।
मध्यप्रदेश ने खत्म किया, छत्तीसगढ़ ने चमका दिया
सबसे मजेदार और चौंकाने वाली बात यह है कि जिस नमूना सहायक पद को मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में समाप्त कर दिया गया, वही पद छत्तीसगढ़ में अब अधिकारी बनने का एक्सप्रेस रास्ता बन गया है, दूसरे राज्यों ने तकनीकी गुणवत्ता मजबूत करने के लिए ढांचा बदला, लेकिन छत्तीसगढ़ में कथित रूप से ऐसा सिस्टम तैयार हो गया जिसमें निचले पदों से लोग तकनीकी अधिकारियों की कुर्सियों तक पहुंच रहे हैं, अब विभाग में मजाक चलता है यहां मेहनत नहीं, सीढ़ी सही पकड़ो।
स्थापना शाखा बनी सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र
इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा सवाल स्थापना शाखा पर उठ रहे हैं, क्योंकि वही शाखा पात्रता जांचती है, फाइल तैयार करती है, प्रमोशन सूची बनाती है, आदेश जारी करती है, ऐसे में यदि अपात्र या विवादित पात्रता वाले लोग अधिकारी बन रहे हैं, तो सवाल सीधे स्थापना शाखा पर खड़ा होता है, विभाग के अंदर अब यह लाइन खूब सुनाई दे रही है राजपत्र दिल्ली में बनता है, असली नियम स्थापना शाखा में।
राजपत्र बनाम व्यवस्था की लड़ाई
केंद्र सरकार के नियम 2.1.3 में फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर की योग्यता साफ़ लिखी गई है, लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि यहां नियमों की अलग व्याख्या कर व्यवस्था चलाई जा रही है, कहीं जनरल बीएससी को टेक्निकल डिग्री मान लिया गया, कहीं डिस्टेंस एजुकेशन की विवादित डिग्रियां स्वीकार हो गईं, तो कहीं ऐसे सब्जेक्ट्स को भी योग्यता दे दी गई, जिनसे फ़ूड सेफ्टी से सीधा संबंध ही नहीं था, अब कर्मचारी विशेषज्ञों में कहते हैं यहां योग्यता नहीं,योग्यता की व्याख्या बताती है।
जनता के स्वास्थ्य पर कितना बड़ा खतरा?
विडंबना देखिए जिस विभाग को जनता को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाना था, वही विभाग अब ‘मिलावटी पात्रता’ के आरोपों में घिर गया है, यदि तकनीकी योग्यता की जगह प्रमोशन और नेटवर्क हावी होगा, तो फिर जनता कैसे भरोसा करेगी कि उसके खाने की जांच सही विशेषज्ञ कर रहे हैं? फूड सेफ्टी ऑफिसर कोई टेबल-कुर्सी वाला साधारण पद नहीं होता, यही अधिकारी खाद्य सैंपल लेते हैं, जांच करते हैं, लाइसेंस निरीक्षण करते हैं, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, ऐसे पदों पर यदि विवादित पात्रता वाले लोग बैठेंगे, तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल : जिम्मेदार सो रहे हैं या सब जानते हैं?
अब सवाल यह नहीं कि विभाग में क्या चल रहा है, सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं? क्या उन्होंने नियम पढ़े नहीं? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद रखी गईं? क्योंकि इतने वर्षों तक यदि यही प्रक्रिया चलती रही और किसी ने सवाल नहीं उठाया, तो संदेह स्वाभाविक है।
अंत में सबसे बड़ा व्यंग्य
छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग में इन दिनों एक लाइन सबसे ज्यादा गूंज रही है यहां नियम नहीं, व्यवस्था काम करती है, और दूसरी लाइन उससे भी ज्यादा तीखी है खाद्य सुरक्षा अधिकारी का बेसिक पद खत्म हो चुका है… अब असली बेसिक पद चपरासी है।
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