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बैकुंठपुर@ कांग्रेस में फीता कटता था, हमारी सरकार में इमारत खड़ी होती है” : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

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  • कोरिया जिले को स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी सौगात, नर्सिंग कॉलेज और अटल आरोग्य लैब का भूमिपूजन व शुभारंभ
  • सरडी गांव में बनेगा तीन मंजिला नर्सिंग कॉलेज, जिला अस्पताल निर्माण 31 मई 2027 तक पूरा करने के निर्देश
  • फीता कटिंग से फुल बिल्डिंग तक: कोरिया में स्वास्थ्य क्रांति या राजनीतिक इंजेक्शन?
  • नर्सिंग कॉलेज, आरोग्य लैब और मंच से कांग्रेस पर प्रहारज्स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रम में विकास से ज्यादा गूंजा “भ्रष्टाचार मॉडल” बनाम “निर्माण मॉडल”


बैकुंठपुर,30 मई 2026(घटती-घटना)
। बैकुंठपुर का जिला चिकित्सालय परिसर उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बन गया जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कोरिया जिले को स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बड़ी सौगात देने का दावा किया,मंच सजा था, नारियल फूट रहे थे, फीते कट रहे थे,शिलापट्ट चमक रहे थे और भाषणों में विकास के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य की धार भी खुलकर बह रही थी। कार्यक्रम में नवीन शासकीय नर्सिंग कॉलेज का भूमिपूजन और अटल आरोग्य लैब का शुभारंभ हुआ, लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी दवा वह बयान बना जिसमें स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस शासनकाल को भ्रष्टाचार का कालखंड बताते हुए कहा कि उस समय केवल फीते काटे जाते थे, शिलान्यास होते थे, लेकिन निर्माण कार्य अधूरे रह जाते थे।
मंत्री के भाषण का अंदाज ऐसा था मानो वे किसी राजनीतिक एक्स-रे मशीन से पिछली सरकार की हड्डियां जांच रहे हों,उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में योजनाओं की नींव रखी जाती थी,लेकिन उन योजनाओं का भविष्य अक्सर अधूरा रह जाता था, कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण पैसों का अभाव बना रहता था,जनता के सामने यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वर्तमान सरकार केवल पत्थर लगाने नहीं,इमारत खड़ी करने आई है, स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से कहा कि वर्तमान में प्रदेश में विष्णुदेव साय की सरकार है और यह सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में पैसों की कमी नहीं आने दे रही। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि किसी कार्य के लिए 10 रुपये की जरूरत होती है तो सरकार 15 रुपये देने को तैयार है ताकि काम बीच रास्ते में दम न तोड़ दे। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है,हालांकि जनता के मन में सवाल यह भी तैर रहा था कि सरकारी योजनाओं में अतिरिक्त पैसा विकास में जाएगा या फिर वही पुरानी बीमारी—कमीशन,ठेके और फाइलों की सुस्ती—इलाज को फिर से आईसीयू में पहुंचा देगी।
सरडी गांव में बनेगा तीन मंजिला नर्सिंग कॉलेज जनता को अब पत्थर नहीं,परिणाम चाहिए
कोरिया जिले को मिली ये परियोजनाएं निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं,यदि नर्सिंग कॉलेज समय पर बनता है,अटल आरोग्य लैब सुचारू रूप से चलती है और जिला चिकित्सालय पूरी क्षमता से काम करता है तो यह क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी,इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी बल्कि स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर भी मिलेंगे,लेकिन जनता अब केवल शिलापट्टों से प्रभावित नहीं होती,उसे अब उद्घाटन मंचों की चमक से ज्यादा अस्पताल की वास्तविक स्थिति दिखाई देती है,उसे पता है कि विकास का असली मतलब भाषण नहीं बल्कि इलाज है,मरीज के लिए सबसे बड़ी राजनीति यह है कि उसे समय पर डॉक्टर मिल जाए,जांच हो जाए और दवा उपलब्ध हो जाए,फिलहाल बैकुंठपुर में स्वास्थ्य योजनाओं का बड़ा उद्घाटन हो चुका है। मंच से बड़े दावे किए गए हैं। राजनीतिक तीर भी छोड़े जा चुके हैं,अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में ये घोषणाएं जमीन पर कितनी स्वस्थ साबित होती हैं और कितनी फिर से सरकारी फाइलों के वार्ड में भर्ती हो जाती हैं।
विधायक ने मांगा डेंटल कॉलेज और एम्स जैसी सुविधा
कार्यक्रम के दौरान बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े ने भी जिले की कई मांगें स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखीं,उन्होंने डेंटल कॉलेज और एम्स जैसी सुविधाओं की मांग करते हुए कहा कि कोरिया जिले को स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है,साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी दी कि सकरिया और मुरमा में दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है,मंच पर मांग और आश्वासन का यह सिलसिला राजनीति का स्थायी हिस्सा माना जाता है,जनता हर बार तालियां बजाती है और फिर वर्षों तक इंतजार करती है कि घोषणा धरातल पर उतरती है या नहीं।
अटल आरोग्य लैब अब रिपोर्ट मोबाइल पर भी…
