- शासकीय योजना या निजी सिंचाई मिशन? कटोरा पंचायत में हैंडपंप खनन पर उठे गंभीर सवाल…
- जहां योजना सरकारी लेकिन पानी निजी खेतों में
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया 30 मई 2026 (घटती-घटना)। कटोरा ग्राम पंचायत में शासकीय हैंडपंप खनन कार्य को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में स्वीकृत सरकारी हैंडपंप योजनाओं को लगातार प्रस्तावित सार्वजनिक स्थलों से हटाकर निजी खेतों में स्थापित कराया जा रहा है, अब यह मामला केवल एक हैंडपंप तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाने लगा है।
सड़क किनारे होना था हैंडपंप, पहुंच गया निजी पट्टे की जमीन में- शिकायतकर्ता भाजपा जिला मंत्री व पूर्व सरपंच नंदिनी, महिला मोर्चा मंडल पटना अध्यक्ष चंद्रकाली,भाजयुमो पटना मंडल महामंत्री तीरथ दास एवं ग्रामीणों के शिकायत अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत हैंडपंप खनन कार्य विजय राजवाड़े के खेत के पास सड़क किनारे प्रस्तावित था,लेकिन आरोप है कि कार्य को बदलकर सीधे विजय राजवाड़े की निजी पट्टे की जमीन में करा दिया गया, ग्रामीणों ने जब मौके पर पहुंचकर विरोध किया और काम रुकवाया,तब ग्राम पंचायत सचिव आशिष कुमार रजवाड़े द्वारा कथित रूप से आदेश की प्रति दिखाते हुए बताया गया कि हैंडपंप शासकीय भूमि में होना है, लेकिन कुछ समय बाद सरपंच अनीता सिंह और उनके पति बृज कुमार प्रजापति द्वारा दोबारा खनन कार्य शुरू करा दिया गया और कहा गया कि ‘यह प्राइवेट खनन है, अब सवाल यही उठ रहा है कि अगर खनन निजी था तो शासकीय आदेश क्यों दिखाया गया? और अगर सरकारी था तो निजी भूमि में कैसे शुरू हो गया?
कटोरा में पानी से ज्यादा गहरा हो गया रहस्य
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में सरकारी योजनाओं का लोकेशन ट्रांसफर मॉडल चल रहा है, कागजों में हैंडपंप सार्वजनिक स्थानों के लिए स्वीकृत होते हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते-पहुंचते उनका रास्ता बदल जाता है,ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर कोरिया,जिला पंचायत और जनपद पंचायत को लिखित रूप से सौंप दी है। अब जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आखिर सरकारी योजना निजी सुविधा कैसे बनती जा रही है।
पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप
यह पहला मामला नहीं है ग्रामीणों ने पुराने मामलों का हवाला देते हुए बताया कि आदेश क्रमांक 52 दिनांक 24 जनवरी 2024 के तहत जिला खनिज न्यास संस्थान मद से चेतन राम के घर के पास मंदिर प्रांगण में हैंडपंप खनन की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी,लेकिन आरोप है कि हैंडपंप मंदिर प्रांगण में लगने के बजाय लगभग 2 किलोमीटर दूर निजी खेत में खनन करा दिया गया, उस समय क्षेत्रीय विधायक भैयालाल रजवाड़े द्वारा जांच और राशि वसूली का आश्वासन भी दिया गया था,लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज तक मंदिर प्रांगण में हैंडपंप नहीं लग पाया।
राशन दुकान की जगह निजी खेत में पानी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब एक माह पूर्व उचित मूल्य दुकान के पास स्वीकृत हैंडपंप को भी सुभाषचंद्र राजवाड़े द्वारा लगभग 2 किलोमीटर दूर निजी भूमि में स्थापित करा लिया गया, इसमें भी सरपंच की मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है, शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का सवाल योजनाएं जनता
के लिए या चुनिंदा लोगों के लिए?-
गांव में अब चर्चा यह है कि आखिर सरकारी योजनाओं का असली लाभ किसे मिल रहा है? ग्रामीणों का कहना है कि अगर सार्वजनिक स्थानों के लिए स्वीकृत योजनाएं लगातार निजी खेतों में पहुंच रही हैं,तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर मामला है,कुछ ग्रामीण व्यंग्य में कहते नजर आए कटोरा पंचायत में पानी वहां निकलता है,जहां सत्ता का खेत होता है।
जांच के बाद खुलेगी असली तस्वीर
अब पूरा मामला प्रशासनिक जांच पर टिका हुआ है, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पंचायत स्तर पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी शासकीय योजनाओं का इसी तरह निजीकरण होता रहेगा, कटोरा पंचायत का यह मामला अब केवल हैंडपंप का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।
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