सरगुजा संभाग में प्रशासनिक कामकाज ठप्प,कलमबंद हड़ताल पर अधिकारी-कर्मचारी,विधायक बोले…जांच में करूंगा पूरा सहयोग

-संवाददाता-
अम्बिकापुर/सीतापुर,29 मई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच उपजा विवाद अब बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संकट का रूप लेता जा रहा है। विधायक और उनके समर्थकों पर नायब तहसीलदार से कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला दर्ज होने के बाद शुक्रवार को पूरा घटनाक्रम हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल गया। एक ओर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर कलमबंद हड़ताल कर दी, वहीं दूसरी ओर विधायक जब खुद गिरफ्तारी देने अंबिकापुर के लिए निकले तो समर्थकों ने बीच रास्ते में उनका काफिला रोक दिया और वापस लौटा दिया।
सड़क पर लेट गए समर्थक
नहीं होने दी गिरफ्तारी
शुक्रवार दोपहर विधायक रामकुमार टोप्पो अपने कुछ निजी सहयोगियों के साथ सीतापुर से अंबिकापुर स्थित आईजी कार्यालय के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे कानून से भागेंगे नहीं और स्वयं गिरफ्तारी देंगे। इसके साथ ही विधायक ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने, किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं करने और प्रशासनिक व्यवस्था में बाधा नहीं डालने की अपील भी की थी। लेकिन उनकी अपील का असर नहीं हुआ। सीतापुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर मंगारी के पास पहले से मौजूद बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने विधायक के काफिले को रोक लिया। कई समर्थक गाडि़यों के सामने धरने पर बैठ गए,जबकि कुछ लोग सड़क पर लेट गए। कार्यकर्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। समर्थक लगातार नारेबाजी करते रहे और कहते रहे कि वे अपने नेता को जेल नहीं जाने देंगे। कई कार्यकर्ता भावुक होकर रोते-बिलखते नजर आए।
समर्थकों की जिद
के आगे झुके विधायक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विधायक टोप्पो ने काफी देर तक कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वे कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं तथा जांच में पूरा सहयोग करेंगे। लेकिन समर्थकों ने उनकी एक नहीं सुनी। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि कार्यकर्ताओं ने विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें वाहन से नीचे उतार लिया और वापस लौटने की मांग पर अड़ गए। आखिरकार समर्थकों के भारी दबाव के आगे विधायक को अपना अंबिकापुर दौरा स्थगित करना पड़ा और वे वापस सीतापुर लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम ने सरगुजा की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
विधायक बोले…हम पूरी तरह न्यायपालिका के साथ : विधायक रामकुमार टोप्पो ने पूरे मामले में कहा कि वे पूरी तरह न्यायपालिका और शासन के साथ हैं तथा जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा,‘मैं अपने दल और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद जहां उचित होगा, वहां गिरफ्तारी दूंगा।‘विधायक ने सीतापुर और सरगुजा संभाग की जनता द्वारा मिल रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की।
सरगुजा में प्रशासनिक कामकाज ठप्प…कलमबंद हड़ताल
इधर विधायक और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सेवा संघ से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी कलमबंद हड़ताल पर रहे। सरगुजा संभाग में राजस्व और प्रशासनिक कामकाज लगभग पूरी तरह प्रभावित रहा। प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी विरोध में हड़ताल पर रहे। राजमोहिनी देवी भवन में संघ से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने सभा आयोजित की, जिसके बाद रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
दरअसल विवाद की शुरुआत 27 मई को राजापुर उप तहसील कार्यालय में हुई घटना से हुई थी। विधायक रामकुमार टोप्पो की बड़ी बहन सीमा धनकी पैरोल से संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने उप तहसील कार्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि वहां पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने उनकी फाइल फेंक दी और उनके साथ बदसलूकी करते हुए कार्यालय से बाहर निकलने के लिए कहा। इसके बाद मामला बढ़ गया। नायब तहसीलदार का आरोप है कि विधायक द्वारा उन्हें राजापुर चौक पर बुलाया गया,जहां विधायक समर्थकों ने पहले उनकी पिटाई की और बाद में विधायक ने भी मारपीट की। इस मामले में सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा ने भी कहा था कि उनके सामने विधायक और समर्थकों द्वारा मारपीट की गई। घटना के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके 10 समर्थकों के खिलाफ कोतवाली अंबिकापुर में एफआईआर दर्ज की गई। वहीं विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के खिलाफ भी सीतापुर थाने में अपराध दर्ज किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार
की भी हो जांच : विश्वविजय तोमर
छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर ने मामले में कांग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें इस विषय पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ आरोप लगते ही एफआईआर दर्ज कर ली गई, जो सरकार की पारदर्शिता को दर्शाता है। साथ ही विधायक स्वयं जांच में सहयोग की बात कर रहे हैं। तोमर ने मांग की कि विधायक की बहन के साथ कथित बदसलूकी और प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं टी. एस. सिंहदेव और अमरजीत भगत पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पूर्व में भी कई घटनाओं में कार्रवाई नहीं हुई थी। तोमर ने कहा कि कलेक्टर स्तर की समीक्षा बैठकों में ऐसे राजस्व, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के व्यवहार की समीक्षा होनी चाहिए, जिनका जनता से सीधा संपर्क रहता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का व्यवहार जवाबदेह और संवेदनशील होना चाहिए।
प्रदेश की राजनीति में बना चर्चा का विषय…
राजस्व अधिकारियों की हड़ताल,विधायक पर एफआईआर,गिरफ्तारी की तैयारी और फिर समर्थकों द्वारा रास्ता रोककर उन्हें वापस लौटाने की घटना अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर प्रशासनिक अमला मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है,वहीं भाजपा कार्यकर्ता इसे राजनीतिक प्रतिशोध और जनप्रतिनिधि का अपमान बता रहे हैं। पूरे घटनाक्रम ने सरगुजा संभाग की राजनीति और प्रशासनिक माहौल को गरमा दिया है।
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