- सट्टा-जुआ और साइबर ठगी के नेटवर्क तक कब पहुंचेगी जांच?
- 5 हजार में खाते बेचने वालों पर कार्रवाई, लेकिन खातों का इस्तेमाल करने वाले मास्टरमाइंड कौन?
अम्बिकापुर,30 मई 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा पुलिस ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना गांधीनगर क्षेत्र के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। दोनों आरोपियों के बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से साइबर शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने अपने बैंक खाते महज ५-५ हजार रुपये में अन्य व्यक्तियों को बेच दिए थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन और साइबर अपराधों में किया जा रहा था।
डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना गांधीनगर पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की। पुलिस मुख्यालय (तकनीकी सेवाएं) नवा रायपुर से प्राप्त निर्देशों के बाद म्यूल अकाउंट की जांच की गई, जिसमें कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए।
पहले मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के खाता धारक गुफरान जाहिद (३२ वर्ष), निवासी तकिया शरीफ रनपुरखुर्द, के खिलाफ अपराध क्रमांक २५२/२०२६ दर्ज किया गया। उसके बैंक खाते के खिलाफ कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना से साइबर पोर्टल पर शिकायतें दर्ज थीं। पूछताछ में आरोपी ने अपना बैंक खाता ५ हजार रुपये में बेचने की बात स्वीकार की।
दूसरे मामले में तजमुल अंसारी (२५ वर्ष), निवासी तकिया शरीफ रनपुरखुर्द, के खिलाफ अपराध क्रमांक २५३/२०२६ दर्ज किया गया। उसके बैंक खाते के विरुद्ध कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना से ऑनलाइन शिकायतें दर्ज थीं। आरोपी ने भी पूछताछ में अपना बैंक खाता ५ हजार रुपये में दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। दोनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं और आगे की जांच जारी है।
खाते बेचने वाले पकड़े गए, खरीदने वाले कौन?
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन लोगों ने अपने खाते बेचे, वे तो गिरफ्तार हो गए, लेकिन जिन लोगों ने ये खाते खरीदे और जिनके जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन किए गए, वे अब तक जांच के दायरे में क्यों नहीं आए?
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार म्यूल अकाउंट किसी भी साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, जुआ, फर्जी निवेश और अन्य वित्तीय अपराधों की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे नेटवर्क में आम लोगों के बैंक खाते किराये पर लेकर या खरीदकर बड़ी रकम का लेन-देन किया जाता है, जिससे असली संचालक पर्दे के पीछे बने रहते हैं।
कई राज्यों से शिकायतें, फिर भी नेटवर्क बेनकाब नहीं
दोनों खातों के खिलाफ देश के सात से आठ राज्यों से शिकायतें दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं है। साइबर अपराध से जुड़े जानकारों का मानना है कि इतनी व्यापक शिकायतों के पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। यदि पुलिस खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी, आईपी एड्रेस और रकम प्राप्त करने वाले अंतिम लाभार्थियों की गहराई से जांच करे तो बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
सट्टा-जुआ कनेक्शन की भी चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि ऑनलाइन सट्टा और जुआ संचालित करने वाले गिरोह बड़ी संख्या में म्यूल अकाउंट का उपयोग करते हैं। ऐसे में लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच केवल खाताधारकों तक सीमित रहेगी या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगी जो इन खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी, सट्टा या अन्य अवैध कारोबार चला रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी
सरगुजा पुलिस का कहना है कि म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह, विकास सिंह एवं ऋषभ सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जनहित का सवाल
म्यूल अकाउंट धारकों की गिरफ्तारी निश्चित रूप से सराहनीय कदम है, लेकिन आम लोगों के मन में सवाल है कि क्या कानून का शिकंजा केवल 5 हजार रुपये में खाते बेचने वालों तक ही सीमित रहेगा, या फिर उन बड़े नेटवर्क संचालकों तक भी पहुंचेगा जो ऐसे खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन को अंजाम दे रहे हैं? साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टा-जुआ के कथित मास्टरमाइंड तक कार्रवाई पहुंचने का इंतजार अब भी बना हुआ है।
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