कार्यक्रम का दूसरा बड़ा आकर्षण अटल आरोग्य लैब का शुभारंभ रहा। मंच से बताया गया कि यहां 136 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी,जांच रिपोर्ट सीधे डॉक्टरों तक पहुंचेगी और मरीजों के मोबाइल पर भी उपलब्ध होगी,यह घोषणा सुनकर कई लोग प्रभावित नजर आए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक जांच रिपोर्ट पाने के लिए मरीजों को कई बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते रहे हैं,जानकारी दी गई कि जिला अस्पतालों में 136 प्रकार की जांचें, सिविल अस्पतालों में 111, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 75 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 64 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी,सुनने में यह व्यवस्था किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी लगती है,लेकिन जनता जानती है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मशीनें पहुंच जाना ही पर्याप्त नहीं होता,असली परीक्षा तब शुरू होती है जब मशीनों को चलाने वाला स्टाफ चाहिए, मेंटेनेंस चाहिए और सबसे जरूरी — सिस्टम में जवाबदेही चाहिए,प्रदेश के कई अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें धूल खाते हुए देखी गई हैं क्योंकि या तो ऑपरेटर नहीं होते या फिर तकनीकी खराबी महीनों तक फाइलों में इलाज ढूंढती रहती है,ऐसे में जनता की उम्मीदें तो बढ़ी हैं,लेकिन भरोसा अभी परीक्षण की प्रक्रिया में है।
घर-घर पहुंचेगा स्वास्थ्य विभाग,बनेगा हेल्थ डेटा
स्वास्थ्य मंत्री ने अपने भाषण में एक और बड़ी योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब सरगुजा संभाग के प्रत्येक परिवार तक स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचेगी और हर व्यक्ति का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। सभी लोगों को आभा ऐप से जोड़ा जाएगा और उनका स्वास्थ्य डेटा भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, उन्होंने बताया कि बस्तर में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत यह अभियान पहले से चल रहा है जहां 37 लाख लोगों में से 24 लाख का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। सरकार इसे डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति के रूप में पेश कर रही है,हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेटवर्क तक स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं है, वहां डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सफलता कितनी व्यावहारिक होगी, यह आने वाला समय बताएगा,कई ग्रामीणों के लिए अभी भी अस्पताल पहुंचना ही बड़ी चुनौती है। ऐसे में मोबाइल आधारित स्वास्थ्य रिकॉर्ड और ऑनलाइन रिपोर्ट व्यवस्था को जमीन पर सफल बनाने के लिए मजबूत तकनीकी नेटवर्क और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी,वरना यह योजना भी सरकारी प्रस्तुतियों की स्लाइड में चमकती रहेगी और गांवों में लोग अब भी पर्ची लेकर लाइन में खड़े दिखाई देंगे।
अब मरीज नहीं भटकेगा : बड़ा दावा,बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से यह भी कहा कि अब मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा,उन्होंने दावा किया कि जल्द ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी जिससे जिले के लोगों को बाहर जाकर इलाज कराने की जरूरत कम होगी,साथ ही उन्होंने जिले में जल्द एक सर्जन की नियुक्ति की घोषणा भी की, यह बयान निश्चित रूप से राहत देने वाला है क्योंकि कोरिया सहित सरगुजा संभाग के कई जिलों में गंभीर मरीजों को रायपुर, बिलासपुर या अन्य बड़े शहरों में रेफर किया जाना आम बात है,लेकिन वास्तविकता यह भी है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी वर्षों से बड़ी समस्या बनी हुई है,कई अस्पतालों में भवन तो बन गए लेकिन डॉक्टर नहीं हैं, कहीं डॉक्टर हैं तो मशीनें नहीं, कहीं मशीनें हैं तो दवाइयां नहीं,और कहीं सब कुछ होने के बावजूद मरीजों को यह कहकर बाहर भेज दिया जाता है कि यहां सुविधा उपलब्ध नहीं है,ऐसे में मरीज नहीं भटकेगा वाला बयान जनता के लिए उम्मीद भी है और परीक्षा भी।
स्वास्थ्य के मंच पर राजनीति का इंजेक्शन
इस पूरे कार्यक्रम में स्वास्थ्य योजनाओं से ज्यादा चर्चा मंत्री के राजनीतिक हमलों की रही, कांग्रेस शासनकाल को फीता कटिंग सरकार बताकर भाजपा सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अब केवल शिलान्यास नहीं बल्कि निर्माण और संचालन भी होगा, हालांकि राजनीति में यह दृश्य नया नहीं है। हर नई सरकार पिछली सरकार के अधूरे कार्यों को भ्रष्टाचार बताती है और अपने नए शिलान्यासों को विकास क्रांति। जनता अब इस राजनीतिक एक्स-रे को समझने लगी है,उसे पता है कि चुनाव के मौसम में हर सड़क विकास मार्ग बन जाती है और हर भवन जनता की ऐतिहासिक सौगात कहलाने लगता है, लेकिन जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है क्या इस बार अस्पताल समय पर बनेंगे? क्या नर्सिंग कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक होंगे? क्या डॉक्टर स्थायी रूप से उपलब्ध रहेंगे? क्या गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी? या फिर कुछ वर्षों बाद कोई नया मंत्री इसी मंच से खड़े होकर फिर कहेगा कि पिछली सरकार केवल शिलान्यास कर गई थी?


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